Nuclear Physics and Radioactivity

 रेडियोसक्रियता या रेडियोऐक्टिवता (Radioactivity) 

  • radioactivity एक  atom के unstable heavy nucleus के विघटन(disintegration)  की घटना है जिसमें एक या एक से अधिक radiation जैसे Alpha particles beta particles or gamma rays का उत्सर्जन होता है
  • वे पदार्थ जो radiation उत्सर्जित करते हैं ,  radioactive element कहलाते हैं और radioactive elements द्वारा radiation के उत्सर्जन की घटना को Radioactivity के रूप में जाना जाता है
  • रेडियोऐक्टिवता की खोज ए.एच. बैकेरल ने 1896 में की थी। 
  • यह विकिरण(radiation) तीन घटकों से मिलकरबने होते हैं
    • alpha(α) rays 
    • beta (β) rays 
    • gamma  (ϒ)rays 

Properties of Alpha rays 

  • These are positively charged particles. These particles have been identified as helium nuclei, i.e., doubly ionised helium atoms.
  • They are deflected by electric and magnetic fields. The directions of deflection indicate that -particles are positively charged particles. 
  • Their velocity is of the order of 110 th of the velocity of light. 
  • They excite fluorescence in substances like zinc sulphide and barium platinocyanide. 
  • They can affect a photographic plate. 
  • They ionise heavily the gases through which they pass. 
  • They are easily absorbed by matter. They are stopped by an aluminium foil of thickness 0.1 cm or by an ordinary sheet of paper. 
  • They are scattered while passing through thin metal sheets. 
  • They can cause artificial disintegration of an atom. 
  • They produce heating effect when stopped and cause fatal burns on human body. 
  • The range of alpha particles in air, i.e, the distance travelled by alpha particles through air at S.T.P. before they lose their ionising power, varies from 2.70 cm (for uranium source) to 8.62 cm (for thorium source).

 

Properties of B-rays : 

  • 1. They consist of fast moving electrons of nuclear origin
  • 2. They are deflected by electric and magnetic fields. The direction of deflection indicates that B-rays are negatively charged particles. 
  • 3. They are emitted with a range of velocities. The maximum velocity depends on the nature of the radioactive source and may be as high as 99% of the speed of light.. 
  • 4. They excite fluorescence in barium platinocyanide, calcium tungstate, etc. 
  • 5. They effect a photographic plate more strongly than alpha particles. 
  • 6. They can ionise a gas but their ionising power is 1/100 times that of alpha-rays. 
  • 7. The penetrating power of B-particles is 100 times that of alpha-particles. They are absorbed by aluminium foil of 5 mm thickness. 
  • 8. The range of B-particles in air is much more than that of alpha-particles. 
  • 9. Due to their small masses, B-particles are easily scattered by atomic nuclei when passed through matter. 
  • 10. The emission of a B-particle is always accompanied by the emission of an elementary particle called neutrino.

 

Properties of y -rays : 

  • 1. They are electromagnetic waves which have wave length even less than that of X-rays. 
  • 2. They are not deflected by electric and magnetic fields, indicating that y particles (photons) do not carry any charge. 
  • 3. They travel with the speed of light 
  • 4. They excite fluorescence in certain substances.
  • 5. They affect a photographic plate even more strongly than B-rays. 
  • 6. They ionise gases very slightly. Their ionising Power 1/10,000 times that of alpha-rays.
  • 7. Their penetrating power is about 10,000 times that of alpha-rays. They can penetrate a 30 cm thick iron block 8. Like X-rays, they are diffracted by crystals. 
  • 9. They eject B-particles from substances on which they fall. 
  • 10. They show the phenomenon of pair production. When a gamma-ray photon passes close to a nucleus, it gets transformed into an elementary particle and its antiparticle.

Radioactivity2 Radioactivity1

  • when a radioactive nucleus emits an Alpha particle its atomic number decreases by 2 and mass number decreases by 4.
  • when a radioactive nucleus emits a beta particle its atomic number  increases by 1 but mass number remains the same
  • he emission of a Gamma particle does not change the mass number of the atomic number of the radioactive nucleus
  • कोई भी परमाणु एक साथ अल्फा और बीटा दोनों कणों का उत्सर्जन नहीं कर सकता

 

रेडियोऐक्टिव क्षयता का नियम (Law of Radioactive Decay) 

  • the radioactive atoms are unstable and their decay spontaneously to emit Alpha or beta particles along with gamma rays.

