Khortha Ke Vivah Geet (खोरठा के विवाह गीत )

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 शास्त्रों में चार प्रकार के आश्रम – इन सभी आश्रमों के कर्तव्यों का पालन करके ही मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति मिलती है। 

  • पहला – ब्रह्मचर्य आश्रम 
  • दूसरा – गृहस्थ आश्रम 
  • तीसरा – वानप्रस्थ आश्रम
  • चौथा – संन्यास आश्रम 

हिंदू धर्म के अनुसार मनुष्य पर तीन प्रकार के ऋण होते हैं। 

  • ‘देव ऋण’ – यज्ञ एवं कर्मों के द्वारा इससे मुक्ति मिलेगा 
  • ‘ऋषि ऋण’ – स्वाध्याय (अध्ययन कर ) मुक्ति मिलेगा
  • ‘पितृ ऋण’ – विवाह कर संतान उत्पन्न कर  मुक्ति मिलेगा

मनु के अनुसार आठ प्रकार के विवाह

  1. ब्राह्य 
  2. दैव 
  3. आर्ष
  4. प्राजापत्य
  5. आसुर
  6. गान्धर्व 
  7. राक्षस 
  8. पिशाच
  • इनमें से आधुनिक युग में जो विवाह का प्रचलन है वह ब्राह्य और देव विवाह का मिश्रण है। 

छेका प्रथा :

छेका का अभिप्राय : लड़की का पिता शुभ दिन देखकर वर के हाथों में कुछ रुपया और नए कपड़े देता है।  जो यह प्रमाणित करता है कि आज से वर लड़की के लिए सुरक्षित हो गया है। अब दूसरी कन्या से उसके विवाह की बात नहीं हो सकती। 

तिलक प्रथा :

  • इस प्रथा में लड़की का पिता या भाई अपने कुटुंब लोगों के साथ वर का तिलक करने के लिए कुछ निश्चित सामान, 5 तरह का फल ,रुपया, बर्तन और कपड़ा लेकर लड़का पक्ष के यहां जाते हैं। 
  • वर के माथे पर चंदन का टीका लड़की का भाई लगाता है इसीलिए इस प्रथा को तिलक चढ़ाना कहते हैं। 
  • इसी दिन वर पक्ष और कन्या पक्ष वालों के घर शगुन गीत गाया जाता है।  शगुन शब्द शकुन का अपभ्रंश है जिसका अर्थ है शुभ लक्षण। 

 

विवाह पूर्व मंडप की तैयारी 👍

  • मंडप सखुवा पेड़ की 9 छोटी खंभों से तैयार किया जाता है। 
  • मंडप के सवई घास या खेर से छाया जाता है, ताकि धूप और वर्षा से रक्षा हो।
  • इसे मड़वा छना/ छारा  कहते है। 
    • मड़वा छना/ छारा विहाह के दो दिन पूर्व होता है।  
  • दूल्हे के सर के शेहरा को मऊरी या मऊर कहा जाता है। 
    • मऊरी या मऊर संस्कृत शब्द मौली का अपभ्रंश है।   
    • मऊरी को गांव का माली तैयार करता है। 

भैयारी : बारात जाने के एक दिन पूर्व गांव वालो को पार्टी खिलाना भैयारी कहलाता है। 

बारात जाने के पूर्व संपन्न विधियां 

  • मातृ पूजा – मड़वा के दूसरे दिन 
  • माटी कोडाई 
  • कलश धराई 
  • लावा भुंजाई 
  • इमली घोवाई (एमलो घोटाय ) 
    • लड़के का मामा अपनी बहन को जल पिलाता है।

द्वार पूजा : लड़की वाले के घर, बरात पहुंचने पर वर का पूजा कर स्वागत किया जाता है।

आज्ञा मांगना (आगिया ) : कन्या पक्ष की ओर से बारातियों को भोजन का निमंत्रण देना

कन्यादान : वर को वधु सोप देना (लड़की के पिता ,भाई या चाचा द्वारा )

  • लड़की के पिता ,भाई या चाचा जिसने कन्यादान किया है वह वधू के नए घर का अन्न ग्रहण नहीं करता

