संसदीय समितियां parliamentary committees : SARKARI LIBRARY

संसदीय समितियां (parliamentary committees)

  • एक संसदीय समिति वह समिति है: 
  • 1. जो सदन द्वारा नियुक्त या निर्वाचित होती है या जिसे लोकसभा अध्यक्ष/सभापति नामित करते हैं। 
  • 2. जो लोकसभा अध्यक्ष/सभापति के निर्देशानुसार कार्य करती है। 
  • 3. जो अपनी रिपोर्ट सदन को या लोकसभा अध्यक्ष/सभापति को सौंपती है।
  • 4. जिसका एक सचिवालय होता है, जिसकी व्यवस्था लोकसभा/राज्यसभा सचिवालय करता है। 
  • परामर्शदात्री समिति भी संसद सदस्यों से ही गठित होती है लेकिन यह संसदीय समिति नहीं होती क्योंकि यह उपरोक्त चार शर्तों को पूरा नहीं करती।

वर्गीकरण 

  • संसदीय समितियाँ दो प्रकार की होती हैं
    • स्थायी समितियाँ (standing committees) 
    • तदर्थ समितियाँ (Ad hoc committees) 

स्थायी समितियाँ 

  • स्थायी प्रकृति की होती हैं जो निरंतरता के आधार पर कार्य करती हैं, जिनका गठन प्रत्येक वर्ष अथवा समय-समय पर किया जाता है। 

तदर्थ समितियों 

  • अस्थायी प्रकृति  होती है तथा जिस प्रयोजन से उनका गठन किया जाता है वह समाप्त होते ही इनका कार्यकाल भी समाप्त हो जाता है, ये अस्तित्व में नहीं रह जातीं। 

कार्य की प्रकृति के आधार पर स्थायी समितियों का  छह भागो में वर्गीकरण किया जा सकता है:

1. वित्त समितियाँ (Finance Committees)

  • लोक लेखा समिति(public accounts committee)  
  • प्राक्कलन समिति(Estimates Committee) 
  • सार्वजनिक उद्यमों के लिए गठित समिति (सार्वजनिक उद्यम समिति)(Committee constituted for Public Enterprises (Committee of Public Enterprises))

2. विभागीय स्थायी समितियाँ (Departmental Standing Committees)

3. जाँच समितियाँ(Inquiry Committees) 

  • (याचिका/आवेदन समिति)(Petitions Committee) 
  • विशेषाधिकार समिति (privilege committee)
  • आचार समिति(ethics Committee)

4. परीक्षण एवं नियंत्रण के लिए गठित समितियाँ (Committees for Scrutinise and control)

  • सरकारी आश्वासन समिति (government assurance committee)
  • अधीनस्थ विधायन समिति (Subordinate Legislative Committee)
  • विचारार्थ प्रस्तुत विषयों के लिए गठित समिति (Committee for the subjects presented for consideration)
  • अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति(SC and ST Welfare Committee) 
  • स्त्री सशक्तीकरण समिति(women empowerment committee0 
  • लाभ के पदों के लिए गठित संयुक्त समिति(Joint Committee constituted for Offices of Profit)

5.सदन के दैनन्दिन कार्यों से सम्बन्धित समितियाँ(Committees related to day-to-day affairs of the House) 

  • (क) कार्य सलाहकार समिति (Business Advisory Committee)
  • (ख) सदस्यों के निजी विधेयकों एवं संकल्पों के लिए गठित समिति 
  • (ग) विनियम समिति (Rules/regulation Committee)
  • (घ) सदन की बैठकों से सदस्यों की अनुपस्थिति केलिए गठित समिति 

6.सदन समितियाँ अथवा सेवा समितियाँ (सदस्यों को सुविधाएँ अथवा सेवाएं प्रदान करने वाले प्रावधानों से सम्बन्धित): 

  • (क) सामान्य प्रयोजन समिति (General Purposes Committee)
  • (ख) सदन समिति (House Committee)
  • (ग) पुस्तकालय समिति
  • (घ) सदस्यों के वेतन-भत्तों के लिए संयुक्त समिति 

तदर्थ समितियों (Ad hoc committees)

तदर्थ समितियों को दो वर्गों में विभाजित कर सकते हैं

  • जाँच समितियाँ (inquiry committees)
  • सलाहकार समितियाँ। (Advisory Committees.)