       Law of Radioactive Decay

  • the number of nuclei disintegrating per second of a Radioactive element at any instant is directly proportional to the number of undecayed nuclei present in the element at that instant.
  • according to Radioactive law, the rate of decay at any instant is proportional to the number of undecayed nuclei
  • रेडियोसक्रियता का SI मात्रक बैकेरल (प्रतीक Bq) है। 

1 बैकेरल (Becquerel) = 1 decay प्रति सेकंड

  • रेडियोसक्रियता का एक अन्य मात्रक क्यूरी (प्रतीक Ci) भी सामान्य प्रचलन में है।

     1 क्यूरी = 1 Ci= 3.7x 1010 decay प्रति सेकंड = 3.7 x 1010 Bq

  • रेडियोसक्रियता का एक अन्य मात्रक rutherford (प्रतीक rd) भी सामान्य प्रचलन में है।

   1 rutherford  =  106 decay प्रति सेकंड = 106 Bq

1 Ci= 3.7x 104 rd

 

अर्द्ध आयु(Half life)

  • किसी रेडियो सक्रिय नाभिक की अर्द्ध आयु (T1/2) वह समय है, जिसमें इसकी संख्या, प्रारंभिक संख्या की आधी रह जाती है। 
  • यदि प्रारंभिक संख्या N है तो रेडियोऐक्टिव क्षय के बाद N/2 संख्या बचने में लगा समय उस रेडियो नाभिक की अर्द्ध आयु होगी।
  • क्योंकि रेडियो क्षयता दर अक्षयित नाभिकों की संख्या से सीधे संबंधित है, अतः यदि संख्या N, T1/2 समय में आधी हो जाती है तो सक्रियता भी इसी समय में आधी रह जाएगी।

 

प्रस्फुरण गणक (Scintillation Counter) 

  • रेडियोएक्टिव विकिरण का पता लगाने में प्रयोग किया जाता है। 
  • पेयजल में गामा उत्सर्जक समस्थानिक की उपस्थिति का पता प्रस्फुरण गणक से लगाया जाता है।

 

द्रव्यमान क्षति (Mass Defect)

  • Nucleus का mass इसमें विद्यमान न्यूट्रॉनों एवं प्रोटॉनों के total mass के बराबर होना चाहिये, परंतु Nucleus का mass सदैव न्यूट्रॉनों एवं प्रोटॉनों के total mass  से कम पाया जाता है।
  • नाभिक के द्रव्यमान एवं इसके घटकों के द्रव्यमान के अंतर को ‘द्रव्यमान क्षति’ कहते हैं। 
  • नाभिक बनने की प्रक्रिया में हुई द्रव्यमान क्षति वास्तव में द्रव्यमान के ऊर्जा में परिवर्तित होने के कारण होती है। 
  • इसे आइंस्टीन के द्रव्य ऊर्जा समीकरण (E = mc2) से निरूपित करते हैं। यह वही ऊर्जा है एवं इसे ‘नाभिक की बंधन ऊर्जा’ भी कहा जाता है। 

 

नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy)

  • If a nucleus with a lower binding energy is transformed into a nucleus with a higher binding energy, some of the energy is released. This released energy is called ‘nuclear energy’.
  • नाभिकीय प्रक्रिया में विमुक्त ऊर्जा ऊष्माक्षेपी रासायनिक अभिक्रियाओं (exothermic chemical reactions) से विमुक्त ऊर्जा की अपेक्षा बहुत अधिक (लाखों गुना अधिक) होती है। 
  • उदाहरण के लिये 1 कि.ग्रा. यूरेनियम के विखंडन से लगभग 1014 J ऊर्जा प्राप्त होती है, जबकि 1 कि.ग्रा. कोयले के दहन से 107 Jऊर्जा ही प्राप्त होती है। 
  • साइक्लोट्रॉन(Cyclotron)  एक ऐसा त्वरक उपकरण है जिसके द्वारा प्रोटॉन,-कण तथा ड्यूट्रॉन आदि आवेशित कणों में उच्च वेग उत्पन्न किया जाता है। 
  • अंतर्राष्ट्रीय संगठन ‘वर्ल्ड न्यूक्लियर एसोसिएशन‘(london) के अनुसार प्रकृति में थोरियम का भंडार परंपरागत परमाणु ईंधन यूरेनियम के मुकाबले तीन गुना ज्यादा है। प्रति इकाई थोरियम, यूरेनियम से 250 गुना ज़्यादा ऊर्जा उत्पन्न करता है। यह माना जाता है कि पृथ्वी पर थोरियम में निहित ऊर्जा भंडार पेट्रोलियम, कोयला और अन्य जीवाश्म ईंधन तथा यूरेनियम को एक साथ मिलाने से भी ज्यादा है। थोरियम रिएक्टर से निकलने वाला कचरा बाकी प्रकार के रिएक्टरों के परमाणु कचरे की अपेक्षा कहीं कम रेडियोधर्मी होता है। 
  • सभी रेडियोएक्टिव पदार्थों का परमाणु ईंधन के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। यूरेनियम, थोरियम, प्लूटोनियम, रेडियम, बेरीलियम, मोनेजाइट इत्यादि रेडियोएक्टिव पदार्थों का परमाणु ईंधन के रूप में प्रयोग होता है। 
  • प्रायः ऐसे तत्त्व जिनका परमाणु क्रमांक 80 से अधिक होता है, रेडियोसक्रियता प्रदर्शित करते हैं। एस्टेटाइन, फ्रेंसियम, ट्रिटियम रेडियोएक्टिव तत्त्व हैं।

