झारखण्ड में खनिज संसाधन Mineral Resources in Jharkhand : SARKARI LIBRARY

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झारखण्ड में खनिज

धात्विक खनिज

अधात्विक खनिज

ऊर्जा खनिज

लौह 

धात्विक खनिज

अलौह 

धात्विक खनिज

लौह अयस्क

क्रोमाइट 

मैंगनीज

जस्ता ( ZINC)

टिन 

सोना

 

  • तांबा 
  • बॉक्साइट 
  • टंगस्टन 

अभ्रक (Mica)

कायनाइट(Kainite)

ग्रेफाइट

चूना पत्थर

डोलोमाइट

एस्बेस्टस (Asbestos)

बेंटोनाइट(Bentonite)

ग्रेनाइट (Granite)

सोपस्टोन/Quartz

कोयला

प्राइम कोकिंग कोल 

यूरेनियम

थोरियम

इल्मेनाइट

बेरिलियम

 जिरकन

 

  • झारखण्ड को ‘भारत का रूर’ कहा जाता है।
  • देश के कुल खनिज का लगभग 40% खनिज झारखण्ड राज्य में पाया जाता है। 
  • विभिन्न खनिजों के इस प्रकार है

 

भंडार की दृष्टि से झारखण्ड का देश में स्थान

पहला स्थान

  • कोयला(कोयला उत्पादन की दृष्टि से तीसरा स्थान)
  • प्राइम कोकिंग कोल 
  • मध्यम कोकिंग कोल 
  • पन्ना (Emerald)
  • रॉक फास्फेट

दूसरा स्थान

  • तांबा
  • निकेल
  • लौह अयस्क
  • एंडेलुसाइट
  • कोबाल्ट
  • सेमी-कोकिंग कोल
  • एपेटाइट 

तीसरा स्थान

  • ग्रेनाइट
  • बेंटोनाइट
  • गैर-कोकिंग कोल 

चौथा स्थान

  • फायरक्ले
  • एस्बेस्टस
  • कायनाइट
  • बॉक्साइट
  • क्रोमाइट
  • ग्रेफाइट (ग्रेफाइट उत्पादन की दृष्टि से प्रथम स्थान) 

पाँचवा स्थान

  • वर्मीकुलाइट

छठा स्थान

  • चाइनाक्ले
  • अभ्रक
  • क्वार्ट्ज

सातवां  स्थान

  • फेल्सपार
  • क्वार्टजाईट
  • गारनेट

(Source – Indian Mineral Yearbook 2018 & 2019 published by Indian Bureau of Mines) 

  • भारत में झारखण्ड निम्न खनिजों का एकमात्र उत्पादक राज्य है।
    • कोकिंग कोयला 
    • यूरेनियम 
    • पाइराइट 
    • चकमक पत्थर (Flint Stone)
  •  झारखण्ड आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 के अनुसार
    • झारखण्ड में कुल बड़े खदानो की संख्या –  373
  • सर्वाधिक खदान की संख्या 
    1. धनबाद (109 खदान)
    2. पश्चिमी सिंहभूम (78 खदान) 

 

झारखण्ड में धात्विक खनिज 

(A) लौह धात्विक खनिज 

1. लौह अयस्क 

  • लौह अयस्क की प्राप्ति का प्रमुख केन्द्र – पश्चिमी सिंहभूम क्षेत्र (राज्य का दक्षिण पश्चिम क्षेत्र)
  • यह विश्व का सर्वाधिक लौह भंडार वाला क्षेत्र है। 
  • लौह अयस्क की खाने मूल रूप से धारवाड़ श्रृंखला में पाया जाता है।
  • देश के कुल लौह अयस्क भंडार का लगभग 26% झारखण्ड राज्य में निक्षेपित है।
    • हेमेटाइट – 99 %, मैग्नेटाइट – 1 %
    • लौह अयस्क के रिज़र्व की दृष्टि से झारखण्ड देश में स्थान  – दूसरा बड़ा राज्य 
    • उत्पादन की दृष्टि से यह देश में – चौथा (10%) स्थान
  • झारखण्ड में सर्वाधिक हेमेटाइट लौह अयस्क वाला जिला पश्चिमी सिंहभूम है।
  • देश में हेमेटाइट लौह अयस्क के भंडार की दृष्टि से झारखण्ड का दूसरा स्थान है।
  • एशिया में लौह अयस्क की सबसे बड़ी खाननोवामुंडी की खान
    • लौह अयस्क भंडार की दृष्टि से नोवामुंडी भारत का सबसे बड़ा निक्षेप है। 
  • भारत का सबसे पुराना लौह अयस्क खान – गोरुमोहसिनी (रायरंगपुर, उड़ीसा)
    • लौह खनन का कार्य प्रारंभ – 1904 ई. में
    • इसी से प्रेरित होकर 1907 ई. में साकची में टाटा की स्थापना हुयी थी।
  • राज्य में मैग्नेटाइट लौह अयस्क के भंडार 
    • पूर्वी सिंहभूम, पलामू, गुमला, हजारीबाग तथा लातेहार जिले में हैं। 
  • लौह क्षेत्र को चार वर्गों में विभाजित किया जाता है-
    • नोआमुड़ी – बाराजामदा 
    • गुआ – घटकुरी, 
    • चिरिया – मनोहरपुर
    • करमपादा – कोडलीबाद