जाँच समितियाँ (inquiry committees)

  • जाँच समितियों का गठन किसी भी समय पर किया जाता है। 
  • इसके लिए दोनों सदनों में से किसी के भी सदन द्वारा जाँच समितियों का गठन का एक प्रस्ताव लाया जाता है। 
  • इनका गठन किसी विषय की जाँच करने के के लिए लोकसभा अध्यक्ष/सभापति द्वारा किया जाता है। 

सलाहकार समितियाँ। (Advisory Committees.)

  • सलाहकार समितियों के तहत विधेयकों के लिए गठित प्रवर तथा संयुक्त समितियाँ सम्मिलित होती हैं, जिनका गठन किसी विशेष विधेयक के बारे में विचार करने के लिए किया जाता है। 
  • ये समितिया तदर्थ समितियों से इस अर्थ में भिन्न होती हैं कि ये  विधेयकों से ही सम्बन्धित होती हैं 
  • जब किसी सदन में कोई विधेयक सामान्य चर्चा के लिए लाया जाता है, तब सदन चाहे तो उसे सदन की प्रवर समिति को अथवा दोनों सदनों की संयुक्त समिति को भेज कर सकता है।
  • प्रवर समिति या संसदीय समिति ,विधेयक पर उसी प्रकार विचार करती है जैसे कि दोनों सदन किसी विधेयक पर विचार करते हैं। समिति के सदस्य विभिन्न प्रावधानों पर संशोधन भी प्रस्तावित कर सकते हैं। 
  • विधेयक पर इस प्रकार विचार करने के पश्चात् समिति अपना प्रतिवेदन सदन को सौंप देती है। 

लोक लेखा समिति

public accounts committee

  • इस समिति का गठन भारत सरकार अधिनियम 1919 के अंतर्गत पहली बार 1921 में हुआ और तब से यह अस्तित्व में है। 
  • वर्तमान में इसमें 22 सदस्य हैं 

लोकसभा से – 15 सदस्य

राज्य सभा से – 7 सदस्य 

  • इसके सदस्यों का चुनाव समानुपातिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत के अनुसार एकल हस्तांतरणीय मत के माध्यम किया जाता है। 
  • सदस्यों का कार्यकाल एक वर्ष का होता है। 
  • समिति में किसी मंत्री का निर्वाचन नहीं हो सकता। 
  • समिति के अध्यक्ष की नियुक्तिलोकसभा अध्यक्ष द्वारालोकसभा सदस्यों में से की जाती है 
  • 1967 से एक परम्परा चली आ रही है कि समिति का अध्यक्ष विपक्षी दल से ही चुना जाता है।

समिति के कार्य 

  • नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के वार्षिक प्रतिवेदनों की जाँच करना है। 

प्राक्कलन समिति (Estimates Committee)

  • इस समिति का उद्भव 1921 में स्थापित स्थाई वित्तीय समिति में देखा जा सकता हैं। 
  • स्वतंत्रता के बाद  पहली बार जॉन मथाई(वित्त मंत्री) की सिफारिश पर 1950 में पहली प्राक्कलन समिति का गठन किया गया। 
  • मूलतः इसमें 25 सदस्य थे लेकिन इसकी सदस्य संख्या 1956  में बढ़ा दी गयी  
  •  वर्तमान में इसमें 30 सदस्य है सभी 30 सदस्य लोकसभा से होते हैं। इस समिति में राज्य सभा का कोई प्रतिनिधित्व नहीं होता। 
  • इसके सदस्यों का चुनाव प्रतिवर्ष लोकसभा द्वारा इसके सदस्यों में से किया जाता है और इसमें समानुपातिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत का पालन एकल हस्तांतरणीय मत के माध्यम से किया जाता है। 
  • समिति का कार्यकाल एक वर्ष होता है। 
  • कोई मंत्री समिति का सदस्य नहीं हो सकता। 
  • समिति का अध्यक्ष लोकसभा अध्यक्ष द्वारा लोकसभा सदस्यों में से ही नियुक्त होता है 