सिन्दूरावदन : वर के द्वारा कन्या के मांग पर सिंदूर देना

  • इस अवसर के बाद कोहबर गीत (परिहास गीत ) गाया जाता है। 
  • विवाह के चौथे दिन चोठारी होता है। 
  • वर पक्ष के द्वारा कन्या पक्ष को दौरा या हठुवा  दिया जाता है। 
    • दौरा या हठुवा बांस का टोकरी होता है जिसमें कन्या का वस्त्र आभूषण मिठाई फल आदि होता है।

छोड़वानी – विवाह के दूसरे दिन प्रातकाल  कन्या का विदाई होता है। विदाई से पूर्व कन्या के सखियों के द्वारा दूल्हे से कुछ रुपया लिया जाता है।  इसी रस्म को संग  छोड़वानी कहा जाता है। 

द्वार छेकाई  :

खीर खाने के समय का रुसना

 

विवाह संस्कार

  • नेग का मतलब – रीतियाँ
  • कन्या पक्ष की ओर से वर पक्ष के यहां वर को देखने के लिए जाने के रस्म को घर बरी कहते हैं। 
  • कडुवा विवाह : यह विवाह प्रथा गिरिडीह क्षेत्र में प्रचलित है जिसमें लगनबंदी के साथ लड़की का विवाहिक कार्य करके घर में संपन्न होता है। 
  • विवाह संबंधी विभिन्न नेग (रीतियाँ) निम्नलिखित है – 

1. सगुन (वर / कन्या) 

2. आम/महुवा बीहा 

3. हरदी रांगा (दुवाइरख़ुदा ) 

4. जोग छेछा 

5. लगन बांधा 

6. पइरछन (वर / कन्या) 

7. उबटन पीसा, 

8. बांध कोड़ा, 

9. उबटन माखा, 

10. घी ढारा 

11. कुश उखरवा, 

12. सिन्दूर खेला, 

13. मॉड़वा छारा 

14. सिन्दूर दान, 

15. कलश राँगा, 

16. समधी मिलन,

17. कलश थापा, 

18. भोकरइन मॉगा (वर पक्ष), 

 

11. पानी सहा 

20. दुवाइर टेका, 

21. पानी काटा, 

22. लावा लोक (कन्या पक्ष) 

23. संग छोड़ोनी (कन्न्या पक्ष) 

24. घर भोरा

25.विदाई 

26. खीर खियानी

27. चोठारी

28. सिकार खेला, 

29. चुमान 

30. मॉड़वा पूजा

31. अइमलो पिया, 

32. अठमंगला 

33. सिनाइ फेरा

34. चउखपुरा।

 

 

  • वर पक्ष के लोक गीतों में हास-परिहास, व्यंग्य, उल्लास और उमंग पाया जाता है
  • कन्या पक्ष के लोकगीत बड़े ही करूण एवं हृदयस्पर्शी होते हैं।

वर पक्ष के लोक गीत

कन्या पक्ष के लोकगीत

  • तिलक गीत
  • सगुन के गीत
  • पोखर खाँडेक गीत
  • कलशा-धराई के गीत
  • लावा भुँजाई के गीत
  • ईमली/अमईलो घोंटाय के गीत 
  • हरदी माँखेक गीत/हरदी कलशाक गीत
  • मातृ पूजन के गीत 
  • मऊरी या मऊर के गीत
  • परिछान के गीत
  • कोहबर के गीत 
  • बगुला बगुली नाच गीत 

 

  • लगन के गीत
  • मण्डवा के गीत
  • माटी कोड़ा के गीत
  • कलशा धराय के गीत
  • हरदी माखा गीत
  • मातृ पूजा के गीत
  • द्वार पूजा के गीत
  • विवाह के गीत
  • धृतधारी के गीत
  • सिन्दूर दान के गीत
  • समधी मिलान के गीत
  • कोहवर के गीत
  • बारात के गीत
  • चौठारी के गीत

 

लगन के गीत

 

मड़वा के गीत

  • विवाह के 1 या 2 दिन पूर्व मंडप  का निर्माण होता है जिसके चारों ओर सखुवा या करील बांस   के 9 खंबे होते है  और उसके ऊपर खैर (एक प्रकार का घास ) से  मरवा छारा जाता है।  मंडप के नीचे बेदी  बनाई जाती है। 

