टोटेमिक कुड़मी आन्दोलन क्या है, जाने विस्तार से ? Totemic Kudmi Aandolan
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 दिल्ली चलें , दिल्ली चलें ,  दिल्ली चलें  , टोटेमिक कुड़मी आन्दोलन में आना अनिवार्य क्यों ? 

टोटेमिक कुड़मी आन्दोलन(Totemic Kudmi Aandolan) क्या है ? 

कुड़मी ( टोटेमिक ) जनजाति के लिए यह दुःखद बात है कि ,  झारखण्ड राज्य अलग हुए 22 वर्ष हो गये , उसके बावजूद भी झारखण्ड में बसे कुड़मी ( महतो ) जिनकी आबादी लगभग 24 प्रतिशत है । उनके ऊपर चौतरफा हमला किया जा रहा है । वर्तमान समय में कोई भी कुड़मी हित की बात नहीं करना चाहता । राज्य में कुड़मी जनजाति शैक्षणिक रूप से अत्यन्त ही पिछड़ी हुई है । सामाजिक रूप से आज भी जीवन स्तर गिरा हुआ है । प्रशासनिक रूप से पूरे राज्य में आई.ए.एस. , आई.पी.एस. नगण्य हैं । बी.डी.ओ. , सी.ओ. एवं थाना प्रभारी गिने चुने हैं । राजनीतिक रूप से आज भी कुड़मी समाज अपने वोट का महत्व नहीं समझता है । चन्द पैसों में बिक जाता है । जिसका परिणाम पूरे राज्य में देखने को मिलता है । राज्य में 14 में 5 लोकसभा सीट कुड़मी बहुल क्षेत्र होते हुए भी कुड़मी जनजाति से मात्र दो सांसद हैं । राज्य में 22 विधानसभा क्षेत्र कुड़मी बहुल क्षेत्र है जिसके बावजूद मात्र 8 विधायक ही कुड़मी जनजाति से हैं । 

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Totemic Kudmi Movement 

झारखण्ड अलग राज्य की लड़ाई में कुड़मी जनजातियों का योगदान किसी से कम नहीं रहा है । इस लड़ाई में दर्जनों कुड़मी जाति शहीद हुए हैं – स्व . विनोद बिहारी महतो या वीर शहीद निर्मल महतो । इस लड़ाई के दरम्यान उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि झारखण्ड अलग होने के बाद कुड़मी जनजाति को अपने ही राज्य में दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया जाएगा । आज समाज के ऊपर चौतरफा हमला हो रहा है । इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए कुड़मी समाज यह प्रयास कर रही है कि इन सभी समस्याओं से कैसे निदान पाया जाए । इन समस्याओं का निदान करने हेतु आपके भागीदारी आवश्यक हैं । आपके परिवार से कोई भी व्यक्ति अंदोलन में भाग नहीं लेता है तो समाज का सुधार नहीं हो सकता है । हमारे बेटा – बेटियों को संवैधानिक अधिकार कभी नहीं मिल सकता है । इसलिए इस आन्दोलन में अपने सभी कार्य छोड़कर आना अनिवार्य है । 

टौटेमिक कुड़मी ( महतो ) समाज के बैनर तले 
संसद भवन घेराव ” हुडका जाम ‘ 

दिनांक : 12 दिसम्बर 2022 , स्थान – संसद मार्ग , जंतर मंतर ,नई  दिल्ली 

माँगः- कुड़मी ( महतो ) जनजाति को अनुसूचित जनजाति की सूची में सूचीबद्ध करो । 

 कुड़मी ( महतो ) जनजाति का इतिहास : 

भारतीय जनगणना के अनुसार कुड़मियों / कुरमियों का इतिहास उल्लेखनीय है कि छोटानागपुर एवं संथाल परगना के कुड़मी / कुरमी ( महतो ) जनजाति भारत के जनगणना 1901 एवं 1911 में ” एबओरजिनल कम्यूनिटी ” , 1921 में ” एनिमिस्टस “ तथा 1931 में ” प्रिमिटिव ट्राइब “ की सूची में शामिल थी । 

भारत सरकार का आदेश SRO 510 दिनांक 6 सितम्बर 1950 और नं . 2-38-50 पब्लिक दिनांक 5 अक्टूबर 1950 यह घोषित करता है कि केवल वे जनजातियाँ जिनका नाम 1931 की जनगणना प्रतिवेदन में प्रिमिटिव ट्राइब में समुदाय को अनुसूचित जनजाति घोषित करेंगे और उन्हें अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल किया जाएगा किन्तु छोटानागपुर एवं संथालपरगना के कुड़मी / कुरमी ( महतो ) जनजाति को 1931 की जनगणना में प्रिमिटिव ट्राइब की सूची में रहते हुए भी 1950 की अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल नहीं किया गया । 

विनम्र निवेदन : share this post to your friends , family

मैं अपनी सच्ची श्रद्धा एवं लगन से समाज की भलाई के लिए इस लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत हूँ । मेरे इस प्रयास में किसी भी तरह की कोई राजनीति नहीं है । समाज की भलाई हो , समाज को संवैधानिक अधिकार मिले यही मेरा उद्देश्य हैं । मेरे इस प्रयास में आपकी सहभागिता अनिवार्य है । आइये , हम सब मिलकर समाज के नवनिर्माण में अपना सार्थक सहयोग प्रदान करें ।

 शीतल ओहदार ( केटियार ) , 

टोटेमिक कुड़मी / कुरमी समाज , 

मो०- 9334717429 

झारखण्ड निवेदक : टोटेमिक कुड़मी ( महतो ) समाज ,

टोटेमिक कुड़मी ( महतो ) समाज 

प्रधान कार्यालय – ग्राम – टुण्डूल , पोस्ट- बलालोंग , थाना- नगड़ी , राँची -834004 ( झारखण्ड ) 

संसद भवन घेराव ” हुड़का जाम ”  दिनांक 12 दिसम्बर 2022 दिन सोमवार को टोटेमिक कुड़मी जनजाति को अनुसूचित जनजाति की सूची में सूचीबद्ध करने की मांग को लेकर एक दिवसीय संसद भवन घेराव ” हुड़का जाम ” का आयोजन किया गया है । इस कार्यक्रम में हजारों – हजार की संख्या में झारखण्ड के विभिन्न जिलों से कुड़मी जनजाति दिल्ली के लिए रवाना होगी । इस संसद भवन घेराव ” हुड़का जाम ” कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु टोटेमिक कुड़मी आन्दोलन में आना अनिवार्य है। BY : MANANJAY MAHATO 

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