समिति का कार्य 

  • बजट में सम्मिलित प्राक्कलनों की जाँच करना तथा सार्वजनिक व्यय में किफायत के लिए सुझाव देना है। 
  • इसलिए इसे ‘सतत् किफायत समिति/Continuing economy Committee” के रूप में वर्णित किया जा सकता है। 

सार्वजनिक उद्यम समिति (Public Undertaking committee)

  • यह समिति 1964 में कृष्ण मेनन समिति की सिफारिश पर पहली बार गठित हुई थी। 
  • शुरुआत में इसमें 15 सदस्य थे (10 लोकसभा तथा 5 राज्य सभा से)। 
  • 1974 में इसकी सदस्यता संख्या बढ़ाकर 22 कर दी गई (15 लोकसभा और 7 राज्यसभा से)। 
  • समिति के सदस्य संसद द्वारा इसके सदस्यों में से एकल हस्तांतरणीय मत के माध्यम से समानुपातिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत के आधार पर निर्वाचित होते हैं। 
  • कार्यकाल एक वर्ष का होता है। 
  • कोई मंत्री समिति का सदस्य नहीं बन सकता। 
  • लोकसभा अध्यक्ष लोकसभा सदस्यों में से किसी एक को समिति का अध्यक्ष नियुक्त करते हैं। 
  • इस प्रकार राज्य सभा सदस्य इस समिति के अध्यक्ष नहीं बन सकते।

समिति के कार्य  

  • 1. सार्वजनिक उद्यमों के प्रतिवेदनों एवं लेखा की जाँच करना। 
  • 2 सार्वजनिक उद्यमों पर सी.ए.जी. के प्रतिवेदन की जाँच करना। 

समिति की सीमाएँ हैं:

  • यह एक वर्ष के अंदरदस से बारह से अधिक सार्वजनिक उद्यमों की जाँच के मामले नहीं ले सकती। 
  • इसकी अनुशंसाएँ परामर्श के लिए होती हैं, मंत्रालयों के लिए बाध्यकारी नहीं।

विभागीय स्थाई समितियाँ  (Departmental Standing Committees)

  • लोकसभा की नियम समिति की अनुशंसाओं पर संसद में 1993 में 17 विभाग-सम्बन्धी स्थाई समितियाँ गठित की गईं। 
  • 2004 में ऐसी 7 और समितियों का गठन हुआ। 
  • इस प्रकार वर्तमान में इन समितियों की संख्या बढ़कर 24 हो गई।
  • स्थाई समितियों का मुख्य उद्देश्य संसद के प्रति कार्यपालिका (मंत्रिपरिषद को) को अधिक उत्तरदायी बनाना है, विशेषकर वित्तीय दायित्व को। 
  • इन 24 स्थाई समितियों के कार्यक्षेत्र में केन्द्र सरकार के सभी मंत्रालय और विभाग आते हैं। 
  • प्रत्येक स्थाई समिति में 31 सदस्य (21 लोकसभा तथा 10 राज्य सभा से) होते हैं। 
  • लोकसभा के सदस्यों का चुनाव लोकसभा अध्यक्ष सदस्यों में से करते हैं जबकि राज्य सभा के सदस्यसभापति द्वारा चुने जाते हैं।
  • किसी भी स्थाई समिति में कोई मंत्री सदस्य नहीं बन सकता। 
  • गठन के समय से लेकर समिति का कार्यकाल एक वर्ष का होता है।
  • 24 स्थायी समितियों में 8 समितियाँ राज्य सभा तथा 16 समितियाँ लोकसभा के अंतर्गत कार्य करती हैं।’

स्थाई समिति के कार्य  

  • सम्बन्धित मंत्रालय/विभाग के अनुदान मांगों पर लोकसभा में चर्चा एवं मतदान के पूर्व सम्यक् विचार। 
  • सम्बन्धित मंत्रालय/विभाग के विधेयकों की जाँच-परख करना। 
  • सम्बन्धित मंत्रालय/विभाग के वार्षिक प्रतिवेदन पर विचार करना।

जाँच समितियाँ (inquiry committees)

याचिका/आवेदन समिति (petition committee)

