Metals

 Metals Properties

  • ऐसे तत्व जो इलेक्ट्रॉन (इलेक्ट्रॉनों) को त्याग कर धनायन प्रदान करते हैं, धातु कहलाते हैं ।
  • आधुनिक आवर्त सारणी में सभी धातु तत्व बायीं ओर तथा मध्य में स्थित हैं।
    • आवर्त सारणी में जो तत्व बिल्कुल बायीं ओर है उनमें धातुओं के गुण सबसे अधिक पाये जाते हैं । 
  • प्रागैतिहासिक धातु : प्राचीन काल में सिर्फ 8 धातु ही ज्ञात थे । ये धातु थे— कार्बन (Carbon), सोना (Gold), चांदी (Silver), टिन (Tin), सीसा (Lead ), लोहा (Iron), पारा (Mercury) और एन्टिमनी (Antimony)। इन 8 धातुओं को प्रागैतिहासिक धातु की संज्ञा दी गई है। 
  • (i) धातुएं आघातवर्ध्य (Malleable) होते हैं ।
    • इनको हथौड़ों से पीटकर चादर (पत्तर) के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है।
    • सोना और चांदी सबसे अधिक आघातवर्ध्य होते हैं ।
  • (ii) धातुएं तन्य (Ductile ) होते है ।
    • लम्बा तार खींचा जा सकता है।
  • (iii) सभी धातुएं चमकीले (Metallic Lusture) होते हैं ।
  • (iv) धातुओं का घनत्व उच्च होता है ।
  • (v) सभी धातुएं ऊष्मा और विद्युत् के चालक होते हैं।
    • चांदी ऊष्मा और विद्युत् का सर्वोत्तम चालक है।
    • सीसा (Lead) की ऊष्मीय एवं विद्युतीय चालकता सबसे कम होती है । 
  • धातुएं विभिन्न प्रकार की अधातुओं जैसे— ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, क्लोरीन, सल्फर आदि से प्रतिक्रिया कर यौगिकों का निर्माण करती है ।
  • धातुएं अम्ल एवं क्षारों से भी अभिक्रिया करती हैं । 

 

सोडियम Sodium, Ne 

  • अत्यंत ही क्रियाशील तत्व होने के कारण यह मुक्त अवस्था में नहीं पाया जाता है ।
  • संयुक्त अवस्था में यह पर्याप्त मात्रा में क्लोराइड, नाइट्रेट, कार्बोनेट, बोरेट और सल्फेट के रूप में पाया जाता है ।
  • यह चाँदी के समान सफेद धातु है ।
  • यह मुलायम होता है एवं इसे चाकू से आसानी से काटा जा सकता है ।
  • इसका आपेक्षिक घनत्व 0.97 होता है।
  • पानी से हल्का होने के कारण यह पानी पर तैरने लगता है
  • यह विद्युत् का सुचालक होता है ।
  • सोडियम धातु बेंजीन तथा ईथर में विलेय होता है । 
  • सोडियम धातु का निष्कर्षण :
    • कास्टनर विधि द्वारा द्रवित सोडियम हाइड्रॉक्साइड के वैद्युत् अपघटन से किया जाता है।
    • डाउन विधि द्वारा भी पिघले हुए सोडियम क्लोराइड के वैद्युत् अपघटन से सोडियम धातु बड़े पैमाने पर प्राप्त की जाती है ।
  • साधारण ताप पर शुष्क हवा और शुष्क ऑक्सीजन का इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
  • आर्द्र हवा में सोडियम की सतह मलिन पड़ जाती है ।
  • सोडियम धातु को किरासन तेल के अन्दर डूबाकर रखा जाता है।
  • यह जल के साथ तीव्रता से प्रतिक्रिया कर सोडियम हाइड्रॉक्साइड एवं हाइड्रोजन गैस बनाता है ।
  • यह क्लोरीन गैस में जलाये जाने पर सोडियम क्लोराइड बनाता है ।
  • यह CO2 गैस में जलाये जाने पर सोडियम कार्बोनेट बनाता है ।
  • यह अमोनिया के साथ प्रतिक्रिया कर सोडामाइड बनाता है ।
  • यह ऐल्कोहॉल के साथ प्रतिक्रिया कर सोडियम ऐल्कॉक्साइड बनाता है एवं हाइड्रोजन गैस मुक्त होती है ।
  • यह अम्लों के साथ प्रतिक्रिया कर लवण बनाता है और हाइड्रोजन गैस मुक्त होती है ।
  • सोडियम के उपयोग :
    • (i) अवकारक के रूप में
    • (ii) सांश्लेषिक प्रतिक्रियाओं (synthetic reactions) में
    • (iii) सोडियम – लेड मिश्रधातु का उपयोग टेट्राइथाइल लेड नामक अपस्फोटनरोधी (Anti Knocking) यौगिक बनाने में होता है।
    • (iv) द्रवित सोडियम का उपयोग नाभिकीय रिएक्टरों में ठंडक उत्पन्न करने में होता है ।

