परिवहन एवं संचार (Transport and Communications )

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 परिवहन एवं संचार (transport and communication)

सामान्य परिचय (General Introduction) 

  • वस्तुओं या व्यक्तियों के एक स्थान से दूसरे स्थान पर आवागमन को ‘परिवहन’ कहते हैं, जबकि संदेश, विचार, दर्शन आदि के आदान-प्रदान को ‘संचार’ कहा जाता है। परिवहन तथा संचार के साधन किसी देश की जीवन रेखा कहे जाते हैं क्योंकि देश में व्यक्ति, वस्तु, तकनीकी आदि का प्रवाह इन्हीं पर निर्भर करता है। 
  • परिवहन तथा संचार किसी भी देश की आर्थिक संपन्नता एवं विकास के मापदंड होते हैं। परिवहन या संचार के अभाव के कारण ही आज भी अनेक अफ्रीकी देश आधुनिक विकास की दौड़ में पीछे छूट गए हैं। 
  • सड़कें और रेलमार्ग स्थलीय परिवहन के भाग हैं, जबकि जलमार्ग एवं वायुमार्ग परिवहन के अन्य दो प्रकार हैं। 
  • पाइपलाइनें पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और तरल अवस्था में अयस्कों जैसे पदार्थों का परिवहन करती है। 

परिवहन जाल : अनेक स्थान जिन्हें परस्पर मार्गों की श्रेणियों द्वारा जोड़ दिये जाने पर जिस प्रारूप का निर्माण होता है, उसे परिवहन  जाल कहते हैं।

 

स्थल परिवहन (Land Transport) 

 

सड़क परिवहन मार्ग (Road Transport Routes) 

  • किसी देश के आर्थिक एवं सामरिक विकास में सड़क परिवहन का विशेष महत्त्व होता है। छोटी दूरियों के लिये सड़क परिवहन रेल परिवहन की अपेक्षा आर्थिक दृष्टि से लाभदायक होता है। सड़कों द्वारा माल का परिवहन महत्त्वपूर्ण होता जा रहा है क्योंकि इसके द्वारा घर-घर तक वस्तुओं को पहुँचाया जा सकता है। 
  • विश्व में सर्वाधिक सड़कों की लंबाई संयुक्त राज्य अमेरिका में है। 
  • संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद भारत, चीन एवं ब्राज़ील का स्थान आता है। (कुछ अन्य स्रोतों में चीन को दूसरे स्थान पर बताया गया है।)

 

विश्व के प्रमुख महामार्गों का विवरण निम्नलिखित है

पैन अमेरिकन महामार्ग 

  • यह उत्तरी अमेरिका एवं दक्षिणी अमेरिका के प्रमुख देशों- कनाडा, अमेरिका, मेक्सिको, ग्वाटेमाला, अल सल्वाडोर, होंडुरास, निकारागुआ, कोस्टारिका, पनामा, कोलंबिया, इक्वाडोर, पेरू और चिली होकर अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स तक जाता है।
  • विश्व का सबसे लंबा महामार्ग (लगभग 48,000 किमी.)होने के कारण ही इसका नाम ‘गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज है। 

 

ऑस्ट्रेलिया महामार्ग-1 

  • यह ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के चारों तरफ किनारे-किनारे सभी राज्यों से होकर गुजरता है। 
  • यह विश्व के सबसे लंबे महामार्गों (लगभग 14,500 किमी.) की सूची में दूसरे स्थान पर आता है।

 ट्रांस-साइबेरियन महामार्ग

  • यह सेंट पीटर्सबर्ग (लेनिनग्राद) से व्लाडीवोस्टक तक जाता है। यह विश्व का तीसरा सबसे लंबा महामार्ग (लगभग 11,000 किमी.) है। 

 

ट्रांस-कनाडा महामार्ग 

  • यह कनाडा के पश्चिमी तट पर स्थित वैंकूवर के विक्टोरिया से लेकर अटलांटिक महासागर में स्थित न्यूफाउडलैंड के सेंट जोंस तक कनाडा के सभी 10 राज्यों से होकर गुजरता है।
  • यह विश्व का चौथा सबसे लंबा महामार्ग (लगभग 7,821 किमी.) है। 

 

स्वर्णिम चतुर्भुज महामार्ग 

  • भारत के दिल्ली, मुंबई, चेन्नई एवं कोलकाता के बीच इस मार्ग की लंबाई लगभग 5,846 किमी. है।

