वाक्य के भेद

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     वाक्य

  • दो या दो से अधिक शब्दों के सार्थक समूह को वाक्य कहते हैं। 
  • जिस शब्द समूह से कोई एक बात पूरी तरह समझ में आ जाए, उसे ‘वाक्य’ कहते हैं। 
  • जैसे –
    • (क) राम ने रावण को वाण से मारा।
    • (ख) विद्या मनुष्य को नम्रता सिखाती है।

 

वाक्य के अंग या खंड

  • उद्देश्य
  • विधेय 

 

1. उद्देश्य

  • वाक्य में जिसके विषय में कुछ कहा जाए, उसे सूचित करने वाले शब्दों को ‘उद्देश्य’ कहते हैं। 
  • उद्देश्य प्राय: ‘कर्ता’ होता है। 
  • जैसे-
    • (क) लड़का खेल रहा है। (उद्देश्य हैं – ‘लड़का’ )
    • (ख) राम दौड़ रहा है। (उद्देश्य हैं –  ‘राम’ )
    • (ग) सुरेश पढ़ रहा है। (उद्देश्य हैं – ‘सुरेश’)

 

उद्देश्य की रचना प्राय: चार प्रकार से होती है-

  • (i) संज्ञा से– राम चढ़ा।
  • (ii) सर्वनाम से– वह चढ़ा।
  • (iii) विशेषण से– सवार चढ़ा।
  • (iv) वाक्यांश से– स्वतंत्रता का पुजारी चढ़ा।

 

 

2. विधेय

  • वाक्य में ‘उद्देश्य’ के बारे में जो कुछ कहा जाए; उसे सूचित करने वाले शब्द को ‘विधेय’ कहते हैं। 
  • उदाहरण-
    • (क) लड़का खेल रहा है। (विधेय हैं – ‘खेल रहा है’)
    • (ख) राम दौड़ रहा है। (विधेय हैं – ‘दौड़ रहा है’ )
    • (ग) सुरेश पढ़ रहा है। (विधेय हैं – ‘पढ़ रहा है’)

 

 

वाक्य के भेद

(i) रचना के आधार पर – तीन प्रकार

  • 1. सरल वाक्य (सोझा वाक्य )
  • 2. मिश्र वाक्य (मेसर   वाक्य )
  • 3. संयुक्त वाक्य (जोटल  वाक्य )

(ii) अर्थ के आधार पर

  • 1. विधिवाचक
  • 2. निषेधवाचक, 
  • 3. आज्ञावाचक, 
  • 4. प्रश्नवाचक, 
  • 5. विस्मयवाचक, 
  • 6. संदेहवाचक, 
  • 7. इच्छावाचक, 
  • 8. संकेतवाचक।

(i) भाव के आधार पर – दो प्रकार

  • क्रिया सहित वाकया  – जिसमे क्रिया हो ( राम दौड़ता है )
  • क्रिया रहित वाकया – जिसमे क्रिया न हो (राम का गांव का नाम मधुपुर है )

हिंदी में 

खोरठा में 

गुण 

विधिवाचक

साइकरवा 

किसी बात के होने का बोध

निषेधवाचक

नायकरवा 

किसी बात के न होने का बोध

आज्ञावाचक

हुकुम /आदेश 

आज्ञा, उपदेश अथवा आदेश

प्रश्नवाचक

सवालवाची  

प्रश्न किए जाने का बोध

विस्मयवाचक

हायचोकवा  

सुख, दुःख, आश्चर्य

संदेहवाचक

सकाहाबोधक 

संदेह, शंका, संभावना

इच्छावाचक

हीछाबोधक  

इच्छा, आकांक्षा, आशीर्वाद, कामना

संकेतवाचक

संकेतवाक/ इंगितबोधक

एक क्रिया का दूसरी क्रिया पर निर्भर

 

 

1. सरल वाक्य 

  • जिस वाक्य में एक क्रिया होती है और एक कर्ता होता है, उसे ‘साधारण वाक्य’ या ‘सरल वाक्य’ कहते हैं। 
  • इसमें एक ‘उद्देश्य’ और एक ‘विधेय’ होता है। जैसे-

(क) बच्चा दूध पीता है।

(ख) बिजली चमकती है।

(ग) राजेश बीमार है।

(घ) कृष्ण ने कंस को मारा।

(ड़) शीला आपको अपना बड़ा भाई मानती है।

 

2. मिश्र वाक्य

  • जिस वाक्य में एक मुख्य या स्वतंत्र उपवाक्य हो और एक या अधिक गौण या आश्रित उपवाक्य हो, उसे ‘मिश्र वाक्य’ या ‘मिश्रित वाक्य’ कहते हैं। 
  • जिस वाक्य में मुख्य उद्देश्य और मुख्य विधेय के अलावा एक या अधिक समापिका क्रियाएँ होती हैं, उसे मिश्र वाक्य कहते हैं। 
  • ‘मिश्र वाक्य’ को ‘जटिल वाक्य’ भी कहा जाता है। 
  • मिश्र वाक्य के उपवाक्य– 
    • कि, जैसा-वैसा, जो-वह, जब-तब, क्योंकि, यदि-तो आदि 