सोडियम के यौगिक : 

सोडियम हाइड्रॉक्साइड ( Sodium Hydroxide ) : (NaOH)

  • सोडियम हाइड्रॉक्साइड  को कास्टिक सोडा (Caustic Soda) या दाहक सोडा कहा जाता है ।
  • इसका उपयोग पेट्रोलियम को शुद्ध करने में, साबुन बनाने में, कागज, सूती कपड़ों में चमक पैदा करने में, कृत्रिम रेशम के निर्माण में, रंग तथा रेयॉन (Rayon) बनाने में, प्रयोगशाला में प्रतिकारक के रूप में तथा सोडियम धातु के निर्माण में होता है । 

सोडियम कार्बोनेट ( Sodium Carbonate): (Na2CO3.10H2O)

  • सोडियम कार्बोनेट  को धोने वाला सोडा या वाशिंग सोडा भी कहा जाता है ।
  • वाशिंग सोडा का उत्पादन लेब्लांक विधि, सौल्वे विधि ( अमोनिया – सोडा विधि) तथा वैद्युत् विधि द्वारा किया जाता है ।
  • सोडियम कार्बोनेट का उपयोग जल का खारापन दूर करने में, पेट्रोलियम को शुद्ध करने में, प्रयोगशाला में प्रतिकारक के रूप में तथा शीशा, साबुन, कागज, कास्टिक सोडा आदि के उत्पादन में होता है ।
  • वाशिंग सोडा का जलीय विलयन क्षारीय होता है ।
  • क्रिस्टलीय अवस्था में वाशिंग सोडा में क्रिस्टलन जल होता है।
  • वाशिंग सोडा में अपमार्जक का गुण होता है । 

सोडियम बाइकार्बोनेट ( Sodium Bicarbonate) : (NaHCO3)

  • सोडियम बाइकार्बोनेट का दूसरा नाम बेकिंग सोडा (Baking Soda) है।
  • सोडियम बाइकार्बोनेट  को खाने वाला सोडा भी कहते हैं।
  • आटा में खाने वाला सोडा मिलाने पर बनी रोटी अच्छी तरह फुलती है, क्योंकि इस दौरान कार्बन डाइऑक्साइड गैस (CO2 ) निकलती है।
  • सोडियम बाइकार्बोनेट का उपयोग औषधि के रूप में, पेट की अम्लता (Acidity) दूर करने में, बेकिंग पाउडर (Baking Powder) बनाने में तथा अग्निशामक यंत्रों में होता है । 

ग्लोबर साल्ट (Glouber’s Salt) : ( Na2SO4 . 10H2O)

  • सोडियम सल्फेट को ग्लोबर सोल्ट कहा जाता है ।
  • यह सोडियम हाइड्रॉक्साइड या सोडियम कार्बोनेट पर सल्फ्यूरिक अम्ल की प्रतिक्रिया से तैयार किया जाता है ।
  • यह एक रंगहीन तथा रवादार ठोस पदार्थ है ।
  • इसका उपयोग शीशा बनाने, कागज बनाने, दवा बनाने, सोडियम सल्फाइड के निर्माण आदि में होता है । 

सोडियम क्लोराइड (Sodium Chloride) : (NaCl)

  • सोडियम क्लोराइड  को साधारण नमक या (Common Salt) कहा जाता है । स
  • मुद्री जल के वाष्पीकरण प्रक्रिया से नमक का उत्पादन होता है।
  • सोडियम क्लोरोइड को बर्फ के साथ मिलाकर हिम मिश्रण ( Freezing Mixture) बनाया जाता है।
  • सोडियम क्लोराइड मानव के भोजन का आवश्यक अंग है ।
  • समुद्री जल में कुल घुलनशील ठोस का 75% सोडियम क्लोराइड होता है।
  • डिहाइड्रेशन के समय शरीर में सोडियम क्लोराइड कम हो जाता है।
  • नमक को खुली हवा में छोड़ देने पर यह हवा से नमी को सोख लेता है।
    • इसका कारण नमक में अशुद्धि के रूप में मैग्नीशियम क्लोराइड (MgCl2) की उपस्थिति है, जो कि प्रस्वेदी (Deliquence) होता है । 

सोडियम परऑक्साइड (Sodium Peroxide ) :