चीन राष्ट्रीय राजमार्ग-010 

  • टोंगजियांग (हेलोंगजियांग) से सान्या (हैनान) के बीच (5,700 किमी.)। 

 

यू.एस. मार्ग-20

  • बोस्टन (मैसाचुसेट्स) से न्यूपोर्ट (ओरेगन) के बीच (लगभग 5,415. किमी.)। 

 

रेल परिवहन मार्ग (Rail Transport Routes)

  • प्रथम रेलमार्ग का निर्माण सन् 1835 में इंग्लैंड में हुआ, वहीं पहली रेलगाड़ी मैनचेस्टर से लिवरपूल के लिये चलाई गई।

 

विश्व के सर्वप्रमुख रेलमार्ग निम्नलिखित हैं

ट्रांस-साइबेरियन रेलमार्ग 

  • यह विश्व का सबसे लंबा रेलमार्ग (लगभग 9,289 किमी.) है। 
  • यह रूस के सेंट पीटर्सबर्ग (लेनिनग्राद) को व्लाडीवोस्टक से जोड़ती है। 
  • प्रमुख स्टेशन मॉस्को, ओमस्क, नोवोसिबिक, इर्कुत्स्क व चीता हैं। 

 

कैनेडियन पैसिफिक रेलमार्ग 

  • यह रेलमार्ग कनाडा के पूर्वी छोर पर स्थित ‘मॉन्ट्रियल’ को पश्चिमी छोर पर स्थित ‘बैंकूवर’ शहर से जोड़ता है। 
  • इस रेलमार्ग की लंबाई लगभग 5,600 किमी. है। 
  • यह रेलमार्ग मॉन्ट्रियल, सडबरी, विनीपेग व रेजिना नगर होते हुए रॉकी पर्वत के किकिंग दर्रे से होकर वैंकूवर तक विस्तृत है। 

सेंट्रल पैसिफिक रेलमार्ग 

  • यह संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्वी तट पर स्थित ‘न्यूयॉर्क’ को पश्चिमी तट पर स्थित ‘सैन फ्रांसिस्को’ से जोड़ता है। 
  • यह यू.एस.ए. का सबसे लंबा रेलमार्ग है। 

केप -काहिरा रेलमार्ग 

  • यह दक्षिण अफ्रीका के ‘केपटाउन’ को मिस्र की राजधानी ‘काहिरा‘ से जोड़ता है। 
  •  यह अफ्रीका का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण रेलमार्ग है। 

ऑस्ट्रेलियाई ट्रांस-कॉन्टिनेंटल रेलमार्ग 

  • यह ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट पर अवस्थित ‘पर्थ’ को पूर्वी तट पर स्थित ‘सिडनी’ से जोड़ता है। 
  • यह कालगूर्ली, कूलगार्डी, एडिलेड होते हुए निर्मित किया गया है।
  • यह ऑस्ट्रेलिया का सर्वप्रमुख रेलमार्ग है। 

ट्रांस एंडियन रेलवे

  • यह रेलमार्ग अर्जेंटीना के ‘ब्यूनस आयर्स’ को चिली के ‘वालपैरेजो’ से जोड़ता है।

 

यूरोपीय पार महाद्वीपीय रेल 

  • यह पेरिस (फ्राँस) को वॉरसा (पोलैंड) से जोड़ती है। 

ओरिएंट एक्सप्रेस रेलमार्ग

  • यह पेरिस (फ्राँस) को इस्तांबुल (तुर्की) से जोड़ता है। 

 

जल परिवहन मार्ग (Water Transport Routes) 

समुद्री मार्ग

  • महासागर ऐसे प्राकृतिक संसाधन हैं जो सभी दिशाओं में आने-जाने का महामार्ग उपलब्ध कराते हैं, जिनमें से प्रमुख हैं

 

उत्तरी अटलांटिक समुद्री मार्ग 

  • यह मार्ग औद्योगिक दृष्टि से विकसित विश्व के दो प्रदेशों (उत्तरी-पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका और पश्चिमी यूरोप) को मिलाता है। 
  • विश्व का एक चौथाई विदेशी व्यापार इस मार्ग द्वारा परिवहित होता है इसलिये यह विश्व का सबसे व्यस्ततम समुद्री जलमार्ग है; दूसरे अर्थों में, इसे ‘वृहद् ट्रंक मार्ग’ भी कहा जाता है। 

 