  • यह समिति विधेयकों पर आम सार्वजनिक महत्व के मामलों पर दायर याचिकाओं एवं आवेदनों पर विचार करती है। यह संघ (Union) से सम्बन्धित मामलों पर व्यक्तियों एवं संघों/संगठनों आवेदनों पर भी विचार करती है। 
  • लोकसभा समिति में 15 सदस्य जबकि राज्यसभा समिति में 10 सदस्य होते हैं। 

विशेषाधिकार समिति

  • इस समिति का कार्यअर्द्ध-न्यायिक प्रकृतिका होता है। 
  • यह सदनऔर इसके सदस्यों के विशेषाधिकार हनन सम्बन्धी मामलों की जाँच करती है तथा उपयुक्त कार्यवाही की अनुशंसा करती है। 
  • लोकसभा समिति में 15 सदस्य जबकि राज्यसभा समिति में 10 सदस्य होते हैं। 

आचार समिति 

  • राज्य सभा में इस समिति का गठन 1997 तथा लोकसभा में सन् 2000 में हुआ था। 
  • यह समिति संसद सदस्यों के लिए आचार संहिता लागू करवाती है। 
  • यह दुराचरण के मामलों की जाँच करती है तथा समुचित कार्यवाही की सिफारिश करती है।

जांच एवं नियंत्रण के लिए समितियाँ 

सरकारी आश्वासन समिति

  • सरकारी आश्वासन समिति यह समिति मंत्रियों द्वारा सदन में समय-समय पर दिए गए आश्वासनों, वचनों एवं प्रतिज्ञाओं की जाँच करती है और किस सीमा तक उनका कार्यान्वयन हुआ है, इस पर प्रतिवेदन देती है। 

अधीनस्थ विधायन समिति(Subordinate Legislative Committee)

  • विनियम, नियम, उपनियम तथा नियमावली बनाने के लिए संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग हो रहा है या नहीं, यह समिति इस पर विचार करती है और प्रतिवेदन देती है। 
  • दोनों सदनों में समिति की सदस्य संख्या 15 होती है। 
  • इसका गठन 1953 में किया गया था।

सदन के पटल पुरः स्थापित दस्तावेजों की समिति 

  • यह समिति 1975 में गठित की गई थी। 
  • लोकसभा समिति में 15  सदस्य होते हैं जबकि राज्य सभा समिति में 10 सदस्य। 

अनु. जाति तथा अनु. जनजाति कल्याण समिति 

  • इस समिति के 30 सदस्य होते हैं-20 लोकसभा तथा 10 राज्य सभा से। 
  • इसके कार्य हैं
    • अनु.जाति राष्ट्रीय आयोग तथा अनु. जनजाति राष्ट्रीय आयोग के प्रतिवेदनों पर विचार करना

महिला सशक्तीकरण समिति

  •  यह समिति 1997 में गठित हुई थी और इसमें 30 सदस्य होते हैं-20 लोकसभा तथा 10 राज्यसभा से। 
  • यह राष्ट्रीय महिला आयोग के प्रतिवेदन पर विचार करती है तथा केन्द्र सरकार द्वारा महिलाओं की स्थिति, गरिमा तथा सभी क्षेत्रों में समानता के लिए क्या कदम उठाए गए हैं, इसकी जाँच करती हैं। 

लाभ के पदों पर संयुक्त समिति 

  • यह समिति विभिन्न समितियों तथा निकायों के गठन तथा चरित्र की जाँच करती है जिनका गठन केन्द्र, राज्य, केन्द्रशासित प्रदेशों की सरकारों द्वारा की गई है और जो लोग इनमें पदधारक हैं उनके बारे में अनुशंसा करती है कि उन्हें संसद सदस्य के रूप में निर्वाचन के लिए अयोग्य ठहराया जाए अथवा नहीं। 
  • इस समिति में 15 सदस्य होते हैं (10 लोकसभा तथा 5 राज्यसभा से)।

