माँझी शासन व्यवस्था (संथाल जनजाति की शासन व्यवस्था )

  • Post author:
  • Post category:Blog
  • Reading time:13 mins read

माँझी शासन व्यवस्था (माँझी परगना शासन व्यवस्था)

  • संथाल जनजाति की शासन व्यवस्था
  • संथालों ने इस शासन व्यवस्था को सौरिया पहाड़िया जनजाति से ग्रहण किया है, जिसकी राजनीतिक शासन व्यवस्था अत्यंत लोकतांत्रिक थी। 

माँझी

  • गाँव की एक पंचायत का प्रधान – माँझी
  • गाँव की शासन व्यवस्था के संचालन हेतु उत्तरदायी
    • प्रशासनिक एवं न्यायिक अधिकार प्राप्त होते हैं।
    • यजमीन-जायदाद, तलाक, आपसी झगड़े आदि समस्याओं का समाधान करता है।
    • माँझी हत्या जैसे गंभीर अपराध को छोड़कर गाँव के लगभग सभी मामलों का निपटारा करता है।
      • हत्या के मामले में सरकारी हस्तक्षेप अनिवार्य होता है।
    • माँझी को लगान वसूलने से लेकर विवाह संबंध स्थापित कराने तक का अधिकार प्राप्त होता है। 

जोगमाँझी

  • माँझी की सहायता करने हेतु एक सहायक
  • जन्म तथा विवाह संबंधी मामलों पर महत्वपूर्ण सलाह देने का कार्य करता है।
  • साथ ही यह विवाह संबंधी मामलों को सुलझाता है। 

जोग प्रानीक

  • यह जोगमाँझी की अनुपस्थिति में उसके दायित्वों का संचालन करता है। 

 

भग्दो प्रजा

  • झगड़ो के निपटारे में गाँव के कुछ वरिष्ठ लोगों से विचार-विमर्श किया जाता है, जिन्हें भग्दो प्रजा कहा जाता है। 

 

प्रमाणिक/प्रानीक

  • माँझी की अनुपस्थिति में उसके कार्यों का संचालन प्रमाणिक द्वारा किया जाता है। इसे उप-माँझी भी कहा जाता है।

गुडैत/गोड़ाइत

  • यह माँझी के सचिव के रूप में कार्य करता है। 
  • ग्रामीणों को किसी उत्सव या कार्यक्रम की जानकारी पहुँचाने का कार्य गुडैत द्वारा ही किया जाता है। यह लोगों को विभिन्न अवसरों पर एक स्थान पर एकत्रित करता है। 
  • यह गाँव के परिवारों से संबंधित सूचनाएँ भी एकत्रित करता है। 

लासेर टंगाय

  • यह गाँव के प्रहरी की भांति कार्य करता है जो बाहरी आक्रमण से गाँव की सुरक्षा करता है। 

चौकीदार

  • यह पुंलिस की भांति कार्य करता है। यह माँझी के आदेशानुसार किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करता है। 

परगनैत

  • इस व्यवस्था में 15-20 गाँवों को आपस में मिलाकर परगना निर्मित होता है जिसका प्रधान परगनैत कहलाता है।
  • विभिन्न गाँवों के बीच के विवादों का निपटारा परगना में किया जाता है। 

देशमाँझी/मोड़े माँझी

  • यह परगनैत का सहायक होता है, जो 5-8 गाँवों का प्रधान होता है। इस प्रकार एक परगनैत के एक से अधिक सहायक होते हैं।
  • जो मामला माँझी द्वारा नहीं सुलझ पाता है उसे देशमाँझी को भेज दिया जाता है तथा देशमाँझी की पंचायत में अनसुलझे मामलों को परगनैत को स्थानांतरित कर दिया जाता है। 
  • इस प्रकार यह व्यवस्था लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रणाली के समरूप प्रतीत होती है।

दिशुम परगना 

  • यह परगनैत से उच्च स्तर पर अवस्थित होता है। जिन मामलों का निवारण परगनैत की सभा में नहीं होती है उसे दिशुम परगनैत को हस्तांतरित कर दिया जाता है।
  • यह सभी क्षेत्रों में नहीं पाया जाता है। 

बिटलाहा

  • बिटलाहा इस शासन व्यवस्था की सबसे कठोर सजा है, जो यौन अपराधों के दोषी को दिया जाता है। 
  • बिटलाहा के तहत यौन अपराधी का पूर्ण बहिष्कार करते हुये उसे गाँव से निकाल दिया जाता है। 
  • दोषी द्वारा क्षमा याचना करते हुए पूरे गाँव को जाति भोज देने पर बिटलाहा की सजा को समाप्त करने का भी प्रावधान है। 

नायके

  • गाँव का धार्मिक प्रधान नायके कहलाता है। धार्मिक अपराधों पर फैसला नायके द्वारा ही दिया जाता है।

कुडाम नायके

  • यह उप नायके की भांति कार्य करता है। यह गाँव से बाहर देवी-देवताओं की पूजा-पाठ संपन्न कराता है। 

करेला दण्ड

  • यह सबसे हल्का दण्ड है जिसके तहत अपराधी पर ₹5 से ₹150 का दण्ड लगाया जाता है। 

लोबीर सेंदरा

  • यह इस शासन व्यवस्था में सर्वोच्च न्यायिक संस्था होती है। 

सेंदरा बैंसी

  • यह इस शासन व्यवस्था में शिकार परिषद् होता है। 

अन्य तथ्य

  • भग्दो प्रजा को छोड़कर शेष सभी पदधारियों को इस शासन व्यवस्था में भूमि प्रदान की जाती है। 
  • इस शासन व्यवस्था में माग सिम के अवसर पर अधिकारियों का चुनाव किया जाता है। 
  • यूल रूल्स (1856) के नियम के आधार पर माँझी परगना शासन व्यवस्था को कानूनी मान्यता प्रदान की गयी है।