जिला  

लौह अयस्क की खान 

पश्चिमी सिंहभूम 

(हेमेटाइट लौह अयस्क- लोहे की मात्रा 58 -67 प्रतिशत तक)

  • नोवामुंडी
  • चिरिया (मनोहरपुर) – विश्व के सबसे बड़े लौह खान में शामिल , संचालन –  (SAIL) के द्वारा
  • बराईगुरु
  • घाटकुरी 
  • ठाकुराणी 
  • करमपदा 
  • किरीबुरू 
  • मेघाहातु  बुरू
  • गुआ 
  • Herbaljori
  • Kumrita 
  • घाटकुरी, बोकाना, कसियापीचा, हत्नाबुरु, कोडलीबाद, परंबलजोरी, बरबलजोरी, राइका, अंकुआ, लेदबुरु, मटकंबुरु, रुरंगबुरु और जंतैबुरु

पूर्वी सिंहभूम

(मैग्नेटाइट लौह अयस्क- लोहे की मात्रा 36-54 प्रतिशत)

 

 

2.क्रोमाइट 

  • सिंहभूम क्षेत्र में है। 
  • क्रोमाइट का भंडार – लगभग 736,000 टन मौजूद है।
  • Place-
    • पश्चिमी सिंहभूम ( जोजोहातू) – यहाँ पाया जाने वाला अयस्क में क्रोमाइट की मात्रा लगभग 50 प्रतिशत तक
    • सरायकेला – क्रोमाइट की मात्रा 48 प्रतिशत तक
    • कुस्मिता
    • जनोओरेज
    • कोचा
    • टोंटो क्षेत्र 
  • क्रोमियम की प्राप्ति का प्रमुख स्त्रोत
  • उपयोग – आग बुझाने, इस्पात बनाने तथा रासायनिक एवं रिफेक्ट्री उद्योगों में

3. मैंगनीज 

  • मैंगनीज अयस्क का संकेन्द्रण –  सिंहभूम क्षेत्र में 
  • झारखण्ड में लगभग 13.7 मिलियन टन मैंगनीज का भंडार उपलब्ध है। 
  • यह धारवाड़ चट्टानों से प्राप्त होता है। 
  • रंग – काला
  • उपयोगलोहा इस्पात उद्योग में
  • झारखण्ड में मैगनीज का कुल भंडार, भारत के कुल भंडार का 3.18% है।

जिला  

मैंगनीज की खान 

पूर्वी सिंहभूम 

पहाड़पुर 

पश्चिमी सिंहभूम

गुआ 

जामदा

नोवामुंडी 

 

5. टिन 

  • यह आग्नेय चट्टानों में उपलब्ध कैसिटराइट नामक कच्चे धातु से प्राप्त होता है।
  • यह मुख्य रूप से हजारीबाग, पलामू, राँची तथा संथाल परगना के क्षेत्रों में पाया जाता है।

6. सोना 

  • राज्य के सिंहभूम क्षेत्र की चट्टानों में सोना अल्प मात्रा में पाया जाता है।
  • यह आग्नेय तथा कायांतरित चट्टानों  में तथा नदियों की रेत में पाया जाता है।
  • झारखण्ड में उत्पादन : हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड(HCL) द्वारा किया जाता है।
  • पूर्वी सिंहभूम के कुंदेर-कोचा नामक स्थान पर मनमोहन मिनरल इंडस्ट्रीज प्रा. लिमिटेड नामक कंपनी द्वारा भी सोने का उत्पादन किया जा रहा है।
  • झारखण्ड भारत का 1% प्रतिशत सोना का उत्पादन करता है।
  • देश में सोने का सर्वाधिक उत्पादन करने वाले राज्य 
    1. कर्नाटक
    2. झारखण्ड 
  • झारखण्ड की नदियों (स्वर्णरेखा व सोन नदी) के रेत में भी सोने का अंश पाया जाता है।
  • झारखण्ड में वर्त्तमान में सोना का एकमात्र उत्पादन केंद्र पूर्वी सिंहभूम का मनमोहन इंडस्ट्रीज है।