भूमध्यसागर-हिंद महासागरीय समुद्री मार्ग

  •  यह समुद्री मार्ग प्राचीन विश्व के हृदय कहे जाने वाले क्षेत्रों से गुज़रता है। पोर्ट सईद, अंदन, मुंबई, कोच्चि, कोलंबो, सिंगापुर इस मार्ग के महत्त्वपूर्ण पत्तन हैं। 
  • यह विश्व का दूसरा सबसे व्यस्ततम समुद्री मार्ग है। 

 

पनामा नहर जलमार्ग 

  • यह प्रशांत महासागर को केरेबियन सागर से जोड़ती है।
  • इसके प्रशांत तटीय किनारे पर ‘पनामा सिटी‘ तथा कैरेबियन तट पर  ‘कोलोन पत्तन‘ अवस्थित है। 

 

स्वेज नहर जलमार्ग 

  • यह विश्व की सबसे बड़ी मानव निर्मित नहर है। इसका निर्माण कार्य फ्रांसीसी इंजीनियर ‘फर्डिनेंड  लेसेप्स‘ की देख-रेख में 1869 में पूर्ण हुआ। 
  • 17 नवंबर, 1869 में इसे परिवहन के लिये खोल दिया गया। 
  • यह भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ती है। 
  • भूमध्य सागर में स्वेज़ नहर के तट पर ‘पोर्ट सईद’ तथा स्वेज़ की खाड़ी में ‘पोर्ट स्वेज़’ बंदरगाह अवस्थित है। 
  •  ‘स्वेज़ नहर प्राधिकरण’ के अनुसार स्वेज़ नहर की प्रारंभिक लंबाई 164 किमी. (1869 में) थी जबकि वर्तमान बाईपास सहित इसकी कुल लंबाई 193 किमी. है। 
  •  इस नहर के समीप मैंजाला झील, टिम्सा झील, ग्रेट बिटर झील तथा लिटिल बिटर झील अवस्थित हैं (उत्तर से दक्षिण के क्रम में)। 

 

स्वेज नहर विस्तार परियोजना 

  • वर्ष 2015 में मिस्र के राष्ट्रपति द्वारा इस परियोजना का उद्घाटन किया गया। 
  • इसके अंतर्गत स्वेज नहर का कुल 72 किमी. का विस्तार किया जाएगा। 
  • इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य यातायात गतिविधियों को और सुगम बनाना है तथा जहाज़ों को दोनों दिशाओं में आवागमन की सुविधा प्रदान करना भी है। इस घोषणा के दौरान राष्ट्रपति ने इस परियोजना को ‘विश्व के लिये मिस्र का उपहार‘ बताया।

 

राइन नदी जलमार्ग 

  • राइन नदी फ्राँस-जर्मनी की सीमा और नीदरलैंड से होकर प्रवाहित होती है। 
  • इसकी सहायक रूर नदी पूर्व से आकर इसमें मिलती है। 
  • यह नदी एक संपन्न कोयला क्षेत्र से प्रवाहित होती है। 
  • संपूर्ण नदी बेसिन विनिर्माण क्षेत्र की दृष्टि से अत्यधिक संपन्न है। 
  • यह विश्व की सबसे व्यस्ततम आंतरिक व्यापार मार्ग वाली नदी जलमार्ग है। इस नदी को ‘कोयला नदी’ एवं ‘यूरोपीय व्यापार की जीवनरेखा’ भी कहा जाता है। 

 

कील नहर जलमार्ग 

  • यह उत्तरी सागर को बाल्टिक सागर से जोड़ती है।

 

लुडविग्स नहर 

  • यह दक्षिणी जर्मनी में अवस्थित है, जो राइन नदी को डेन्यूब नदी से जोड़ती है। 

 

सेंट लॉरेंस जलमार्ग 

  • यह ऑन्टेरियो झील को अटलांटिक महासागर के सेंट लॉरेंस की खाड़ी से जोड़ती है। 
  • इस नदी के द्वारा निर्मित द्वीप पर कनाडा का प्रसिद्ध शहर ‘मॉन्ट्रियल‘ स्थित है। 

 

वोल्गा नदी जलमार्ग 

  • यह विश्व की एक बड़ी जलप्रवाह प्रणाली है, जिसके अंतर्गत लगभग 11,200 किमी. नौगम्य जलमार्ग उपलब्ध है। 
  • इसका निकास कैस्पियन सागर में होता है। 
  • वोल्गा-मास्को नहर द्वारा मॉस्को क्षेत्र को इससे जोड़ा गया है तथा वोल्गा-डॉन नहर द्वारा काला सागर तक नौ-परिवहन संभव है।

 

