Khortha Ke Samanya Geet (खोरठा के सामान्य गीत -1)

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 शिक्षा से सम्बंधित लोकगीत

पिया पोढ़े नाइ छोड़िहा 

झलफले उठे खनी 

नीम दोतइन लोटे पानी 

देबोहो पिया, पोढ़े नाँइ छोड़िहा 

करम कांठे खड़म छोलाइ 

झलमल थली टिपाइ 

देबोहो पिया हमारो पढ़इया 

पिया पोढ़े नाइ छोड़िहा।

 

माटी से सम्बंधित लोकगीत

माय , माटी बोनेक झूर

नाक हमर छोटानागपुर

माथ हमर पारसनाथ 

लागो हमर बहियाँ 

भइर हमर पनियाँ 

दामूदर-बराकर हाथ 

माथ हमर पारसनाथ।

 

जनी सिकार (महिला शिकारी) 

बारो बछरें भइया जनी सिकार। 

बहिनी के मुड़ें भइया पगरी बंधाई 

नाम जगवलें भइया जनी सिकार। 

चंपा, सिनगी, कइली दइक भइया 

इयाद करावे भइया जनी शिकार।

 

ढेलुवागीत – (झूला)

आमा तरें सुतलें रे दादा

नीमा तरें रे चोर 

भउजी केरी बिछिया रे दादा 

लइये गेलइ रे चोर।

 

बन्दर नाच

धान बुनो, धान बुनो कोइया कानारी 

समधी के गीदर-बुतरू सभे अनारी । 

धान बुनो, धान बुनो बीचे खोंधोरी 

समधी के दूगो माग, दूइयों अंधरी । 

मधुपुरेक दाइल-चार रामगढ़ेक के पानी 

अलग-अलग भात रांधे नागपुरक रानी ।

 

बालगीत

झिमझिमालों झिमालों 

मायें-बापें खाइ लो 

हमरां नात्र देलो

गजरधूम पटासूम

उपर कुल्ही गीदर कांदे ओहे रे 

हेंट कुल्ही गीदर कांदे कोहे… 2 

लिखिया पटापट मारे दे… 2

झक्का झुमइर खेले दे

 

नशाबंदी

दारू पीके मारलें मोरा, रे मुंहजारा …2  

गाइ-भंइस बेच देले 

दूध छाड़ी दारू पीलें

 तनिको नाइ लाज हो तोरा । 

हित-नाता सभे छुटल 

छउवा-पुता भूखे सुतल 

घरा के नाञ फिकिर हो तोरा 

दारू पीके मारलें मोरा।

 

महंगाई 

हाइ रे बिधि बड़ी दुखा भेल

कलफी – कलफी जीया गेल

अढ़ाई टके चाउर बीके, बीके पाँच टके तेल 

आर बाजारा गुंडी बीके, डेढ़ टके सेर 

कइसन दहैजेक दिन भेल। 

कलफी-कलफी जीया गेल।