जिला  

सोने की खान 

पूर्वी सिंघभूम 

भितरदारी ,कुंदरकोचा ,लावा मयसरा 

पश्चिमी सिंहभूम

पहारडीहा 

रांची 

परासी ,तमाड़ ,कुवासल ,सोनापेट ,जारगो ,सेरेंगडीह,

गढ़वा 

शिवपहाड़ी 

सरयकेला 

जिलगड़ा (जिलिगडा)

(B) अलौह धात्विक खनिज 

1. तांबा

  • तांबा उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र 
    • पूर्वी सिंहभूमचपरी, मोसाबनी, धोबनी, सुरदा, केन्दडीह, राखा, छापरी-सिद्धेश्वर ,पाथरगोरा एवं घाटशिला
    • तुरामडीह, रामचंद्रपहाड़, नंदुप, बायनबिल और धडकीडीह 
    • हजारीबाग साहेबगंज, पलामू, गिरिडीह और गढ़वा में भी
  • इसे सिंहभूम शियर जोन कहा जाता है। यहाँ खनन कार्य 1924 ई. में शुरू किया गया था
    • 1930  में इंडियन कॉपर काम्प्लेक्स कंपनी (ब्रिटीश कंपनी) की स्थापना
  • मोसाबनी तांबा खदान
    • शुरूआत1928 में ,इंडियन कॉपर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ब्रिटिश कंपनी) द्वारा की गयी थी। 
  • सुरदा खदान का संचालन भारत संसाधन लिमिटेड (पर्थ, ऑस्ट्रेलिया की कंपनी) द्वारा किया जाता है।
  • पूर्वी सिंहभूम ,घाटशिला में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड(HCL) द्वारा तांबा अयस्क का उत्पादन किया जाता है, जबकि इसे गलाने का कार्य इंडियन कॉपर कॉम्प्लेक्स द्वारा किया जाता है।
  • पूर्वी सिंहभूम में तांबा खान – केन्दाडीह ,राखा ,छपरी राखा
  • प्रयोग – विद्युत उद्योग , ऑटोमोबाइल उद्योग ,सुरक्षा उद्योग
    • मिश्र धातुओं को बनाने में
    • लोहा तथा निकेल को मिलाकर स्टेनलेस स्टील बनाया जाता है।
    • टीन मिलाकर-  कांसा बनाया जाता है।
    • जस्ता मिलाकर-  पीतल बनाया जाता है।
  • झारखण्ड का  ताँबा के भंडार की दृष्टि से देश में तीसरा स्थान
  • झारखण्ड में देश के कुल तांबा रिज़र्व का 18.48 प्रतिशत

2. बॉक्साइट 

  • झारखण्ड में उच्च कोटि का बॉक्साइट(52%-55% तक एलुमिनियम) पाया जाता है 
  • राज्य का पाट प्रदेशलोहरदगा, गुमला, लातेहार, गोड्डा तथा साहेबगंज जिले में पाया जाता है।
  • यहाँ लैटेराइट के साथ पाया जाता है।
  • यहाँ के बॉक्साइट में 50-55% तक एलुमिना के अंश पाए जाते है।
  • बॉक्साइट से एलुमिनियम निकाला जाता है।
  • झारखण्ड के लोहरदगा, गुमला एवं लातेहार जिले में हिण्डालको इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा बॉक्साइट का खनन किया जाता है। 
  • झारखण्ड के मुरी(रांची ) में  बॉक्साइट को गलाने का संयंत्र है। 
  • गुमला में बॉक्साइट खान – लोधापाटा ,दूधापाट, भुलवापाट ,चीरोपाट ,हेठीलोदा,जोविपाट  ,बगरू हिल्स, पाखर, हिसारी, भूसर 
    • सबसे पुराना बॉक्साइट खान – बगरू  (1933 से बॉक्साइट का उत्खनन कार्य प्रारंभ) 
    • लोहरदगा को बॉक्साइट नगरी के रूप में जाना जाता है।
  • लोहरदगा में बॉक्साइट खान – दूधापाट ,सेरेनदाग 
  • गुमला में बॉक्साइट खान – गुरदरी, सेरेंगदाग 
  • लातेहार में बॉक्साइट खान – – चिरो और ओरसा 
  • भंडार व उत्पादन दोनों की दृष्टि से यह देश में 7वें स्थान पर है।
  • झारखण्ड में देश के कुल बॉक्साइट रिज़र्व का 4.20 प्रतिशत संरक्षित है।