 

नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission)

  • बड़े तथा भारी नाभिकों के छोटे नाभिकों में टूटने की प्रक्रिया को ‘नाभिकीय विखंडन’ कहा जाता है।
  • उदाहरण के लिये जब किसी यूरेनियम समस्थानिक U-235 पर न्यूट्रॉन से प्रहार कराया जाता है तो वह दो माध्यमिक द्रव्यमान वाले नाभिकीय खंडों में विखंडित हो जाता है

Radioactivity3

Radioactivity4

  • ये विखंडित उत्पाद रेडियोएक्टिव नाभिक होते हैं और इनमें तब तक क्षय चलता रहता है, जब तक स्थायी खंड न प्राप्त हो जाएँ। 
  • यूरेनियम जैसे नाभिक की विखंडन अभिक्रिया में निर्मुक्त ऊर्जा (Q) प्रति विखंडित नाभिक 200 MeV कोटि की होती है। 
  • संवर्द्धन प्रक्रिया द्वारा यूरेनियम का प्रतिशत संघटन बढ़ाया जाता है जिसमें यूरेनियम के समस्थानिकों को विलग किया जाता है। इस प्रकार प्राप्त यूरेनियम, संवर्द्धित यूरेनियम (enriched uranium) कहलाता है। 
  • यूरेनियम के रेडियोधर्मी विघटन का अंतिम उत्पाद लेड (सीसा) है। 

शृंखला अभिक्रिया (Chain Reaction)

  • जब यूरेनियम पर न्यूट्रॉनों की बमबारी की जाती है तो यूरेनियम नाभिक के विखंडन के साथ तीन नए न्यूट्रॉन भी उत्सर्जित होते हैं, जो अन्य यूरेनियम नाभिकों को विखंडित करते हैं। इस प्रकार नाभिकीय श्रृंखला अभिक्रिया आरंभ हो जाती है और तब तक चलती रहती है, जब तक सभी यूरेनियम समाप्त न हो जाएँ।

Types

  • नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया (Controlled Chain Reaction)
    • EX-ATOMIC REACTOR
    • First atomic reactor made by Enrico Fermi in 1942
  • अनियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया (Uncontrolled Chain Reaction)
    • EX- Atom Bomb
    • First atom bomb made by J. Robert Oppenheimer in 1945
  • द्वितीय विश्व युद्ध में अमेरिका द्वारा जापान के विरुद्ध पहली बार परमाणु बम का प्रयोग किया गया था 

शहर का नाम 

बम गिराने की तिथि 

बम का नाम 

मान का नाम

हिरोशिमा 

6 AUG 1945

FAT MAN

B-29 Enola Gay

नागासाकी 

9 AUG 1945

LITTLE BOY

 

(i)नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया (Controlled Chain Reaction) 

  • यूरेनियम विखंडन की शृंखला अभिक्रिया में प्रत्येक यूरेनियम नाभिक के विखंडन से उत्सर्जित तीन न्यूट्रॉनों में से दो को अवशोषित कर श्रृंखला अभिक्रिया को नियंत्रित ढंग से चलाने की प्रक्रिया को ‘नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया’ कहते हैं। 
  • इस अभिक्रिया के दौरान निर्मुक्त ऊर्जा का उपयोग रचनात्मक कार्यों (यथा-विद्युत उत्पादन) में किया जा सकता है। परमाणु रिएक्टरों (Atomic Reactors) में नियंत्रित शृंखला अभिक्रिया द्वारा ही विद्युत उत्पादन किया जाता है। 
  •  रिएक्टरों में तीव्र न्यूट्रॉनों को मंदित करने के लिये विखंडनीय नाभिकों के साथ हल्के नाभिकों (जिन्हें मंदक या अवमंदक (Moderator) कहते हैं) का प्रयोग किया जाता है। 