  • यह हल्के पीले रंग का चूर्ण होता है ।
  • खुली हवा पर छोड़ देने पर हाइड्रॉक्साइड और कार्बोनेट की तह जम जाने के कारण यह सफेद हो जाता है।
  • इसका उपयोग हाइड्रोजन पेरॉक्साइड के निर्माण में, रंगाई के काम में, प्रयोगशाला में ऑक्सीकारक के रूप में, रेशम, ऊन आदि के विरंजन (Bleaching) में होता है।
  • सोडियम परऑक्साइड का उपयोग पनडुब्बी, जहाजों तथा अस्पताल आदि की बंद हवा को शुद्ध करने में भी होता है । 

सोडियम नाइड्रेट ( Sodium Nitrate) :

  • सोडियम नाइट्रेट को चिली साल्टपीटर कहते हैं ।
  • यह चीली तथा पेरू में काफी मात्रा में मिलता है ।
  • इसका उपयोग खाद के रूप में तथा नाइट्रिक अम्ल के निर्माण में होता है । 

सोडियम थायोसल्फेट ( Sodium Thiosulphate) :

  • इसका अणुसूत्र Na2S2O3.5H2O होता है ।
  • इसे हाइपो (HYPO) के नाम से भी जाना जाता है।
  • इसका उपयोग फोटोग्राफी (Photography) में निगेटिव और पॉजिटिव का स्थायीकरण करने में होता है ।
    • यह अनअपघटित सिल्वर ब्रोमाइड को दूर कर देता है ।
  • इसका उपयोग प्रतिक्लोर (Antichlor ) के रूप में विरंजित (Bleached) वस्त्रों से क्लोरीन दूर करने में होता है ।
  • इसका उपयोग सिल्वर (Ag) और गोल्ड (Au) के निष्कर्षण में भी होता है । 

बोरेक्स या सुहागा (Borex) :

  • सोडियम टेट्राबोरेट डेका हाइड्रेट (Na2B4O7.10H2O) को सुहागा या बोरेक्स कहते हैं ।
  • यह सफेद क्रिस्टलीय ठोस है ।
  • यह जल में विलेय है ।
  • इसके मुख्य उपयोग हैं—
    • (i) काँच, इनेमिल, साबुन व मोमबत्ती उद्योग में
    • (ii) कागज व सिरेमिक की वस्तुओं पर ग्लेज करने में
    • (iii) जल को मृदु करने में
    • (iv) चमड़ा उद्योग में खोल को साफ करने व चमड़े की रंगाई में 

माइक्रोकॉस्मिक लवण (Microcosmic Salt) :

  • सोडियम अमोनियम हाइड्रोजन फॉस्फेट को माइक्रोकॉस्मिक लवण कहते हैं । 

केल्गन (Calgen) : [Na3 (PO3)6]

  • सोडियम हेक्सा मेटाफॉस्फेट को केल्गन कहते हैं ।
  • इसका प्रयोग जल की कठोरता दूर करने में किया जाता है। 
  • नेल्सन सेल (Nelson’s Cell) का उपयोग सोडियम हाइड्रॉक्साइड के निर्माण में किया जाता है । 

 

Magnesium (Mg)

  • मैग्नीशियम सल्फेट के रूप में मैग्नीशियम झरने में तथा मैग्नीशियम क्लोराइड के रूप में समुद्री जल में पाया जाता है।
  • पौधे को हरा रंग देने वाले कार्बनिक यौगिक क्लोरोफिल (Chlorophyll ) में भी मैग्नीशियम उपस्थित रहता है । 
  • मैग्नीशियम का निष्कर्षण:
    • कार्नालाइट (KCl. MgCl2.6H2O) अयस्क से किया जाता है । 
  • मैग्नीशियम चाँदी की तरह उजली एवं चमकीली धातु है । 
  • तनु अम्लों के साथ प्रतिक्रिया कर यह हाइड्रोजन गैस बनाता है ।
  • यह क्षार से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं करती है ।
  • तनु नाइट्रिक अम्ल के साथ यह मैग्नीशियम नाइट्रेट तथा अमोनियम नाइट्रेट बनाता है ।
  • शुष्क ईथर की उपस्थिति में यह इथाइल आयोडाइड या ब्रोमाइड से प्रतिक्रिया करके इथाइल मैग्नीशियम आयोडाइड या ब्रोमाइड बनाता है, जिसे ग्रिगनार्ड प्रतिकारक (Grignard’s Reagent) कहते हैं ।
  • मैग्नीशियम नाइट्रोजन के साथ प्रतिक्रिया करके मैग्नीशियम नाइट्राइड बनाता है । 
  • मैग्नीशियम के उपयोग :
    • (i) फ्लैश लाइट रिबन (Flash Light Ribbon ) बनाने में
    • (ii) फोटोग्राफी एवं आतिशबाजी में
    • (iii) ग्रिगनार्ड प्रतिकारक बनाने में
    • (iv) मिश्रधातुओं के निर्माण में 