3. टंगस्टन

  • टंगस्टन का उत्पादन कालामाटी (पूर्वी सिंहभूम) में किया जाता है। 
  • इसके अलावा यह हजारीबाग भी पाया जाता है।

चाँदी

  • चाँदी गंधक, जस्ता एवं अन्य खनिजों के साथ पाया जाता है। 
  • यह राँची, सिंहभूम इत्यादि जिलों में पाया जाता है।
  • धनबाद में चाँदी का उत्पादन होता है।
  • भारत के कुल चांदी भण्डारण में झारखण्ड की हिस्सेदारी 5.10 प्रतिशत है।

झारखण्ड में अधात्विक खनिज 

1. अभ्रक (Mica) 

  • यह आग्नेय तथा कायांतरित चट्टानों के परतों में मिलता है।
  • अभ्रक का प्रमुख क्षेत्र 
    • कोडरमा  जिला का झूमरी तिलैया
    • गिरिडीह व हजारीबाग 
    • अभ्रक का मुख्य उत्पादक केन्द्र –  कोडरमा, ढोढोकोला, डोमचांच, ढाब, झुमरीतिलैया, तिसरी, चकाई आदि
  • कोडरमा  को ‘भारत की अभ्रक राजधानी’ कहा जाता है।  
  • अत्यंत हल्का खनिज है।
  • झारखण्ड में उच्च कोटि का सफेद अभ्रक (रूबी  या मस्कोविट किस्म) पाया जाता है जिसे ‘रूबी अभ्रक’ कहा जाता है।  
  • अभ्रक बिजली तथा ताप का कुचालक होता है
  • अभ्रक के उत्पादन में भारत में झारखण्ड का  स्थान – 
  • झारखण्ड में भारत के कुल अभ्रक भण्डारण का मात्र 0.30 प्रतिशत ही उपलब्ध है।
  • झारखण्ड में उत्पादित कुल अभ्रक का 90% भाग निर्यात कर दिया जाता है।

2. कायनाइट (Kainite)

  • कायनाइट एक अग्निरोधक खनिज है
  • झारखण्ड में कायनाइट का सबसे बड़ा भण्डार पूर्वी सिंहभूम के लिप्साबुरू क्षेत्र में है। 
  •  पश्चिमी सिंहभूमसरायकेला-खरसावां जिले के राजखरसावां,कन्यालुका, सिरबाई, डुंगरी  में भी कायनाइट की उपलब्धता है।
  • इसका उत्पादन भारतीय तांबा निगम(ICC-1924,HCL-1967) द्वारा किया जाता है। 
  • यह ताप सहन करने वाला खनिज है। 
  • उपयोग–  ताप निरोधक ईंट बनाने में , चीनी-मिट्टी के बर्तनों के निर्माण में 
  • भारत के कुल भंडार में झारखण्ड का योगदान 5.84 प्रतिशत है।

3. ग्रेफाइट 

  • यह पलामू में सर्वाधिक पाया जाता है। 
  • कोच्ची ,रेवाती ,रेवारातू ,दुलसामा ,पोंची 
  • यह कार्बन का एक रूप है .
  • जिसे काला सीसा भी कहा जाता है।
  •  इसका उपयोग उच्च तापसह्य उद्योगों (Refractory Industry) में किया जाता है। 
  • पलामू में भारत के कुल ग्रेफाइट भण्डारण का 7.38 प्रतिशत आरक्षित रखता है।

4. चूना पत्थर 

  • उपयोग सीमेंट बनाने के साथ-साथ लौह-इस्पात उद्योग में भी किया जाता है।
  • झारखण्ड में पलामू, गढ़वा, हजारीबाग, राँची, पश्चिमी सिंहभूम में मिलता है। 
  • चूना पत्थर के भंडार के मामले में झारखण्ड राज्य को देश में 17वां स्थान प्राप्त है।
  • झारखण्ड में चूना पत्थर का कुल भंडार भारत के कुल भंडार का मात्र 0.34 प्रतिशत ही है।

 