हरदी सम्बन्धी गीत

  • वर एवं कन्या दोनों को हल्दी लगाने का रस्म होता है।

उबटन लगाने सम्बन्धी गीत

  • जिस तरह हल्दी लगाने का रस्म होता है उसी तरह उबटन लगाने का भी ररस्म होता है।  
  • उबटन-  जो ,गेहूं का आटा, तेल ,हल्दी आदि को मिलाकर बनाया जाता है 
  • वर एवं कन्या दोनों को उबटन लगाया जाता है। 

कलशा धराय के गीत – कलश रखने का गीत 

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पानी काटने के गीत

  • वर या वधू का बहनोई(जीजा)  बहन या अन्य स्त्रियों के द्वारा ,वर वधु को नहलाने के लिए कुँवा या जलाशय से पानी का  दो घड़ा भरा जाता है।   बहनोई(जीजा) पानी भरे घड़ा को तलवार से स्पर्श करता है।  जब उससे जाता है कि किसका पानी काट रहे हो तो वह कहता है अपने साला/साली का। 

धृतढारी (घी-ढारी)  के गीत

  • मड़वा के दूसरे दिन मड़वा के नीचे वेदी में घी धारने का रस्म होता है।  
  • यह कार्य पंडित या पुरोहित के द्वारा कराया जाता है। 

महुआ बिहाक गीत / आम बिहाक गीत

  • वर जब बारात जाने की तैयारी करने लगता है तो उसके पहले एक रस्म  महुआ बिहा या अंबा (आम ) विवाह का होता है।  इस रस्म के माध्यम से वर को प्रकृति से विवाह हेतु अनुमति लेनी पड़ती है। 

बारात स्वागत संबंधी गीत

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लावा भुँजाई गीत

  • वर वधु दोनों के द्वारा जो लावा खेला जाता है, वह लड़का के घर पर आता है।  वर की बहन नया साड़ी पहनकर लावा मिट्टी के बर्तन खपरी में भुंजती  है। 

दुआइर लागेक गीत

  • जब बारात कन्या के घर में पहुंचता है तो दूल्हे का इस गीत के साथ स्वागत होता है। 

समधी-मिलान गीत

  • वर वधु का विवाह संपन्न होने के बाद वर का पिता और कन्या का पिता आपस में गले मिलते हैं।  इसी को समधी मिलन या समधी भेंट कहा जाता है।  इसमें दोनों नया वस्त्र एक दूसरे को भेंट करते हैं।  और यह माना जाता है कि कन्या का पिता, वर का पिता से ज्यादा हैसियत वाला है, क्योंकि कन्या लक्ष्मी स्वरूप है। 

सेनई फेरेक गीत

  • शादी के बाद मरवा के नीचे एक विधि किया जाता है।  विधि से यह मान लिया जाता है कि वर वधू का संबंध अब रक्त संबंध में परिणत हो गया है अब उन्हें कोई अलग नहीं कर सकता। 

सिन्दुर दान के गीत

  • जब दूल्हे के द्वारा वधू की मांग में सिंदूर दान कर दिया जाता है तो विवाह पूर्ण मान लिया जाता है। 

द्वार छेकाई के गीत

  • विदाई के पश्चात जब वर, वधू को लेकर अपने घर पहुंचता है तो वर की बहन कुछ सहेलियों के साथ दरवाजे पर होती है और वह वर से कुछ रुपया मांगती है ताकि वर वधू को गृह प्रवेश मिल सके

कोहबर के गीत

  • विवाह के बाद वर को एक बहुत ही सजाया हुआ घर जिसे कोहबर करते हैं में ले जाया जाता है।  वहां पर गांव की लड़की और बूढ़ी औरतें वर से मजाक करते हैं। 

विदाई के गीत

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परिछन गीत

  • विदाई के पश्चात जब वर, वधू को लेकर पहुंचता है तो वर पक्ष की स्त्रियों के द्वारा वर वधू का स्वागत किया जाता है जिसे खोरठा में परीछेक कहते हैं। 