सदन के दैनंदिन के कामकाज से संबंधित समितियाँ

Committees dealing with the day-to-day business of the House

कार्य सलाहकार समिति 

  • यह समिति सदन के कार्यक्रम तथा समय सारिणी को नियमित रखती है। यह सदन के समक्ष सरकार द्वारा लाए गए विधायी तथा अन्य कार्यों पर चर्चा के लिए समय निर्धारित करती है। 
  • लोकसभा समिति के 15 सदस्य होते हैं तथा लोकसभा अध्यक्ष इसके अध्यक्ष होते हैं। 
  • राज्य सभा समिति में 10 सदस्य होते हैं तथा सभापति इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं।

 निजी सदस्यों के विधेयक तथा संकल्पों के लिए समिति 

  • यह विधेयकों का वर्गीकरण करती है तथा निजी/वैयक्तिक सदस्यों (मंत्रियों के अलावा) द्वारा प्रस्तुत विधेयकों और संकल्पों पर चर्चा के लिए समय निर्धारित करती है। 
  • यह लोकसभा की विशेष समिति है और इसमें 15 सदस्य होते हैं। इसके अध्यक्ष उप-लोकसभाध्यक्ष होते हैं। 
  • राज्य सभा में ऐसी कोई समिति नहीं होती। 

नियम समिति

  • लोकसभा नियम समिति में 15 सदस्य होते हैं तथा लोकसभाध्यक्ष इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं। 
  • राज्यसभा नियम समिति में 16 सदस्य होते हैं और सभापति इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं। 

सदस्यों की अनुपस्थिति सम्बन्धी समिति 

  • यह समिति सदन की सदस्यों के मामलों की जाँच करती है जो बिना अनुमति 60 या अधिक दिन तक सदन से अनुपस्थित रहे हों। 
  • यह समिति लोकसभा की एक विशेष समिति होती है जिसके 15 सदस्य होते हैं। 
  • राज्य सभा में ऐसी कोई समिति नहीं होती तथा ऐसे मामलों को स्वयं सदन ही देखता है। 

गृह-व्यवस्था समितियाँ  (housekeeping committees)

सामान्य प्रयोजन समिति (general purpose committee)

  • यह समिति सदन से सम्बन्धित ऐसे मामलों को देखती है जो अन्य संसदीय समितियों के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। 
  • प्रत्येक सदन में समिति में अधिष्ठाता अधिकारी (लोकसभाध्यक्ष/सभापति) इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं। 

आवास समिति 

  • लोकसभा में इस समिति के 12 सदस्य होते हैं। 

पुस्तकालय समिति 

  • यह समिति संसद के पुस्तकालय से सम्बन्धित मामलों को देखती है तथा सदस्यों को पुस्तकालय सेवा का लाभ उठाने में सहायता करती है। 
  • इस समिति में 9 सदस्य (6 लोकसभा तथा 3 राज्य सभा से) होते हैं।

सदस्यों के वेतन-भत्ते से सम्बन्धित संयुक्त समिति 

  • संसद सदस्यों का वेतन, भत्ता तथा पेंशन अधिनियम 1954 के अंतर्गत इस समिति का गठन हुआ। 
  • इसके 15 सदस्य (10 लोकसभा तथा 5 राज्य सभा) होते हैं। 
  • यह सदस्यों के वेतन, भत्ते तथा पेंशन नियमित करने के सम्बन्ध में नियमावली बनाती है। 

सलाहकार समितियाँ  (Advisory committees)

  • सलाहकार समितियाँ केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों से जुड़ी रहती हैं। 
  • इनमें दोनों सदनों के सदस्यों होते है। 
  • एक मंत्रालय की सलाहकार समिति का अध्यक्ष उस मंत्रालय का मंत्री अथवा प्रभारी राज्य-मंत्री होता है। 
  • ये समितियाँ संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा गठित की जाती हैं। 
  • इन समितियों की सदस्यता स्वैच्छिक होती है और इसे संसद सदस्यों तथा नेताओं की रुचि पर छोड़ दिया जाता है। 
  • समिति की अधिकतम सदस्य संख्या 30 होती है तथा न्यूनतम 10 होती है
  • इन समितियों का गठन सामान्यतः लोकसभा चुनाव के बाद नई लोकसभा के गठन के उपरांत होता है। 
  • ये समितियों लोकसभा भंग होने के साथ ही स्वतः भंग हो जाती है और पुनः नई लोकसभा के गठन के पश्चात् इनका भी गठन किया जाता है।