5. डोलोमाइट 

  • पलामू जिला के डाल्टनगंज (मेदिनीनगर),सिंहभूम,लातेहार गढ़वा में में उपलब्ध है।
  • Tulsidamar- गढ़वा
  • Khutia – गढ़वा
  • डोलोमाइट चूना पत्थर का ही रूप होता है ,जब चूना पत्थर में 10 प्रतिशत से अधिक मैग्नीशियम की मात्रा पायी जाती है तो वह डोलोमाइट कहलाता है। 
  • झारखण्ड राज्य भारत का लगभग 5 प्रतिशत डोलोमाइट का उत्पादन करता है।  

6. एस्बेस्टस (Asbestos)

  • यह धारवाड़ क्रम की चट्टानों में पाया जाता है।
  • यह पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम व सरायकेला-खरसावां जिले में पाया जाता है। 

7. बेंटोनाइट(Bentonite)- मुल्तानी मिट्टी

  • यह एक एलुमिनियम सिलिकेट मिट्टी है, जिसका निर्माण ज्वालामुखी के राख से होता है। 

यह साहेबगंज तथा पाकुड़ जिले में पाया जाता है।

8. ग्रेनाइट (Granite)

  • राँची के तुपुदाना के पास उपलब्धता है
  • भवन निर्माण में प्रयुक्त होता है।
  • भण्डारण के दृष्टिकोण से झारखण्ड देश में तीसरा स्थान रखता है।
  • यहाँ देश के कुल भंडार का लगभग 19.36 प्रतिशत भंडार सुरक्षित है। 
  • यह दुमका, जामताड़ा, कोडरमा, रांची, खूंटी, सिमडेगा, लातेहार, पलामू जिलों में पाया जाता है।
  • झारखण्ड में ग्रेनाइट के उपलब्ध प्रकार
    • टाइगर स्कीन
    • मयूराक्षी ब्लू 
    • सावन रोज
    • इंग्लिश टीक
    • ब्लैक ग्रेनाइट (ब्लैक चीता, ब्लैक जेब्रा) 

 

9. सोपस्टोन/Quartz 

  • संपूर्ण छोटानागपुर क्षेत्र में उपलब्ध है। 

सीसा

  • सीसा प्रायः चाँदी और जस्ते के साथ मिला हुआ पाया जाता है।
  • यह परतदार चट्टानों  में पाया जाता है।
  • सीसा बिजली का कुचालक होता है। 
  • हजारीबाग जिला –  नयाटांडा, बरमुंडा और बरामासिया क्षेत्र पाया जाता है।
  • संथाल परगना के पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाता है।

 

फायरक्ले / अग्निमृत्तिका

  • उपयोग – अग्नि प्रतिरोधक ईट बनाने के लिए, खनिजों को गलाने वाले भट्टियों को बनाने में 
  • यह कोयला के साथ बेड के रूप में पाया जाता है। 
  • दक्षिणी कर्णपूरा, रामगढ़, हुटार, पलामू क्षेत्र ,दामोदर बेसिन अर्थात धनबाद, बोकारो, गिरिडीह में मिलता है।
  • झारखण्ड का कुल आरक्षित भंडार भारत के भंडार में 9.33 प्रतिशत योगदान देता है।

चाइना क्ले / चीनी मिट्टी

  • चीनी मिट्टी फेलस्पार नामक खनिज के विघटन सेनिर्मित होती है।
  • झारखण्ड में इसका भंडार सिंहभूम, राँची, लोहरदगा और संथाल परगना क्षेत्रों में पाया जाता है।
  • देश के कुल भंडार का 7.33 प्रतिशत आरक्षित है।

फेल्सपार

  • फेल्सपार  मैग्नेटाइट और क्वार्टज खनिजों के साथ पाया जाता है।
  • यह गुलाबी रंग का होता है।
  • फेल्सपार के अपरदित होने से चीनी मिट्टी का निर्माण होता है।
  • झारखण्ड का प्रमुख फेल्सपार उत्पादन क्षेत्र–  हजारीबाग, गिरिडीह तथा संथाल परगना 

झारखण्ड में ऊर्जा खनिज 

1. कोयला

 