 

मैग्नीशियम की मिश्रधातुएँ 

मैग्नेलियम Magnelium  Mg-2%, A1 – 95% तथा Cu Fe – 2-3%
ड्युरालुमिन Duralumin Al- 95%, Cu-4% Mg- 0.5%, Mn -0.5
इलेक्ट्रॉन Elektron Mg-95%, Zn-4.5%, Cu-0.5%

 

  • मैग्नेलियम मिश्र धातु काफी हल्का होता है ।
    • इस कारण इसका उपयोग हवाई जहाज, तराजू आदि के निर्माण में होता है । 
  • ड्यूरालुमिन का उपयोग भी हवाई जहाज के निर्माण में होता है।
    • प्रेशर कुकर (Pressure Cooker) भी ड्यूरालुमिन से बनाये जाते हैं । 
  • इलेक्ट्रॉन का उपयोग भी हवाई जहाज एवं मोटरगाड़ी के ढांचा बनाने में होता है ।
  • फ्लैश बल्बों में नाइट्रोजन गैस के वायुमंडल में मैग्नीशियम का तार रखा रहता है।

मैग्नीशियम के यौगिक : 

मैग्नीशिया (Magnesia):

  • मैग्नीशियम ऑक्साइड को मैग्नीशिया कहा जाता है ।
  • यह हल्के श्वेत रंग का चूर्ण होता है ।
  • यह जल में बहुत कम घुलनशील है ।
  • यह प्रतिदीप्तिशील प्रकाश उत्पन्न करता है ।
  • चूँकि यह बहुत ऊँचे ताप पर द्रवित होता है । अतः भट्ठों में इसका अस्तर (Lining) लगाया जाता है । 

मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (Magnesium Hydroxide ) :

  • यह श्वेत रंग का पदार्थ है जो जल में अत्यन्त अल्प घुलनशील है ।
  • यह एक क्षार है ।
  • शीरा (Molasses) से चीनी के निष्कर्षण में मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड का उपयोग होता है ।
  • इसे मिल्क ऑफ मैग्नीशिया भी कहते हैं ।
  • इसका उपयोग दवा के रूप में पेट की अम्लीयता दूर करने में भी होता है । 

मैग्नीशियम सल्फेट (Magnesium Sulphate):

  • मैग्नेशियम सल्फेट प्रकृति में इप्सोमाइट के रूप में इप्सम के गर्म झरनों में पाया जाता है ।
  • यह रंगहीन रवेदार ठोस प्रदार्थ है ।
  • इसका उपयोग कपास उद्योग तथा साबुन एवं पेन्ट उद्योग में होता है ।
  • ग्रीलो विधि से सल्फ्यूरिक अम्ल बनाने में प्लैटिनीकृत MgSO4 का व्यवहार उत्प्रेरक के रूप में होता है।
  • मैग्नीशियम सल्फेट का उपयोग दस्तावर (Purgative) के रूप में होता है ।
  • मैग्नीशियम सल्फेट या इप्सम लवण एक deliquescent यौगिक है । 

मैग्नीशियम कार्बोनेट (Magnesium Carbonate) :

  • यह मैग्नेसाइट या डोलोमाइट के रूप में प्रकृति में पाया जाता है ।
  • यह एक श्वेत ठोस पदार्थ है जो जल में घुलनशील है ।
  • मैग्नीशियम कार्बोनेट का उपयोग छपाई की स्याही, दंत मंजन, चेहरे पर लगाने वाले पाउडर आदि बनाने में होता है ।
  • मैग्नीशियम एल्वा की तरह यह दवा के रूप में उपयोग होता है ।
    • यह पेट की अम्लीयता – दूर करने के काम में आता है । 

मैग्नीशियम एल्वा (Magnesium Alva ):

  • मैग्नीशियम एल्वा [Mg(OH)2.MgCO3. 3H2O] का प्रयोग पेट की अम्लता दूर करने में किया जाता है ।
  • यह एक एन्टाएसिड है । 

