केंद्रीय सचिवालय ( Central Secretariat )
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JPSC MAINS PAPER 4 NOTES


केंद्रीय सचिवालय ( Central Secretariat )

  • केंद्रीय सचिवालय में केंद्र सरकार के सभी मंत्रालय और विभाग शामिल हैं । 

  • प्रशासन की दृष्टि से केंद्र सरकार विभिन्न मंत्रालय और विभागों में विभक्त है । केंद्रीय सचिवालय ऐसे सभी मंत्रालयों और विभागों की समष्टि है । 

  • एक मंत्रालय में सामान्यतः दो से चार विभाग होते हैं , लेकिन जरूरी नहीं है की किसी मंत्रालय में कोई विभाग अवश्य होगा ही , जैसे- विदेश मंत्रालय के अधीन कोई विभाग नहीं है   । इसी प्रकार कुछ ऐसे विभाग भी हैं जिन्हें किसी मंत्रालय के अधीन नहीं रखा गया है जैसे महासागर विकास विभाग । 

  • मंत्रालयों और विभागों के राजनीतिकप्रमुख मंत्रीगण तथा प्रशासनिक प्रमुख सचिवगण होते हैं । 

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 77 में केंद्र सरकार के कामकाज को अधिक सुविधाजनक और इन कार्यों को मंत्रियों को सौंपने संबंधी नियम बनाने का अधिकार भारत के राष्ट्रपति को दिया गया है । 

  • यह विभाग विभाजन प्रणाली का आधार है । इसकी विशेषता यह है कि यदि किसी मंत्री को मंत्रालय / विभाग का प्रभारी बनाया जाता है जो राष्ट्रपति आदेश जारी करता है । 

  • इस प्रकार मंत्रालय / विभाग की धारणा का सूत्रपात विभाग – विभाजन ( पोर्टफोलियो ) प्रणाली हुआ है । 

  • ‘ एलोकेशन ऑफ़ बिजनेस रूल्स ‘ ( कार्य आबंटन के नियम ) में निर्दिष्ट मंत्रालयों / विभागों के समूह को केंद्रीय सचिवालय के रूप में जाना जाता है । 

  • वर्तमान में , केंद्र सरकार के मंत्रालय / विभाग भारत सरकार ( कार्यों का बँटवारा ) नियमावली 1961 से शासित है ।

मंत्रालय की संरचना ( Structure of a Ministry )

  •  केंद्र सरकार के मंत्रालय विशेष की संरचना तीन स्तरीय है अर्थात 

( i ) एक राजनीतिक प्रमुख अर्थात कैबिनेट मंत्री जिसकी सहायतार्थ राज्यमंत्री और उपमंत्री होते हैं । 

  • किंतु कभी कभी राज्यमंत्री भी स्वतंत्र प्रभार में मंत्रालय / विभाग का राजनीतिक प्रमुख होता है ; 

( ii ) सचिव की अध्यक्षता में सचिवालय संगठन / सचिव लोकसेवक होता है । 

  • सचिव के सहायतार्थ संयुक्त सचिव , उपसचिव , अवर सचिव और अन्य कर्मचारी होते हैं । 

  • सचिवालय संगठन में दो विशेष घटक – अधिकारी और कार्यालय ; कर्मचारियों को निर्देशित और नियंत्रित करने के लिए तथा लिपिकीय कार्य को निष्पादित करने के लिए होते हैं।  

( iii ) विभाग प्रमुख की अध्यक्षता में कार्यकारी संगठन होता है । 

  • इन विभाग प्रमुखों को विभिन्न पदनामों जैसे- निदेशक , महानिदेशक , आयुक्त , महानिरीक्षक , मुख्यनियंत्रक आदि के नाम से जाना जाता है । 

सचिवालय – संगठन ( Secretariat Organisation )

  • प्रत्येक मंत्रालय मुख्यतया विभागों में बंटा होता है । 

  • प्रत्येक विभाग स्कंधों (wings) में , प्रत्येक स्कंध प्रभागों(divisions) में तथा प्रभाग शाखाओं(branches) में बँटे होते हैं । प्रत्येक शाखा अनुभागों (sections)में बँटी होती है । 

  • अनुभाग ( जिसे कार्यालय कहते हैं ) किसी मंत्रालय / विभाग का सबसे छोटी और सबसे निचले स्तर की इकाई है ।

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सचिवालय की भूमिका और कार्य :

  • सचिवालय कार्मिक एजेंसी है । 

  • इसका कार्य भारत सरकार को उसकी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों के निर्वहन में सहयोग और सहायता करना है । 

  • यह सरकार के लिए सूचना के भंडार स्वरूप है जो विगत की कार्यवाहीयों और कार्यों के प्रकाश में भावी नीतियों , उभरती समस्याओं और वर्तमान कार्यकलापों के जाँच कार्य में सरकार की सहायता करता है । 

  • किसी विषय पर सरकारी स्तर पर लिए जाने वाले निर्णय से पहले विषय की विस्तृत जांच परख का काम सचिवालय द्वारा किया जाता है । 

शासकीय पुस्तिका के अनुसार सचिवालय द्वारा मंत्रालयों / विभागों से जुड़े निम्नलिखित कार्य किए जाते हैं 

  1. मंत्री को नीति निर्धारण करने तथा समय समय पर आवश्यकतानुसार उसमें संशोधन करने में मदद करना। 

  2. विधान तथा नियम और विनियम बनाना। 

  3. क्षेत्रीय नियोजन और कार्यक्रम निरूपण। 

  4. मंत्रालय / विभाग के कार्यों से संबंधित व्यय का बजटीय प्रावधान और नियंत्रण।  

  5. संचलनात्मक कार्यक्रमों और योजनाओं और उनमें संशोधन से संबंधित प्रशासनिक और वित्तीय अनुमोदन देना अथवा लेना। 

  6. कार्यपालक विभागों या अर्ध – स्वायत्त कार्यक्षेत्रीय एजेंसियों द्वारा नीतियों और कार्यक्रमों के संचालन का पर्यवेक्षण और परिणामों का मूल्यांकन। 

  7. नीतियों की व्याख्या और उनके बीच समन्वय स्थापित करना , सरकार की अन्य शाखाओं की सहायता करना तथा राज्य प्रशासन से संपर्क बनाए रखना। 

  8. मंत्रालय / विभाग और इसकी कार्यपालक एजेंसियों दोनों में कार्मिक और सांगठनिक सक्षमता विकसित करने के उ करना। 

  9. मंत्री को संसदीय जिम्मेदारियों के निर्वहन में सहायता प्रदान करना ।

प्रशासनिक सुधार आयोग ने 1968 में कहा था सचिवालय अपनी  कार्यप्रणाली से प्रशासन को संतुलन और स्थायित्व  प्रदान करता है तथा पूरे मंत्रालय के तंत्र के लिए केंद्रक का कार्य करता है। 

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