कुर्मी जाति का इतिहास , क्या कुर्मी जाति को जनजाति का दर्जा मिलेगा या नहीं ?
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कुर्मी जाति का इतिहास , क्या कुर्मी जाति को जनजाति का दर्जा मिलेगा या नहीं ?

कुर्मी जाति को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग पिछले कई वर्षों से हो रहा है। 

किसी भी जाति को अनुसूचित जनजाति के रूप में सूचीबद्ध संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत राष्ट्रपति के द्वारा किया जाता है। 

The Tribes and Caste Of Bengal Vs जनजातीय शोध संस्थान का रिपोर्ट 

क्या कुर्मी जाति को वाकई में कभी जनजाति का दर्जा मिला था ? 

अंग्रेज मानव शास्त्रीय  H.H. रिशली की रिपोर्ट के आधार पर ब्रिटिश सरकार ने तत्कालीन छोटानागपुर व उड़ीसा के कुर्मी को जनजाति माना था। H.H. रिशली की रिपोर्ट के आधार पर  रिपोर्ट के आधार पर कुरमी जाति स्वयं को  एसटी सूची में शामिल करने की मांग कर रही है।  रिशली की रिपोर्ट 1891- 93 में “The Tribes and Caste Of Bengal”  के नाम से प्रकाशित हुई थी  

उसके बाद वर्ष 1913 में भारत सरकार ने एक अधिसूचना जारी की थी जो 2 मई 1913 में द गजट ऑफ इंडिया के नाम से प्रकाशित हुई थी।  इसमें बिहार व उड़ीसा में निवास करने वाले  13 जनजाति –  मुंडा ,उरांव , संथाल ,हो भूमिज , खड़िया, घासि , गोंड, कांध , कोरबा, माल-सौरिया , पान, एवं कुर्मी महतो जाति को भी जनजाति माना था।  इसमें शामिल सभी  13 जनजातियों को भारतीय उत्तराधिकार कानून 1865 व 1925 के प्रावधानों से मुक्त रखा गया था।  इसी रिपोर्ट के आधार पर कुर्मी जनजाति दोबारा अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। देश की आजादी के बाद जब 1950 में जब अनुसूचित जनजाति की सूची बनी थी, तब कुर्मी समुदाय को एसटी से हटा दिया गया था। 

झारखंड गठन के बाद की मांग

2004 का जनजातीय शोध संस्थान के पूर्व उपनिदेशक सोमा सिंह मुंडा का रिपोर्ट  

23 नवंबर 2004 को झारखंड सरकार ने कुर्मी को एसटी की सूची में शामिल करने के लिए पुनर्विचार करने की अनुशंसा की थी, जिसके आधार पर 2004 में झारखंड सरकार के कल्याण विभाग के अधीन कार्यरत जनजातीय शोध संस्थान के पूर्व उपनिदेशक सोमा सिंह मुंडा के नेतृत्व में कुर्मीयों को दोबारा जनजाति का दर्जा दिया जाए या नहीं उसकी जांच का दायित्व सौंपा गया।सोमा  सिंह मुंडा ने कुर्मी को जनजाति के रूप में चिन्हित करने की मांग को अस्वीकार कर दिया था।  उन्होंने इसके लिए कई सारे तर्क अपनी शोध रिपोर्ट में बताया-  जैसे 

  1. कुर्मीयों का गोत्र आर्य लोगों के गोत्र के समान  ऋषि-मुनियों से जुड़ा हुआ होता है। 

  2. कुरमी जाती के लोग  हिंदू देवी देवताओं की ही पूजा करते हैं। 

2008  का जनजातीय शोध संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ प्रकाश चंद्र उरांव का रिपोर्ट 

इसके बाद फिर से दोबारा 2008 में जनजातीय शोध संस्थान के तत्कालीन निदेशक डॉ प्रकाश चंद्र उरांव  को  दोबारा कुर्मी को जनजाति के रूप में शामिल किया जाए या नहीं इस पर विचार करने का शोध का कार्य सौंपा गया इस रिपोर्ट में भी कुर्मी यों को आदिवासियों से समतुल्य नहीं पाया गया। 

  1. अधिकतर कुर्मी जाति के लोग महतो उपाधि को ही धारण करते हैं।  

  2. यह गोत्र चिन्हों व गोत्रों को उपनाम के रूप में धारण नहीं करते हैं। 

वर्तमान में झारखंड में कुर्मी जाति को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने के लिए एक बार फिर से आंदोलन शुरू हो चुका है, हालांकि इस आंदोलन का झारखंड की जनजातियों के द्वारा विरोध भी किया जा रहा है।  समय के साथ देखना यह है कि, क्या यह आंदोलन वाकई में सफल हो पाता है या नहीं, यानी कि कुर्मी जाति को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलता है या नहीं यह तो आने वाला समय ही बताएगा। 

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