सोरेल सीमेण्ट (Sorel Cement) : MgCl2.5MgO.xH2O को सोरेल सीमेण्ट कहते हैं । 

ऐलुमिनियम, Aluminium Al 

  • यह बॉक्साइट, कोरंडम, डायस्पोर, फेल्स्पार, अबरख, काओलीन, क्रायोलाइट आदि रूपों में मिलता है ।
  • ऐलुमिनियम भू-पर्पटी में सबसे अधिक पाया जाने वाला धातु है।
  • ऑक्सीजन और सिलिकन के बाद सबसे अधिक पाया जाने वाला यह तीसरा तत्व है।
  • ऐलुमिनियम का मुख्य अयस्क :  बॉक्साइट (Bauxite)
    •  बॉक्साइट (Bauxite) अयस्क से विद्युत् अपघटन विधि द्वारा किया जाता है।
    • बॉक्साइट का रासायनिक नाम हाइड्रेटेड एलुमिना है।
    • बॉक्साइट के वैद्युत अपघटन में क्रायोलाइट का उपयोग बॉक्साइट को कम ताप पर घुलाने हेतु किया जाता है । 
  • यह चाँदी के समान चमकीली धातु है ।
  • ऐलुमिनियम के उपयोग :
    • (i) ऐलुमिनियम तथा इसकी मिश्रधातु वायुयान, मोटर आदि बनाने में व्यवहत होती है।
    • (ii) यह घरेलू बर्तन बनाने में प्रयुक्त होता है।
    • (iii) इसके तार विद्युत् संचालन में प्रयुक्त होते हैं।
    • (iv) लोहा (Fe), मैंगनीज (Mn) आदि धातुओं के ऑक्साइडों को धातु में अवकृत करने में यह काम आता है।
    • (v) इसके पत्तर मिठाई, सिगरेट आदि लपेटने के काम आते हैं।
    • (vi) थर्मिट विधि द्वारा धातु के कुछ ऑक्साइडों को धातु में अवकृत करने में यह प्रयुक्त होता है ।

ऐलुमिनियम की मिश्रधातुएँ 

ऐलुमिनियम ब्रांज  Cu (90%), Al (10%)  बरतन, सिक्का आदि निर्माण में
मैग्नेलियम  Mg (2%) A1 (95 – 96%), Cu-Fe (2-3%)  वायुयान निर्माण में 
निकेलॉय  A1 (95%), Cu (4%) Ni (1%) वायुयान निर्माण में 
ड्यूरेबुमिन  Cu (4%) Mn(0.5%), Mg(0.5%), A1 (95%)  प्रेशर कुकर वायुयान आदि निर्माण में 

 

ऐलुमिनियम क्लोराइड (Aluminium Chloride) :

  • इसका उपयोग उत्प्रेरक के रूप में फ्रिडल क्राफ्ट प्रतिक्रिया में व्यापक तौर पर होता है।
  • यह गैसोलिन (Gasoline) के उत्पादन में भी उत्प्रेरक के रूप में प्रयुक्त होता है।
  • पेट्रोलियम के भंजन में अनार्द्र ऐलुमिनियम क्लोराइड का प्रयोग होता है । 

ऐलुमिना (Alumina ) :

  • यह प्रकृति में बॉक्साइट, कोरंडम, नीलम आदि कई रूपों में पाया जाता है।
  • यह एक उभयधर्मी ऑक्साइड (Amphoteric oxide) है।
  • अतः यह अम्ल और क्षार दोनों से प्रतिक्रिया करता है।
  • इसका उपयोग कृत्रिम रत्न बनाने में, ऐलुमिनियम धातु बनाने में, ऐलुमिनियम के अन्य लवणों के निर्माण में, उत्प्रेरक के रूप में तथा भट्टियों में अस्तर लगाने के काम में होता है। 

पोटाश एलम (Potash Alum) :

  • पोटाश एलम का रासायनिक नाम पोटैशियम ऐलुमिनियम सल्फेट होता है।
  • इसका उपयोग रक्त प्रवाह रोकने में, कागज एवं चमड़ा उद्योग में, जल को मृदु बनाने आदि में होता है । 

ऐलुमिनियम कार्बाइड (Aluminium Carbide ) : (AI4C3)

  • ऐलुमिनियम कार्बाइड को मिथेनाइड (Methanide) कहते हैं ।
  • ऐलुमिनियम कार्बाइड पर जल की प्रतिक्रिया से मिथेन गैस बनती है । 

ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड (Aluminium Hydroxide ) : [AI (OH)3]

  • कपड़ों को अदाहय बनाने तथा जलरोधी कपड़े तैयार करने में ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड का प्रयोग किया जाता है। 

ऐलुमिनियम सल्फेट ( Aluminium Sulphate) :

  • ऐलुमिनियम सल्फेट को हेयर साल्ट (Hair Salt) कहते हैं ।
  • ऐलुमिनियम सल्फेट का प्रयोग कपड़ों की छपाई और रंगाई में रंगबंधक (Mordant) के रूप में किया जाता है।
  • इसका उपयोग फिटकरी बनाने में भी होता है। 