चुमावन गीत 

  • कन्या जिस दिन ससुराल पहुंचती है उसके 2 दिनों के बाद चौठारी तथा चुमावन का रसम होता है। 
  • आंगन में जुवाथ में बैठाकर वर वधु को स्नान कराया जाता है फिर ढेकनी चुकनी फोड़ने की विधि होती है। 
  • कन्या रूसती है तो उसे मना कर वर द्वारा लाया जाता है फिर वर-वधू की बौद्धिक परीक्षा होती है इसे कोड़ी खेलना भी कहते हैं

समधी गाली के गीत

  • विवाह के समय बाराती को खाना खिलाया जाता है जिससे मरजादी कहां जाता है।  
  • मरजादी मर्यादित का ही अपभ्रंश है।  
  • इसी अवसर पर कन्या पक्ष के महिलाओं के द्वारा समधी को गाली दिया जाता है। 

बगुला-बगुली नाच गीत (वर के घर में) 

  • बारात निकलने के बाद वर पक्ष के घर में अकेली बची  महिलाओं के द्वारा पुरुष का पोशाक पहन कर  किया जाता है। 

अन्य विवाह गीत

  • डमकच , झुमटा – बारात निकलने के बाद वर पक्ष के घर में अकेली बची  महिलाओं के द्वारा किया जाता है। 
  • Q.तिलक प्रथा में वर के माथे पर चंदन का टीका कौन लगाता है ? लड़की का भाई 
  • Q.किस प्रथा के होने से , वधु के लिए वर सुरक्षित हो गया है ? छेका प्रथा  

 

बेटी बिदाई के लोक गीतों

मइया बिनु जइतइ हदिआइ

मइया के देखी-देखी अंखिया झझाइ गो

हामर नूनी हकइ मइया के दुलरिया 

बापा कांदइ घरें बहसी, मइया कांदइ पिड़े बइसी गो

हामर नूनी जइतइ ससुराइर ।

अब बेटी भेलिक पोहना गो 

छोटो बहिन कांदइ दुवारा बइसी, दीदी संगे जड़बड़ गो

दीदिकेर नावाँ घरवा गो।

वर पक्ष:-

बेटा रे किया लइये जिबे ससूर घरा, किया लइये घुरबे रे 

मइया गो सीथा के सिंदूर लइ जिबइ, धनी लइये घुरबड़ गो। 

बेटा रे तोर धनी बड़ी रूप सुंदर, संदूके भोराइल हो रे 

मइया गो एड़क मारी खोलबइ संदुकवा से 

हामे धनी देखबइ गो। 

नेउ के चाला बर बाबुक बाप 

लागी जितउ धोतिया में पाना रसेक दाग 

लागे देहु पाना रसेक दाग 

आवो तो….. जनमल धोइ देतो दाग

 

विवाह संस्कार के हास-परिहास के लोकगीत-

फूल अइसन भात समधी

फूल अइसन भात हो,

एहो भात बिगभे समधी

घर गेलें समधिन पुछतो

काटबो तोर हाथ हो। तनी भात बिगल हलिये

कि जे भेलो हाथ हो,

काइट लेला हाथ हो।

 

वर पइरछन (स्वागत) के स्वागत में कन्या पक्ष की ओर से –

चोर के जनमल बेटवा

अंधरिया रात काहे अइले रे

हमर दुवरियें कटहर हे

कटहर नाय चोरइहें रे

बोंदर जइसन थोथना तोर

फार जइसन दाँत रे

चेर…. अइले रे।

 

वर के सालियों में मुखों से निःसृत एक व्यंग्य-वाण-

तरें-तरें अमवा मंजइर गेल

एहटा लागउ दजबोरा हो….2

दाढ़ी- मिसी भँवरा गुंजइर गेल

एहटा लागउ दजबोरा हो …2

 

उबटन भूंजा

जोवा रे गहुमा केरे उबटन, जोवा रे गहूमा के

राइ सरिसा केरी तेल, सेहो भुंजे बइसल
उबटन दूलरइता ।।

उबटये काकी सोहागिनी

बाबा हाँथे कंगना डोलावे, नइनी बोलावे,

सेहो उबटये जेठी सोहागिनी,

बाबा हाँथें कंगना डोलावे नइनी बोलावे,

सेहो बइसल उबटन !