(ii) अनियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया (Uncontrolled Chain Reaction)

  • इस अभिक्रिया में अभिक्रिया के दौरान उत्पन्न होने वाले न्यूट्रॉनों की संख्या पर नियंत्रण नहीं होता है। इस कारण विखंडित होने वाले परमाणुओं की संख्या 1,3,9,27, 81…के क्रम में बढ़ता जाता है।
  •  इस कारण इस अभिक्रिया में ऊर्जा अत्यन्त तीव्र गति से उत्पन्न होती है तथा बहुत कम समय में बहुत अधिक विनाश कर सकती है। इस अभिक्रिया में प्रचंड विस्फोट होता है। 
  • परमाणु बम (Atom Bomb) में यही अभिक्रिया होती है।

 

नाभिकीय पावर प्लांट (Nuclear Power Plant)

  • न्यूक्लियर पावर प्लांट में नाभिकीय ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है।

  • न्यूक्लियर पावर प्लांट में नाभिकीय रिएक्टर में नाभिकीय अभिक्रिया संपादित होती है।

Radioactivity5

  • इसके विभिन्न अवयव हैं
  • ईंधन (Fuel): ईंधन रूप में विघटनशील पदार्थ प्रयुक्त होते हैंजैसे- U-235,U-238 थोरियम, प्लूटोनियम,इत्यादि।
  • मंदक (Moderator): उच्च गतिशील न्यूट्रॉनों की गति को कम करने के लिये जल, भारी जल (D20), ग्रेफाइट एवं बेरीलियम ऑक्साइड मंदक की तरह प्रयुक्त होते हैं।
  • शीतलक (Coolant): नाभिकीय अभिक्रिया में उत्पादित ऊर्जा को अवशोषित करने हेतु ठंडा जल, द्रवित सोडियम व पोटेशियम आदि को शीतलक की तरह प्रयोग में लाया जाता है।
  • नियंत्रक छड़ (Control Rods): नाभिकीय विखंडन में उत्सर्जित न्यूट्रॉनों की संख्या को कम करने तथा अभिक्रिया को नियंत्रित रखने हेतु नियंत्रक छड़ों का प्रयोग किया जाता है। कैडमियम तथा बोरॉन निर्मित छड़ी की न्यूट्रॉन अवशोषण क्षमता अधिक होने के कारण इनका प्रयोग नियंत्रक की तरह करते हैं।
  • रिएक्टर से प्राप्त ऊष्मा का प्रयोग भाप बनाने में करते हैं, जो टरबाइन को घुमाकर विद्युत ऊर्जा उत्पादित करती है।

भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम 

  • भारत में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की शुरुआत स्वतंत्रता प्राप्ति के समय से ही डॉ. होमी जहाँगीर भाभा के नेतृत्व में हुई। 
  • प्रथम भारतीय नाभिकीय रिएक्टर ‘अप्सरा’ था। इसने 4 अगस्त, 1956 से कार्य प्रारंभ किया। ईंधन रूप में संवर्द्धित यूरेनियम और मंदक के लिये जल का प्रयोग किया गया। 
  • 1960 में कनाडा-इंडिया रिएक्टर (CIRUS) स्थापित किया गया। इसमें ईंधन रूप में प्राकृतिक यूरेनियम तथा मंदक के लिये भारी जल का प्रयोग किया गया। 
  •  परमाणु ऊर्जा पर शोध में प्रथम दो दशकों में महत्त्वपूर्ण उपलब्धि ट्राम्बे में स्वदेशी प्लूटोनियम संयंत्र की रचना एवं निर्माण थी, जिसने भारत में ईंधन पुनर्संसाधन (Fuel Reprocessing) तकनीक का मार्ग प्रशस्त किया। 

भारत के अन्य शोध रिएक्टर निम्नलिखित हैं

वर्ष

रिएक्टर

ईंधन

मंदक

1961

जरलीना

(Zerlina)

प्राकृतिक यूरेनियम 

भारी जल

 