Calcium (Ca)

  • कैल्सियम के यौगिक पृथ्वी की परत में 3.5% मात्रा में उपस्थित है ।
  • कैल्सियम हड्डियों, अण्डे के छिलके एवं शंख ( मोलस्का समुदाय का प्राणी) का मुख्य अवयव है ।
  • दूध (Milk) में सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला तत्व कैल्सियम है । 
  • कैल्सियम का निष्कर्षण:
    • `कैल्सियम धातु का निष्कर्षण द्रवित कैल्सियम क्लोराइड एवं कैल्सियम फ्लोराइड मिश्रण के वैद्युत अपघटन से किया जाता है।
    • कैल्सियम फ्लोराइड कैल्सियम क्लोराइड को विद्युत् अपघट्य बनाता है । 
  • कैल्सियम चाँदी की तरह उजली धातु है । 
  • अम्लों से प्रतिक्रिया कर यह हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करता है ।
  • यह जल को अपघटित कर हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करता है ।
  • क्षारों के साथ यह कोई प्रतिक्रिया नहीं करता है।
  • कैल्सियम के उपयोग :
    • (i) ऐल्कोहॉल में सूक्ष्म मात्रा में उपस्थित जल को हटाने में
    • (ii) धातुओं के निष्कर्षण में उनमें सूक्ष्म मात्रा में उपस्थित नाइट्रोजन, सल्फर, ऑक्सीजन आदि को हटाने में

कैल्सियम के यौगिक : 

कैल्सियम ऑक्साइड (Calcium Oxide ) :

  • कैल्सियम ऑक्साइड को क्विक लाइम (Quick Lime) कहा जाता है ।
  • यह जल के साथ तीव्र गति से प्रतिक्रिया करता है तथा कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड में परिणत हो जाता है ।
  • इसका उपयोग शुष्ककारक के रूप में, निर्माण कार्यों में गारे के रूप में, लाइम प्रकाश उत्पन्न करने तथा अनेक रसायनों के निर्माण में होता है । 

कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड (Calcium Hydroxide ) :

  • कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड को बुझा हुआ चूना कहते हैं।
  • यह एक उजला चूर्ण है, जो जल में बहुत कम घुलनशील होता है।
  • शुष्क बुझे हुए चूने के ऊपर पर क्लोरीन गैस प्रवाहित करने पर ब्लीचिंग पाउडर प्राप्त होता है ।
  • इसका उपयोग कोल गैस को शुद्ध करने में, शीशा, ब्लीचिंग पाउडर, कास्टिक सोडा, गारा, सीमेन्ट इत्यादि बनाने में तथा मकानों में सफेदी करने के काम में होता है । 

कैल्सियम क्लोराइड (Calcium Chloride) :

  • कैल्सियम क्लोराइड थोड़ी मात्रा में समुद्री जल में पाया जाता है।
  • यह जल एवं ऐल्कोहॉल में घुलनशील होता है ।
  • यह deliquescent होता है।
  • कैल्सियम क्लोराइड का उपयोग जलशोषक पदार्थ या Dehydrating Agent के रूप में होता है।
  • इसका उपयोग हिम मिश्रण में भी होता है । 

विरंजक चूर्ण ( Bleaching Powder) :

  • यह कैल्सियम का ऑक्सीक्लोराइड है ।
  • औद्योगिक पैमाने पर विरंजक चूर्ण का उत्पादन हेसेन क्लेवर विधि (Hasenclever’s Process) द्वारा किया जाता है ।
  • यह ठोस बुझे हुए चूने में क्लोरीन गैस प्रवाहित कर बनाया जाता है ।
  • यह सफेद चूर्ण होता है, जिससे क्लोरीन जैसी गंध निकलती रहती है ।
  • इसका उपयोग कागज एवं कपड़ों के विरंजन में होता है ।
  • यह कीटाणुनाशक की तरह भी काम में लाया जाता है।
  • अतः इसका उपयोग जल को संक्रमणरहित बनाने हेतु भी किया जाता है । 

जिप्सम (Gypsum):

  • कैल्सियम सल्फेट (CaSO4.2H2O ) को जिप्सम कहा जाता है ।
  • 120°C तक गर्म करने पर यह प्लास्टर ऑफ पेरिस में बदल जाता है ।
  • जिप्सम का उपयोग पेरिस प्लास्टर तथा अमोनियम सल्फेट खाद बनाने में होता है । 

प्लास्टर ऑफ पेरिस (Plaster of Paris) :