  • सर्वाधिक कोयला भण्डारक राज्य – झारखण्ड (27.37%-झारखण्ड का स्थान भारत में प्रथम)
  • सर्वाधिक कोयला उत्पादक राज्य
    • 1 .ओड़िसा 
    • 2 .छतीसगढ़ 
    • ३.मध्य प्रदेश
    • झारखण्ड(17 %-झारखण्ड का स्थान चौथा)
  • झारखण्ड राज्य में कुल कोयला खदान  – 132 (देश में सर्वाधिक) 
  • झारखण्ड में कोयला कार्बोनिफेरस काल के गोंडवाना श्रेणी में पाया जाता है।
  • भारत में कोकिंग कोल का उत्पादन करने वाला एकमात्र राज्य – झारखण्ड 
  • झारखण्ड में सर्वप्रथम कोयला खनन का काम दामोदर घाटी निगम क्षेत्र के अंतर्गत झरिया में आरंभ हुआ।
  • झरिया पूरे झारखण्ड के कोयला उत्पादन का 60% कोयला उत्पादन करता है। 
  • झरिया क्षेत्र भारत कोकिंग कोल लिमिटेड(BCCL) के अंतर्गत आता है। 
  • राउरकेला के इस्पात कारखाने को बोकारो से कोयले की आपूर्ति की जाती है। 
  • झारखण्ड में दो तरह के कोयला का उत्पादन होता है –
    • बिटुमिनस – इसमें कार्बन का अंश 78-86 प्रतिशत तक होता है।
    • एन्थ्रासाइट – इसमें कार्बन का अंश 94-98 प्रतिशत तक होता है।
  • उत्पादन की दृष्टि से झारखण्ड का सबसे बड़ा कोयला की खानझरिया
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा कोयले की खान –  कर्णपुरा 
  • झारखण्ड के कोयला क्षेत्रों को 5 वर्गों में विभक्त किया जाता है :-
    • दामोदर घाटी कोयला क्षेत्र
      •  सर्वश्रेष्ठ कोयला पाया जाता है।
      • झरिया, बोकारो, चन्द्रपुरा, कर्णपुरा, रामगढ़ रजरप्पा कोयला क्षेत्र 
    • बराकर बेसिन क्षेत्र –  हजारीबाग और गिरिडीह 
    • अजय बेसिन क्षेत्र
    • राजमहल पहाड़ी क्षेत्र
    • उत्तरी कोयल बेसिन क्षेत्र –  औरंगा, हुटार, डाल्टनगंज कोयला क्षेत्र शामिल है।
  • झारखण्ड में कोयले को चार श्रेणी
    • प्राइम कोकिंग,
    • मध्यम कोकिंग,
    • अर्ध कोकिंग
    •  गैर कोकिंग ।
  • 1971 से पहले कोयले का उत्पादन निजी क्षेत्र के द्वारा किया जाता था
  • 1971-73 के बीच लगभग सभी कोयला खानों का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया।
  • इसके लिए एक केन्द्रीय कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की स्थापना की गयी
    • सात कोयला खनन कंपनियों की स्थापना की गयी
  • झारखण्ड में CIL के घटक कंपनी – 
    • भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL – धनबाद)
    • सेंट्रल कोलफील्ड लिमिटेड (CCL – रांची)
    • ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (ECL – संथाल परगना ) 
  • झारखण्ड में रूस की सहायता से संचालित कोयला परियोजना:
    • झरिया से कुमारी ओ.सी.पी कोयला क्षेत्र तक का विकास 
    • झरिया से सीतानाला कोयला क्षेत्र तक का विकास 
  • झारखण्ड में विश्व बैंक की सहायता से संचालित कोयला परियोजना:
    • झरिया कोकिंग कोयला परियोजना 
    • रजरप्पा परियोजना
    • राजमहल परियोजना 
    • दामोदर परियोजना
    • कतरास परियोजना 
  • झारखण्ड में कोयले के तीन प्रकार पाया जाता है। 
    • कोकिंग कोयला 
    • अर्द्ध कोकिंग कोयला
    • गैर-कोकिंग कोयला
  • सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) द्वारा संचालित कोयला खदान
    • बोकारो, गिरिडीह, रामगढ़, उत्तरी कर्णपुरा तथा दक्षिणी कर्णपुरा में 
  • (CCL) द्वारा संचालित कोल वाशरी 
    • बोकारो – कथरा व स्वांग में
    • रामगढ़ – रजरप्पा व केदला में 

झारखण्ड के प्रमुख कोयला क्षेत्र(million ton ) 1/4/2018

Indian mineral book 2018

कोयला क्षेत्र

कुल संसाधन

झरिया (BCCL)

19530

Dhanbad

उत्तरी कर्णपुरा (CCL)

18615

Ranchi , Hazaribagh ,Chatra ,Latehar 

राजमहल (ECL)

17492

 

पूर्वी बोकारो (CCL)

8283

 

दक्षिणी कर्णपुरा (CCL)

7631.64

(Ramgarh)

पश्चिमी बोकारो (CCL)

5218

ओरंगा (CCL)