1972

पूर्णिमा-I

प्लूटोनियम ऑक्साइड

कुछ नहीं

1984

पूर्णिमा-II

यूरेनियम-233

जल

1985

ध्रुव

प्राकृतिक यूरेनियम

भारी जल

1990

पूर्णिमा-III

यूरेनियम-233

एल्युमीनियम मिश्रधातु

1996 

कामिनी 

यूरेनियम-233

एल्युमीनियम मिश्रधातु

जल

 

  • शोध रिएक्टरों का प्राथमिक उद्देश्य शक्ति जनन नहीं है, वरन् नाभिकीय विज्ञान के विभिन्न पक्षों पर शोध के लिये सुविधा प्रदान करना है। 
  • परमाणु खनिजों के सर्वेक्षणों में यह संकेत मिले हैं कि भारत में यूरेनियम के भंडार तो बहुत सीमित हैं, पर थोरियम के भंडार पर्याप्त हैं। इसके अनुसार ही नाभिकीय शक्ति जनन की तीन चरणों में पूरी होने वाली योजना अपनाई गई है।

प्रथम चरण

  • प्राकृतिक यूरेनियम ईंधन रूप में तथा भारी जल मंदक रूप चरण में प्रयुक्त किया जाना।

द्वितीय चरण

  • प्राकृतिक यूरेनियम के उपयोग द्वारा उत्पन्न अपशिष्ट को पुनर्संसाधित करने पर प्राप्त प्लूटोनियम- 239 का तीव्र प्रजनक रिएक्टर में ईंधन की तरह प्रयोग।

तृतीय चरण

  • ऐसे तीव्र प्रजनक रिएक्टरों का प्रयोग, जो थोरियम-232 को  विखंडनशील यूरेनियम- 233 में बदलेंगे और फिर इनके लिये विशेष रूप से बनाए गए शक्ति संयंत्रों में प्रयोग में लाए जाएंगे।
  • वर्तमान में भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम दूसरे चरण में है और थोरियम के उपयोग संबंधी तीसरे चरण के लिये काफी कार्य हो चुका है।

ब्रीडर रिएक्टर (Breeder Reactor): 

  • ऐसा रिएक्टर जो प्रयुक्त किए गए विखंडनीय पदार्थ की तुलना में अधिक विखंडनीय पदार्थ उत्पन्न करता है, ब्रीडर रिएक्टर कहलाता है, अर्थात् इसमें प्रयुक्त पदार्थ ही और अधिक मात्रा में उत्पन्न किया जाता है। 
  • इसमें यूरेनियम-238 से प्लूटोनियम-239 और थोरियम-232 से यूरोनियम-233 प्राप्त होता है।
  • भारत तथा अन्य कई देशों में नाभिकीय रिएक्टरों का उपयोग विद्युत् उत्पादन के लिए किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त रिएक्टर से रेडियोएक्टिव समस्थानिक भी प्राप्त होते हैं। रिएक्टर द्वारा यूरेनियम-238 को विखंडनयोग्य प्लूटोनियम-239 में परिवर्तित किया जाता है, और तब उसे परमाणु बम के निर्माण में प्रयुक्त किया जा सकता है।

 

स्माइलिंग बुद्धा (Smiling Buddha) 

  • भारत ने पोखरण (राजस्थान) में अपना पहला भूमिगत नाभिकीय परीक्षण 18 मई, 1974 को किया। इस परमाणु परीक्षण का गुप्त नाम (Code Name) ‘स्माइलिंग बुद्धा’ था। इस परमाणु परीक्षण को पोखरण-1 के नाम से भी जाना जाता है। ये 
  • भारत ने अपना दूसरा परमाणु परीक्षण मई 1998 में किया, जिसे पोखरण-II के नाम से जाना जाता है। पोखरण-II में 11 मई और 13 मई, 1998 को पाँच परमाणु परीक्षण किये गए। इनमें प्रथम नाभिकीय विखंडन पर आधारित था, जबकि अन्य चार नाभिकीय संलयन पर। पोखरण-II को ‘ऑपरेशन शक्ति‘ कोड नाम दिया गया था। 

परमाणु बम (Atom Bomb) : 