उबटल लगवेक(बेटा छउवाक)

नान्हीं नान्हीं झिलिया मोटे-मोटे उबटन-2

झिलिया खरकी भूँये लोरये उबटन लावये हो!

मंगिया सँवारी के बइसल दुलरइता बाबु-2

उबटये आजी सोहागिनी उबटन लावये हो!

मुंहवां संवारी के बइसल दुलरइता बाबु-2

उबटये काकी सोहागिनी उबटन लावये हो !

बहियां पसारी के बइसल दुलरइता बाबु-2

उबटये बहिनी सोहागिनी उबटन लावये हो!

जंधिया पसारी बइसल दुलरइता बाबु-2

उबटये भउजी सोहागिनी उबटन लावये हो!

उबटन लगवा (बेटी छउवाक)

केथिके आसन केथिके सिंहासन

केथिके परलइ बिछावन नुनीक गातें उबटन हे।

रूपा के आसन, सोने के सिंहासन

पटिया के परलइ बिछावन,

नुनीक गातें उबटन हे!

केहू गावय केहू बजावय केहू चिरे लंबे केस

नुनीक गातें उबटन हे!

राधा गावय रूकमिनी बजावइ

पदमिनी चिरे लंबे केस

नुनीक गातें उबटन हे

पानीक कलस राखेक समझ

केते दुखें भइया पानी सहलों गो

हामे लेबो भइया सोनाक टिकली गो!

आधा धुरे भइया बाघे टेकल गो

हामे लेबो भइया सोनाक सिकड़ी गो!

आधा धुरें भइया जोंकें धरल गो

हामे लेबो भइया सोनाके चूड़ी गो!

केते दुखें भइया कलस भोरलों गो

तोरे ठिने लेबउ सुन्दर साड़ी गो!

समधरी समझ

छोटे मोटे गुवा गो बाबा, बड़ी रे सवाद,

कोन छगरी चरवा संगे गो बाबा

लेलें अंकवाइर!

कोन गाड़ी जोतवा संगें गो बाबा

लेलें अंकवाइर!

कोन कुकुर मुहाँ संगें गो बाबा

लेलें अंकवाइर!

माड़वा तरें

केहू देतइ साया साड़ी, केहू देतइ साल गे

केहू देतइ सिंथाइँ सिंदुर राखबें सांभाइर गे

ससुर देत साया – साड़ी भेंसूर देतइ साल गे

सँइया देतइ सिंथाइँ सिंदुर राखबे सांभाइर गे!

मोसी पिंधइ सोना-चांदी, सखी झाड़इ चुइल गे

सँइया पिंधइ दोलना, राखबें सांभाइर गे!

ससुर देतइ घर बाड़ी, सासें माल-जाल गे सँ

इया देतइ मानिक रतन राखबें सांभाइर गे!

बेटी बिदाइ

बोनवाँ ही फुललइ धोवइया फुलवा

बोनावाँ इंजोइ भेलइ हे!

मइया के कोखें बेटिया जनमलइ

घरवा इंजोर भेलइ हे!

जेठ में झर-हइ धोवइया फुलवा

बोनवाँ झाँझर भेलइ हे!

आवे बेटी चललइ ससुरा घरा

घरवा आँधार भेलइ हे!

बेटी बिदाइ 2

समधी बिदाइ मांगे पहिलियो सांझ

पहिलियो सांझ गे बेटी किरिन उगी गेल

उठू उठू उठूगे बेटी, खाहूँ दही भात ।

हामे कइसे खरियो हो बाबा, कोरा ना छोड़ड़

छोटका भइयवा गे बेटी, मायेक कोरें दे

चढ़हू डोलिया गे बेटी, जइबे बड़ी धूर ।

किनखर कांदलें हो बाबा, करेजवा साले मोर!

किनखर कांदलें हो बाबा, गमछिया भीजे मोर!

किनखर हांसलें हो बाबा, पलंकिया हुलइस गेल !