विश्व के प्रमुख पत्तन 

  • विश्व में समुद्र पत्तन का निर्माण विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति हेतु महासागरीय तटों पर किया जाता है किंतु इनमें से कुछ प्राकृतिक पत्तन व कुछ मानव निर्मित होते हैं। उपयोग के आधार पर पत्तनों को निम्नलिखित वर्गों में विभाजित किया जाता है

पोर्ट ऑफ़ कॉल(port of call)

  • ऐसे पत्तन, जिनका उपयोग लंबे समुद्री यात्रा के दौरान जलयान को रोककर जलपान व ईंधन हेतु किया जाता है, जैसे- अदन, सिंगापुर, होनोलूलू , पत्तन आदि। 

आंत्रेपो पत्तन

  • ऐसे पत्तन का उपयोग किसी एक देश से लाए गए माल को गोदामों में संचयन के पश्चात् अन्य किसी देश में भेजने के लिये किया जाता है, जैसे- रॉटर्डम, सिंगापुर, कोपेनहेगन आदि। ।

 

पत्तन

दश

वैंकूवर

कनाडा 

काहिरा,अलेक्जेंड्रिया

मिस्र

न्यूओर्लियंस

यू.एस.ए

सेंटोस (कॉफी पोर्ट)

.ब्राजील

केपटाउन

दक्षिण अफ्रीका

कोपेनहेगन

डेनमार्क

लिस्बन

पुर्तगाल

फ्रेमेंटल

ऑस्ट्रेलिया

योकोहामा

जापान

मनीला

फिलीपींस

ऑकलैंड

न्यूज़ीलैंड

मरमास्क,सेंट पीटर्सबर्ग

रूस 

कोलंबो

श्रीलंका

 

वाणिज्यिक पत्तन (commercial port)

ऐसे पत्तनों का उपयोग मुख्यतः वस्तुओं के आयात-निर्यात हेतु किया जाता है। 

तेल पत्तन (oil port)

तेल पत्तन दो प्रकार के होते हैं

  1. टैंकर पत्तन(tanker port) 
  2. परिष्करणशाला पत्तन(refinery port)

 

टैंकर पत्तन(tanker port) 

  • टैंकर पत्तनों पर मुख्यतः तेल को भरने व खाली करने का कार्य किया जाता है, जैसे- त्रिपोली (लीबिया), मराकैबो (वेनेजुएला), कोलकाता व कोच्चि (भारत)।

 

परिष्करणशाला पत्तन(refinery port)

  • परिष्करणशाला पत्तन ऐसे पत्तन होते हैं, जहाँ लाए गए तेल को (परिष्कृत किया जाता है, जैसे- अबादान (फारस की खाड़ी), एबरडीन (स्काटलैंड) उत्तरी सागर में तेल की खोज के बाद इसका उपनाम ‘एनर्जी कैपिटल ऑफ़ यूरोप’ रखा गया।

 

नौ-सैनिक पत्तन (naval port)

  • इस प्रकार के पत्तन का उपयोग नौ-सैनिकों द्वारा जहाज़ों के रख-रखाव व अन्य कार्यों हेतु किया जाता है, जैसे-भारत में कोचीन तथा पाकिस्तान में ग्वादर पत्तन आदि। 

सवारी पत्तन (riding port)

  • ऐसे पत्तनों का उपयोग सामान्यतः लोगों के आवागमन को सुनिश्चित करने हेतु होता है, जैसे- मुंबई, लंदन, न्यूयॉर्क आदि। 

 

पाइपलाइन परिवहन (Pipeline Transport) 

  • यह खनिज तेल, प्राकृतिक गैस तथा जल के परिवहन का सबसे सस्ता एवं सगम साधन है। विश्व की कछ प्रमख पाइपलाइनों का वर्णन निम्नलिखित है

टैपलाइन (Tapline- Trans Arabian Pipeline) 

  • यह दक्षिण-पश्चिम एशिया में स्थित खनिज तेल उत्पादक देशों, जैसे- लेबनान, सीरिया, जॉर्डन, इराक, सऊदी अरब से भूमध्यसागर के तट पर स्थित तेल शोधनशालाओं एवं बंदरगाहों तक फैली हुई पाइपलाइनों का एक सघन जाल है। 
  • टैपलाइन की कुल लंबाई लगभग 1600 किमी. है। 
  • यह फारस की खाड़ी में स्थित तेल कुओं को ‘सिडान’ नामक नगर से जोड़ती है। 

 

बिग इंच पाइपलाइन (Big Inch Pipeline) 