  • अर्द्धजलयोजित कैल्सियम सल्फेट को सामान्यतः पेरिस प्लास्टर कहते हैं ।
  • यह एक सफेद चूर्ण है ।
  • यह जल के साथ तीव्रता से संयोग करता है और प्रतिक्रिया के फलस्वरूप ताप उत्पन्न होता है ।
  • पेरिस प्लास्टर का उपयोग शल्य क्रिया में पट्टियों के रूप में होता है ।
  • पेरिस प्लास्टर से मूर्तियाँ एवं मूर्तियों के साँचे बनाये जाते हैं । 

सपुरफॉस्फेट ऑफ लाइम (Superphosphate of Lime ) :

  • मोनो कैल्सियम हाइड्रोजन फॉस्फेट तथा सल्फेट के मिश्रण को सपुरफॉस्फेट कहते हैं ।
  • इसे फॉस्फोराइट नामक खनिज पदार्थ तथा जानवरों की हड्डियों से बनाया जाता है ।
  • यह जल में घुलनशील होता है ।
    • इसे पौधे आसानी से ग्रहण करते हैं । 
    • यह एक  उर्वरक है। 

कैल्सियम कार्बाइड (Calcium Carbide ) :

  • इसे नाइट्रोजन गैस की उपस्थिति में 1200°C पर गर्म करने पर कैल्सियम सायनामाइड बनता है ।
  • कैल्सियम कार्बाइड पर जल की प्रतिक्रिया से एसीटिलीन गैस उत्पन्न होती है । 

नाइट्रोलिम (Nitrolim) :

  • कैल्सियम सायनामाइड को नाइट्रोलिम कहा जाता है ।
  • इसका उपयोग खाद के रूप में होता है । 

हाइड्रोलिथ (Hydrolith) :

  • कैल्सियम हाइड्राइड को हाइड्रोलिथ कहते हैं ।
  • कैल्सियम धातु को हाइड्रोजन के साथ गर्म करने पर कैल्सियम हाइड्राइड या हाइड्रोलिथ बनता है । 

कैल्सियम कार्बोनेट (Calcium Carbonate) : (CaCO3 )

  • यह  चूने के पत्थर, संगमरमर, खड़िया आदि  में  पाया जाता है।
  • मैग्नीशियम कार्बोनेट के साथ यह डोलोमाइट के रूप में भी पाया जाता है ।
  • यह जल में अघुलनशील होता है ।
  • कैल्सियम कार्बोनेट  का प्रयोग दंत मंजन, पाउडर तथा पेस्ट बनाने में किया जाता है ।
  • यह दीवारों पर सफेदी करने के काम आता है।
  • इसका उपयोग सीमेण्ट उद्योग में भी होता है । 

कैल्सियम फॉस्फेट (Calcium Phosphate) :

  • कैल्सियम फॉस्फेट [Ca3(PO4)2] का प्रयोग टूथ पेस्ट (Tooth Paste) बनाने में होता है । 

 

मैंगनीज (Manganese, Mn)

  • मैंगनीज का निष्कर्षण : पाइरोलुसाइट (Pyrolusite)  अयस्क से किया जाता है ।

पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO4) :

  • इसे लाल दवा के नाम से जाना जाता है
  • इसका उत्पादन मैंगनीज के अयस्क पाइरोलुसाइट से होता है।
  • यह जल में साधारण विलेय है तथा गुलाबी रंग का विलयन बनाता है ।
  • इसे प्रबलता से गर्म करने पर पोटैशियम मैंगनेट एवं मैंगनीज डाइऑक्साइड बनता है।
  • ऊनी, रेशमी एवं सूती कपड़ों के विरंजन तथा तेलों को रंगहीन बनाने में भी इसका उपयोग होता है ।
  • यह जल को कीटाणुरहित करता है

मैंगनीज डाइऑक्साइड (Manganese Dioxide ) :

  • शुष्क सेलों में मैंगनीज डाइऑक्साइड (MnO2) विध्रुवक का कार्य करता है।
  •  जीवित मानव शरीर में मैंगनीज सबसे कम पाया जाने वाला तत्व है।

लोहा Iron, Fe 

  • प्रकृति में लोहा मुक्तावस्था में नहीं पाया जाता है ।
  • हरी सब्जियों में यह प्रचुर मात्रा में पाया जाता है ।
  • यह मानव रक्त के हीमोग्लोबीन में भी उपस्थित रहता है।
  • लोहे का निष्कर्षण : लोहे के निष्कर्षण में वात भट्टी (Blast Furnace) का प्रयोग किया जाता है।
    • लोहा का निष्कर्षण लाल हेमाटाइट (Red Haematite) अयस्क से किया जाता है।
    • मैग्नेटाइट लोहे का चुम्बकीय अयस्क है।

लोहे की तीन किस्में : 

ढलवां लोहा (Cast Iron) :