माइ के कादलें हो बाबा करेजवा साले मोर

भइयाक कांदलें हो बाबा, गमछिया भीजे मोर

भोजीक हांसलें हो बाबा, पलकिया हुलइस गेल ।

भला हो ननदोसिया, ननदिया लेले जाइ

तोहरा के घरें हे सरहज, ननदिया बइरिन भेल

हमरा घरे हे सरहज, भेली ठकुराइन ।

बेटी बिदाइ 3

एका कोसा गेलें बेटी, दुए कोसा गेलें गो!

तीने कोसें विजु बोना हो!

टॉइड़ उपारें, ताके नइहर के लोगा गो!

बाबा कांदइ घरें वइसी, मइया कांदइ पिंड़े बइसी गो!

अबे बेटी भेलिक पोहना हो!

छोट भाइ-बहिन कांदथ, दीदी संगे जइबइ हामिन !

दीदी के नवाँ घरवा हो!

बेटी भइया के गलवा सपन होतो गे,

बेटी, सासु के गलवा आपन होतो गे,

बेटी, गोतनी के गलवा आपन होतो गे…. ।

दुवाइर लागला परे

तोर मायें सेंकल हलो एँड़री पातें,

हामें सेंकबो पान पातें रे / गे….. ।

दुवाइर लागला परे-2

घर ले बाहर भेलइ, आपन भइया!

दूरियाँ – ही ठाढ़ भेलइ हो !

पहिले चुमाइ लीहें, आपन पुतहिया!

तबे भोजियाक जनम-ल हो !

जकर भइया कातारी के चास करइ,

तकर बइहनी गुड़वा के पात चाटइ हो!

पुरूष-पच्छिमा के जे, अइलइ जहाज हो!

सेहो जहाज, लागलइ दुवारीं हो!

झांझन

सोना के खड़म पिंधी बइजकऽ हथ छोटका ददा

चलें गो-चलें गो मइया हामर घरा गो अगे,

मोर धनिया दरद से बेयाकुल गो!

कइसे हमें जीवो बेटा तोहर घरवा हो

एगो तोर धनिया बइजको हउ –

कुबोलिया रे ।।

सोना के खड़म पिंधी बइजकऽ हथ छोटका ददा

चलें ने चलें न भउजी हामर घरा हो

एगो. मोर धनिया दरदें बेयाकुल गो

कइसे हमें जीबो बाबु तोहर घरा हो

अरे तोर धनिया बइजको हउ कुबोलिया रे बबुआ !!

सोना के खड़म पिंधी बइजको हथ छोटका ददा

चला हो-चला हो दगरी हामर महलिया

अगे, मोर धनिया दरद से बेयाकुल भेली हे

कइसे हाम जीबो बाबु तोहर घरा

अरे तोर धनिया बइजको हउ कुबोलिया रे बबुआ । ।

चलें चलें दगरीन हमरो घरा

नाय तो दरद से मोइर जीते मोर धनिया

अगे, मोर धनिया दरद से बयाकुल भेल ही!

जउ तोंय लइ आन गड़ीया रे बबुआ

ताबे हाम जीबोउ तोर घरा रे बबुआ ।।

घेरा गीत

बारS बछर राम जी परलों बेजार हो,

केउ नाहीं करइ उतजोगा हो राम

मानुस जनम दिन चारी हो……

चार पहर रात बिनिया डोलावइ राम

भिनसरे दम छूटी गेल हो राम, मानुस ……

चारी जुवान मिली खटिया उठावइ राम

लइकें गेलथीन जमुनइ के तीर हो, मानुस ….

टूटल खाटी राम जी फुटल भोरसिया

दस-पाँच लोक बरियात रे भाय, मानुस ….

चंदन काठा केरी सरवा रचइलइ राम

बेल पतरी अगनी मुख देलइ रे भाय, मानुस..

सरवें लागलइ आइग सरगें ठेकइ घूँआ

सरगेक लोक पूछइ किया आनले संदेसा हो, मा_

टूटल खाटी राम जी फुटल भोरसिया

केव नाहीं संग-संगतवा रे भाय, मानुस ……

केउ कांदइ भाय, जनम जनम हो

केउ कांदइ, छउ मास रे भाय

केउ कांदइ दिन चारी हो, मानुस …

माइ कांदइ राम जी जनम-जनम हो

बहिन कांदई छउ मासा रे भाय

तिरिया कांदइ दिन चारी हो, मानुस …..