2997

रानीगंज  (ECL)

2036

रामगढ (CCL)

1906

देवघर (ECL)

399

हुटार (CCL)

249

Gumla 

डाल्टनगंज (CCL)

143

 

 

झारखण्ड के प्रमुख

कोल वाशरी

संघटक कंपनी

क्षमता (मिलियन टन /वर्ष )
पिपरवार (CCL) 6 .5 (झारखण्ड का सबसे बड़ा कोल वाशरी- गैर कोकिंग कोल वाशरी)
पाथरडीह (BCCL) 5.00 (झारखण्ड की सबसे बड़ी कोकिंग कोल वाशरी)
रजरप्पा
(CCL)
कथारा
(CCL)
करगाली (CCL)
केदला (CCL)
मधुबन (BCCL)
गिद्दी (CCL)
दुगदा ii (BCCL)
भोजुडीह (BCCL)
सुदामडीह (BCCL)
मुनीडीह (BCCL)
स्वांग (CCL)
महुदा (BCCL)
  • Amrapali Coal mines : Tandwa block of the Chatra
  • Chandragupta Coal mines : Keredari  block in the Hazaribagh
  • Magadh Coal mines

2. प्राइम कोकिंग कोल 

  • झारखण्ड राज्य देश में प्राइम कोकिंग कोल का एकमात्र उत्पादक है।
  • झारखण्ड में प्राइम कोकिंग कोल का भंडार लगभग 5313 मिलियन टन(लगभग 100%) है । 

3. यूरेनियम (Uranium)

  • यह एक आण्विक खनिज है।
  • यूरेनियम का उत्पादन करने वाला झारखण्ड देश का पहला राज्य है।
  • यहाँ उपलब्ध यूरेनियम देश के कुल यूरेनियम भंडार का 23 प्रतिशत है।
  • झारखण्ड के धालभूमगढ़,केरूआ, डुमरी आदि क्षेत्रों में यह खनिज पाया जाता है। 
  • यह सल्फाइड कॉपर के साथ मिला हुआ रहता है।
  • यह दो रूपों में पाया जाता है :-
    • पिचब्लैंड पेग्मेटाइट
    • यूरेनियम कम्पाउण्ड
  • यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड,UCIL
    • स्थापना – 4 अक्टूबर 1967 में
    • पूर्वी सिंहभूम के जादूगोड़ा में 
    • परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम
  • भारत में यूरेनियम का सर्वाधिक उत्पादन (लगभग 100% ) करनेवाला राज्य – झारखण्ड 
  • जादूगोड़ाFIRST Mine of uranium in india, discovered in 1951

URANIUM MINES IN JHARKHAND 

  • जादूगोड़ा
  • तुरामडीह
  • नरवापहाड़
  • भाटिन
  • बागजाता
  • सिंगरी डूंगरी
  • बना डूंगरी
  • बंदुहुरंग( यूरेनियम का पहला खुली खदान)

पूर्वी सिंहभूम

7.मोहुलडीह- गमहरिया में

सरायकेला-खरसावां 

  • अन्य खदान – गोराडीह , कन्या लुका , नीमडीह , नंदुप
    • पूर्वी सिंहभूम के ही सिंगरीडूंगरी – बनाडूंगरी –  झारखण्ड के सबसे बड़े यूरेनियम भंडार के रूप चिह्नित किया गया है, हालाँकि अभी यहाँ खनन प्रारंभ नहीं हुआ है।
  • इन खदानों से उत्पादित अयस्क को जादूगोड़ा और तुरामडीह  प्रसंस्करण संयंत्रों में संसाधित किया जाता है।
  • जादूगोड़ा खदान –  देश की पहली यूरेनियम खदान
    • खनन कार्य वर्ष 1967 में शुरू हुआ था।
  • देश की पहली ओपनकास्ट यूरेनियम खदान – बंधुहुरंग खदान
    • इसे जनवरी 2009 में कमीशन किया गया था।
  • झारखण्ड में सबसे बड़े यूरेनियम खान –  नरवापहाड़ और तुरामडीह 

 

4. थोरियम(Thorium) / (मोनाजाइट)

  • राँची ,धनबाद,पंचपरगना क्षेत्र में पाया जाता है।
  • यह एक आण्विक खनिज है।
  • झारखण्ड में इसका 1.64 प्रतिशत का भंडार मौजूद है।

6. इल्मेनाइट (ilmenite- Iron Titanium Oxide)

  • यह राँची में पाया जाता है।
  • यह एक आण्विक खनिज है।
  • प्रयोग – अंतरिक्ष यान तथा टाइटेनियम बनाने में होता है। 