  •  इसके द्वारा खनिज तेल को यू.एस.ए में मेक्सिको की खाड़ी के तटीय कुओं से उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों तक पहुँचाया जाता है। 

ESPO तेल पाइपलाइन

  • यह रूस व चीन की एक संयुक्त परियोजना है। 

नॉर्डस्ट्रीम गैस पाइपलाइन

  • यह बाल्टिक सागर होते हुए रूस तथा जर्मनी के बीच बिछाई गई है।

 

 भारत-नेपाल पाइपलाइन 

  • पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति के लिये इसे भारत में बिहार के  मोतिहारी से नेपाल के अमलेखगंज के बीच बिछाया जाएगा। 
  • इसकी लंबाई 81 किमी. होगी।

 

 तापी (TAPI) गैस पाइपलाइन 

  • इसे तुर्कमेनिस्तान के कैस्पियन सागर क्षेत्र में स्थित गालकिनिश गैस क्षेत्र (विश्व का दूसरा सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस क्षेत्र) से अफगानिस्तान के हेरात और कंधार, पाकिस्तान के क्वेटा और मुल्तान होते हुए भारत के पंजाब राज्य के फाजिल्का तक बिछाया जाएगा। 
  • इसकी कुल लंबाई लगभग 1,814 किमी. होगी। 
  • इसके निर्माण में आने वाले खर्च का वित्तीयन ‘एशियाई विकास बैंक’ (ADB) द्वारा किया जा रहा है। 
  • इस परियोजना का संचालन वर्ष 2019 से होने की संभावना है। 

 

वायु परिवहन (Air Transport) 

  • वायु परिवहन का विकास 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में हुआ था। दो विश्व युद्धों ने वायुयानों की डिज़ाइन, आकार तथा उड़ान तकनीकों में विकास के लिये प्रोत्साहित किया।
  • अधिक ऊँचाई पर उड़ने वाले वायुयान क्षोभमंडल के ऊपर समताप मंडल के निचले भाग में उड़ते हैं, जहाँ मौसम संबंधी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता है। वायुयान मार्गों का निर्धारण दो कारकों से होता है
  • प्रथमः इनके संचालन के लिये धरातल पर उपलब्ध सुविधाएँ जैसे- हवाई अड्डा, मौसम संबंधी सूचना सेवा, तकनीकी जाँच-पड़ताल, रख-रखाव इत्यादि। 
    • द्वितीयः पर्याप्त संख्या में यात्री एवं सामान की उपलब्धता। 
    • वायुयान सेवाएँ दो प्रकार की होती हैं

    • राष्ट्रीय सेवाएँ: ये सेवाएँ घरेलू सेवाएँ भी कही जाती हैं, जो देश के भीतर सेवा उपलब्ध कराती हैं। 
    • अंतर्राष्ट्रीय सेवाएँ: ये सेवाएँ एक देश से दूसरे देशों के मध्य संचालित होती हैं। 
  •  पर्थ-मुंबई-रोम-लंदन वायुमार्ग ऑस्ट्रेलिया के पर्थ एवं लंदन के बीच यात्रा हेतु लघुतम वायुमार्ग है। 
  • विश्व के कुल वायुमार्गों के 60 प्रतिशत भाग का प्रयोग अकेला संयुक्त राज्य अमेरिका करता है। 

 

संचार (Communication) 

  • एक स्थान से दूसरे स्थान तक संदेश या सूचना की पहुँच सुनिश्चित करने की व्यवस्था को ‘संचार’ कहते हैं। आरंभ में परिवहन के साधन ही संचार के साधन होते थे। डाक, तार, प्रिंटिंग प्रेस, दूरभाष तथा उपग्रहों की खोज ने संचार को आसान एवं तीव्र बना दिया है। 
  • मापदंड एवं गुणवत्ता के आधार पर संचार साधनों को निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है

 

संचार के साधन

वैयक्तिक

  • पत्र, दूरभाष (टेलीफोन), तार (टेलीग्राम), फैक्स,ई-मेल, इंटरनेट इत्यादि। 

सार्वजनिक

  • रेडियो, टेलीविज़न, सिनेमा, उपग्रह,  समाचार, पत्र-पत्रिकाएँ व पुस्तकें,  जन सभाएँ, गोष्ठियाँ, सम्मेलन आदि। 

 

वैयक्तिक संचार तंत्र (Personal Communication System) 

  • यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक संदेश अथवा सूचना पहुँचाने का कार्य करता है। उपर्युक्त सभी वैयक्तिक संचार तंत्रों में इंटरनेट सर्वाधिक प्रभावी एवं आधुनिक तकनीक है। 
  • यह उपयोगकर्ता को ई-मेल के माध्यम से ज्ञान एवं सूचना की दुनिया में सीधे पहुँच बनाने में सहायक होता है। 

 

सार्वजनिक संचार तंत्र (Mass Communication System)

  • इससे जनसाधारण तक संदेश तथा सूचना पहुँचाई जाती है। 
  • इसके लिये मुद्रण माध्यम (अखबार, पत्र-पत्रिकाएँ), इलेक्ट्रॉनिक माध्यम (रेडियो, टेलीविज़न) इत्यादि का उपयोग किया जाता है। 

 

रेडियो (Radio) 

  • विश्व में सर्वप्रथम 1895 में मार्कोनी द्वारा एक अस्थायी स्टेशन से रेडियो प्रसारण किया गया था। ।
  • भारत में रेडियो का प्रसारण 1920 के दशक में आरंभ हुआ। 
  • पहले कार्यक्रम का प्रसारण वर्ष 1923 में ‘रेडियो क्लब ऑफ बॉम्बे’ द्वारा प्रारंभ किया गया था। तब से इसने असीमित लोकप्रियता पाई है और लोगों के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन में परिवर्तन भी किया है। 
  • 23 जुलाई, 1927 को लॉर्ड इरविन द्वारा ‘इंडियन ब्रॉडकास्ट कंपनी’ (बॉम्बे) का उद्घाटन किया गया। 
  • सरकार द्वारा अधिग्रहण के पश्चात् अप्रैल 1930 से उद्योग और श्रम मंत्रालय के अंतर्गत ‘इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सर्विस‘ नाम से सेवाएँ जारी रखी गईं। 
  • 10 सितंबर, 1935 को मैसूर में निजी क्षेत्र का रेडियो स्टेशन ‘आकाशवाणी मैसूर’ स्थापित किया गया। 
  • 19 जनवरी, 1936 को पहला समाचार बुलेटिन ‘इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सर्विस‘ द्वारा प्रसारित हुआ। 
  • 8 जून, 1936 को इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सर्विस को ‘ऑल इंडिया रेडियो‘ नाम दिया गया।
  • 3 अक्तूबर, 1957 को विविध भारती द्वारा प्रसारण सेवाएँ शुरू की गईं। 
  • ऑल इंडिया रेडियो, सूचना, शिक्षा एवं मनोरंजन से जुड़े विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम प्रसारित करता है। 

 

टेलीविज़न (TV)

सचना के प्रसार एवं आम लोगों को शिक्षित करने में टेलीविज़न प्रसारण एक अत्यधिक प्रभावी दृश्य-श्रव्य माध्यम के रूप में उभरा है।

  • भारत में पहले टेलीविजन स्टेशन की शुरुआत 1 नवंबर, 1959 को ऑल इंडिया रेडियो के एक भाग के रूप में हुई। 
  • 1976 में दूरदर्शन, जो ऑल इंडिया रेडियो का एक अंग था, को अलग कर एक नया विभाग बना दिया गया। 

 

उपग्रह संचार (Satellite Communication)

  • उपग्रह संचार स्वयं में एक विधा है और ये अन्य साधनों का भी नियमन करता है। उपग्रह के माध्यम से दूरसंचार और टेलीविज़न के कार्यक्रमों के प्रसारण में सहायता मिलती है। उपग्रह के उपयोग से एक विस्तृत क्षेत्र का सतत् एवं सामरिक दृश्य प्राप्त होने के कारण उपग्रह संचार सामाजिक, आर्थिक एवं सामरिक कारणों से महत्त्वपूर्ण हो गया है। उपग्रह से प्राप्त चित्रों का मौसम के पूर्वानुमान, प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी, सीमा क्षेत्रों की चौकसी आदि के लिये उपयोग किया जा रहा है। 

 

साइबर स्पेस-इंटरनेट (Cyberspace-Internet)

  • साइबर स्पेस विद्युत द्वारा कंप्यूटरीकृत संसार है। यह वर्ल्ड वाइड वेबसाइट जैसे इंटरनेट द्वारा आवृत्त है। सरल शब्दों में, यह भेजने वाले और प्राप्त करने वाले के शारीरिक संचलन के बिना कंप्यूटर सूचनाओं के प्रेषण और प्राप्ति की विद्युतीय अंकीय दुनिया है।