  • परमाणु बम को सामान्यतः नाभिकीय बम भी कहा जाता है। 
  • इसका सिद्धान्त नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) पर आधारित है। 
  • परमाणु बम का बनाने के लिए यूरेनियम-235 या प्लूटोनियम-239 का प्रयोग किया जाता है। 
  • इसमें अनियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया (Uncontrolled Chain Reaction) अभिक्रिया होती है। 
  • प्रथम परमाणु बम जे. राबर्ट ओपन हीमर द्वारा 1945 ई० में बनाया गया था। 
  • परमाणु विस्फोट में वायु का प्रचण्ड झोंका आता है तथा ताप कम-से-कम 10 °C तक पहँच जाता है तथा लाखों वायुमंडलीय दाब के बराबर दाब उत्पन्न होता है। विस्फोट में अन्धा कर देने वाली चमक तथा कई विनाशकारी रेडियोएक्टिव किरणें उत्पन्न होती हैं, जो विस्फोट के काफी समय बाद तक हानिकारक प्रभाव डालती रहती हैं। 
  • द्वितीय विश्व युद्ध में अमेरिका द्वारा जापान के विरुद्ध पहली बार परमाणु बम का प्रयोग किया था। प्रथम परमाणु बम (लिटिल बॉय) 6 अगस्त, 1945 ई० को अमेरिकी वायुसैनिक बमवर्षक विमान बी-29 इनोला गे द्वारा हिरोशिमा पर गिराया गया था। 
  • इसके तीन दिन बाद ही 9 अगस्त, 1945 ई० को दूसरा परमाणु बम (फैट मैन) जापान के ही नागासाकी शहर पर गिराया गया था। 
  • परमाणु बम नाभिकीय ऊर्जा का विनाशक रूप है। 

नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion)

  • दो हल्के नाभिक मिलकर एक अपेक्षाकृत बड़ा नाभिक बनाएँ तो ऊर्जा निर्मुक्त होती है, इस प्रक्रिया को ‘नाभिकीय संलयन’ कहते हैं। 

Radioactivity

  • संलयन के लिये दो नाभिकों को इतने पास लाना आवश्यक है, जिससे कि उनके बीच आकर्षित लघु-परासीय नाभिकीय बल कार्य कर सके। धनावेशित नाभिकों के बीच कूलॉम प्रतिकर्षण लगता है, जिसे पार करने के लिये समुचित ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
  • यदि द्रव्य का ताप इतना बढ़ाया जाए कि इसके कण मात्र अपनी तापीय गति के कारण कूलॉम अवरोध को पार कर जाएँ तो संलयन संभव हो पाता है, इसे ‘ताप नाभिकीय संलयन’ कहते हैं। 
  • तारों के ऊर्जा का स्रोत ताप नाभिकीय संलयन है। तारों के अंदर बहुत उच्च ताप और उच्च दाब की स्थितियाँ उपलब्ध हैं, जिससे ताप नाभिकीय संलयन द्वारा ऊर्जा उत्पन्न होती है। 
  • सूर्य की ऊर्जा का स्रोत सूर्य में होने वाली नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया है। यह एक बहुचरणी प्रक्रिया है, जिसमें हाइड्रोजन, हीलियम में परिवर्तित होती है। अतः सूर्य का ईंधन हाइड्रोजन है। अमेरिकी वैज्ञानिक एच.ए. बेथे ने बताया कि सूर्य व ब्रह्मांड के अन्य तारों की ऊर्जा का स्रोत नाभिकीय संलयन है।

 

हाइड्रोजन बम (Hydrogen Bomb)

  • हाइड्रोजन बम नाभिकीय संलयन पर आधारित होता है, क्योंकि नाभिकीय संलयन के लिये उच्च दाब तथा उच्च ताप की आवश्यकता होती है। इसलिये हाइड्रोजन बम में नाभिकीय संलयन प्रक्रिया करने हेतु पहले परमाणु विस्फोट कराया जाता है। परमाणु विस्फोट के कारण वह उच्च ताप और दाब प्राप्त हो पाता है, जिससे नाभिकीय संलयन हो। 
  • नाभिकीय संलयन में विखंडन से ज़्यादा ऊर्जा उत्पादित होती है, अतः हाइड्रोजन बम, परमाणु बम से अधिक विध्वंसकारी होते हैं।
  • हाइड्रोजन बम का विकास करने में अमेरिकी वैज्ञानिक एडवर्ड जेनर ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। अतः इन्हें ‘फादर ऑफ हाइड्रोजन बम‘ भी कहते हैं।

 

अंतर्राष्ट्रीय ताप-नाभिकीय प्रायोगिक रिएक्टर (International Thermonuclear Experimental Reactor)

  • यह फ्रांस में स्थित एक अंतर्राष्ट्रीय प्रयास है। 
  • इसमें नाभिकीय संलयन आधारित विद्युत ऊर्जा उत्पादन पर शोध जारी है। 
  • यह टोकमॉक (Tokamak) नाभिकीय संलयन रिएक्टर पर आधारित प्रायोगिक रिएक्टर है।