7. बेरिलियम 

  • अयस्क – बेरिल(beryl) प्रस्तर से प्राप्त होता है।
  • प्राप्ति –  कोडरमा ,गिरिडीह 

8. जिरकन (zircon-zirconium)

  • प्राप्ति – राँची ,हजारीबाग 

8. Pyroxenite 

  • पूर्वी सिंहभूम – parsagoda ,gobradih

 

झारखण्ड राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड (JSMDC)

गठन – 

 

JSMDC द्वारा संचालित परियोजना

परियोजना का नाम

स्थान

कोयला

सिकनी कोयला परियोजना

सिकनी ,लातेहार

चूना पत्थर

बेंती-बंगड़ा चूना पत्थर परियोजना

पतरातू,राँची/रामगढ 

सेमरा-सलतुआ चूना पत्थर परियोजना 

डाल्टनगंज,  पलामू 

ग्रेफाइट

विश्रामपुर ग्रेफाइट परियोजना

विश्रामपुर,पलामू

ग्रेनाइट

ग्रेनाइट पालिशिंग उद्योग

तुपुदाना ,राँची

कायनाइट

कायनाइट परियोजना 

बहरागोड़ा ,पूर्वी सिंहभूम

स्टोन चिप्स

चंडुला सिमलगोड़ा स्टोन चिप्स परियोजना 

बरहरवा, साहेबगंज  

 

  • BalumathLatehar

Quartz Mine

  • Jamtara 
  • Devghar – devipur, madhupur, sarath 

झारखण्ड में खनिज भंडार की स्थिति 

Dept of Mines & Geology,GOVT OF JHARKHAND

खनिज 

भारत के कुल भंडार का हिस्सा

(मिलियन टन / (%) में)

प्रमुख जिले

कोयला

80356.2

(27.37%)

धनबाद, बोकारो, लातेहार, गिरिडीह, रामगढ़,चतरा, हजारीबाग, पाकुड़, दुमका 

लौह अयस्क (हेमेटाइट) 

4596.62

(25.70%)

पश्चिमी सिंहभूम

लौह अयस्क (मैग्नेटाइट) 

10.542

(0.10%)

पलामू, पूर्वी सिंहभूम 

एपेटाइट रॉक फॉस्फेट

पश्चिमी सिंहभूम

कायनाइट

पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम

चांदी अयस्क

राँची, पूर्वी सिंहभूम 

तांबा अयस्क

(18.48 %)

पूर्वी सिंहभूम 

कोबाल्ट

पूर्वी सिंहभूम 

ग्रेफाइट

पलामू 

एस्बेस्टस

पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां

फायरक्ले

धनबाद, बोकारो, हजारीबाग, पलामू, गिरिडीह, रामगढ़

क्वार्ट्ज व सिलिका

पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां,दुमका, हजारीबाग, देवघर, पलामू, साहेबगंज

बेंटोनाइट

साहेबगंज

बॉक्साइट

 

लोहरदगा, लातेहार, गुमला, गोड्डा, साहेबगंज 

चाइनाक्ले/केओलीन

लोहरदगा, राँची, दुमका, साहेबगंज, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम

फेल्सफार

दुमका, हजारीबाग, देवघर

गार्नेट

कोडरमा, चतरा 

बेराइट

राँची, पलामू, पूर्वी सिंहभूम 

सोपस्टोन

 

पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां,पलामू 

डोलोमाइट

पलामू(medininagar), गढ़वा

चूना-पत्थर

 

गढ़वा, पलामू, राँची, रामगढ़, हजारीबाग, बोकारो,

पश्चिमी सिंहभूम

क्रोमाइट

पश्चिमी सिंहभूम,

मैंगनीज अयस्क

पश्चिमी सिंहभूम,

निकेल

पूर्वी सिंहभूम

स्वर्ण अयस्क

 

राँची, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, पलामू

वर्मीक्यूलाइट

कोडरमा 

गेरूआ खनिज (Ochre) 

पश्चिमी सिंहभूम

अभ्रक

कोडरमा, गिरिडीह, हजारीबाग 

ग्रेनाइट

दुमका, जामताड़ा, कोडरमा, राँची, खूटी, सिमडेगा, पलामू,लातेहार, गढ़वा

जस्ता

zinc

संथाल परगना, हजारीबाग, पलामू, राँची एवं सिंहभूम

टिन

हजारीबाग, राँची, सिंहभूम, संथाल परगना तथा पलामू