(क) जब वह आयेगा, तब मैं घर चला जाऊँगा।

(ख) अध्यापक ने बताया, कि कल स्कूल में छुट्टी होगी।

(ग) यदि इस बार वर्षा न हुई, तो सारी फसल नष्ट हो जाएगी

 

उपर्युक्त वाक्यों में ‘जब वह आयेगा’, ‘अध्यापक ने बताया’, ‘सारी फसल नष्ट हो जाएगी’, मुख्य उपवाक्य और ‘तब मैं घर चला जाऊँगा’, ‘कल स्कूल में छुट्टी होगी’, ‘इस बार वर्षा न हुई’, आश्रित उपवाक्य हैं।

 

3. संयुक्त वाक्य 

  • जिस वाक्य में दो या दो से अधिक मुख्य अथवा स्वतंत्र वाक्य हों, उसे ‘संयुक्त वाक्य’ या ‘यौगिक वाक्य’ कहते हैं। 
  • जिसमें दो या दो से अधिक सरल वाक्य या मिश्र वाक्य अव्ययों द्वारा संयुक्त हों वे संयुक्त वाक्य कहलाते हैं।
  • संयुक्त वाक्य का प्रत्येक वाक्य अपनी स्वतंत्र सत्ता बनाए रखता है, एक दूसरे पर आश्रित नहीं होते। जैसे-

(क) हम दिल्ली गये और वहाँ तीन दिन रहे। (दोनों सरल और स्वतंत्र वाक्य)

(ख) वह आया और उसने देखा कि, भीतर कोई नहीं है। (पहला स्वतंत्र दूसरा मिश्र वाक्य)

(ग) मैं रोटी खाकर लेता था कि पेट में दर्द होने लगा, और दर्द इतना बढ़ा कि तुरंत डॉक्टर को बुलाना पड़ा। (दोनों मिश्र वाक्य)

 

 

1. विधिवाचक वाक्य

  • जिस वाक्य से किसी बात के होने का बोध हो, वह विधिवाचक वाक्य कहलाता है। जैसे-
    • (क) भारत एक महान देश है।
    • (ख) सुशील पटना गया हुआ है, कल लौट कर आएगा।
    • (ग) मैंने सेब खाया और मेरी भूख मिट गई।

 

2. निषेधवाचक वाक्य

  • जिस वाक्य से किसी बात के न होने का बोध हो, वह निषेधवाचक वाक्य कहलाता है। जैसे-
    • (क) मैं कॉलेज नहीं गया।
    • (ख) मैं कॉलेज नहीं गया, इसलिए मैं पास नहीं हुआ।
    • (ग) मैं स्कूल नहीं गया और इसीलिए मेरे अधिक नंबर नहीं आये।

 

3. आज्ञावाचक वाक्य

  • जिस वाक्य से आज्ञा, उपदेश अथवा आदेश देने का बोध हो, वह आज्ञावाचक वाक्य कहलाता है। जैसे-
    • (क) तुम खाओ।
    • (ख) कृपया घर चले जाइए।
    • (ग) यहाँ शोर मत करो।
    • (घ) शीघ्र जाओ वरना गाड़ी छूट जाएगी।

 

4. प्रश्नवाचक वाक्य

  • जिस वाक्य से प्रश्न किए जाने का बोध हो, वह प्रश्नवाचक वाक्य कहलाता है। जैसे-
    • (क) उसका नाम क्या है?
    • (ख) वह कहाँ चला गया?
    • (ग) क्या आप कल मेरे यहाँ आए थे?
    • (घ) क्या तुम खा रहे हो?

 

5. विस्मयवाचक वाक्य

  • जिस वाक्य से सुख, दुःख, आश्चर्य आदि का बोध हो, वह विस्मयवाचक वाक्य कहलाता है। जैसे-
    • (क) अहा! कितना सुंदर दृश्य है।
    • (ख) ओह! मेरा सिर फटा जा रहा है।
    • (ग) हैं! तुम पास हो गये।
    • (घ) छि! कितना गंदा स्थान है।

 

6. संदेहवाचक वाक्य

  • जिस वाक्य से संदेह, शंका, संभावना आदि का बोध हो, वह संदेहवाचक वाक्य कहलाता है। जैसे- (क) शायद माताजी आ जायँ।

7. इच्छावाचक वाक्य

  • वे वाक्य जिसमें हमें वक्ता की कोई इच्छा, आकांक्षा, आशीर्वाद, कामना इत्यादि का पता चलता है, उन वाक्य को इच्छा वाचक वाक्य कहते हैं।
    • भगवान करे सब सकुशल वापस आ जायें। 

8. संकेतवाचक वाक्य

  • वे वाक्य जिनसे हमें एक क्रिया का दूसरी क्रिया पर निर्भर होने का बोध हो, ऐसे वाक्य संकेतवाचक वाक्य कहलाते हैं। जैसे- 
    • यदि वर्षा होती तो फसल होता 
    • नौकरी मिल जाती तो मेरा संकट खत्म हो जाता।