  • इसमें कार्बन की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक (2.5% ) होती है ।
  • यह कठोर और भंगुर होता है।
  • इसमें फॉस्फोरस (P), सिलिकान (Si) और मैंगनीज (Mn) आदि अशुद्धियों के रूप में उपस्थित रहता है।
  • यह सबसे निम्न कोटि का लोहा होता है।
  • यह भी दो प्रकार का होता है – सफेद ढलवां लोहा (White Cast Iron) तथा भूरा ढलवां लोहा (Brown Cast Iron) |

पिटवां लोहा (Wrought Iron)

  • इसे ढलवां लोहा से प्राप्त किया जाता है।
  • यह अपेक्षाकृत शुद्ध लोहा होता है। 
  • इससे चादरें (Sheets) एवं तार (Wires ) बनाये जा सकते हैं।
  • इसमें कार्बन की मात्रा सबसे कम (0.12-0.25%) होती है । 

इस्पात (Steel):

  • यह लोहा और कार्बन का एक (Alloy) है।
  • इसमें कार्बन की मात्रा ढलवां लोहा से कम (0.25 से 1.5%) होता है।
  • यह चार प्रकार का होता है-
    • (a) मृदुल इस्पात (Mild Steel):
      • इसमें कार्बन की मात्रा 0.1% रहती है।
      • यह आघातवर्धनीय  और तन्य होता है।
      • इससे चादरें (Sheets) तथा तार (Wires) बनाये जाते हैं।
    • (b) मध्य इस्पात (Medium Steel) :
      • इसमें कार्बन की मात्रा 0.5% होती है।
      • यह अपेक्षाकृत कटोर होता है।
      • इसका उपयोग रेल लाइन, पुल, जहाज आदि के निर्माण में होता है ।
    • (c) कटोर इस्पात (Hard Steel) :
      • इसमें कार्बन की मात्रा लगभग 1.5% होती है।
      • इससे औजार (tools) बनाये जाते हैं।
    • (d) मिश्र इस्पात (Alloy Steel)
      • इसके अंतर्गत स्टेनलेस इस्पात, क्रोम इस्पात, मैंगनीज इस्पात, टंगस्टन इस्पात, निकेल इस्पात आदि आते हैं।
      • साधारण लौह इस्पात में लोहा और कार्बन रहता है। यदि इसमें कोई अन्य धातु (Cr ,Mn, Ni) मिला दी जाए, तो उसे मिश्र इस्पात (Alloy Steel) कहते हैं।
      • इसका सबसे अच्छा उदाहरण स्टेनलेस इस्पात (Stainless steel) है। स्टेनलेस स्टील पर वायु, जल आदि के प्रभाव से जंग नहीं लगता है ।

इस्पात की मिश्रधातुएँ  : 

  1. स्टेनलेस इस्पात (Stainless Steel) : इसमें 15% क्रोमियम रहता है। यह कठोर होता है, तथा इसमें जंग भी नहीं लगता है। इसका उपयोग बर्तन, ब्लेड, वाल्व आदि बनाने में होता है। 
  2. मैगनीज इस्पात (Manganese Steel) : इसमें लोहा के साथ 6 से 15% मैंगनीज होता है । यह बहुत कठोर एवं कम घिसने वाला होता है। इससे रेल की पटरियाँ, स्विच एवं काटने की मशीनें बनायी जाती हैं। 
  3. निकेल इस्पात (Nickel Steel) : इसमें 3 से 4% निकेल होता है । यह कठोर एवं लचीला होता है, तथा इसमें जंग नहीं लगता है । इससे धुरे, बिजली के तार, हवाई जहाज एवं मोटर के कल-पुर्जे बनाये जाते हैं । 
  4. इनवार (Invar) : इसमें निकेल 36% होता है । इसमें प्रसार गुण नहीं होता है । इससे घड़ी के पेण्डुलम की छड़ें एवं स्केल ( पैमाना ) बनाये जाते हैं । 
  5. टंगस्टन स्वील (Tungsten Steel) : इसमें टंगस्टन (W) 10 से 20% रहता है । यह बहुत ही कठोर एवं मजबूत होता है। इससे स्प्रिंग एवं चुम्बक, काटने के औजार तथा तेजी से चलने वाले औजार बनाये जाते हैं । 
  6. क्रोम – वेनेडियम स्टील (Chrome Venadium Steel) : इसमें क्रोमियम 0.1 से 1% एवं वेनेडियम 0.15 से 0.5% रहता है । इसमें अधिक भार सहने की शक्ति होती है। इससे बियरिंग, .गियर्स (Gears) एवं धुरे बनाये जाते हैं । 
  7. क्रोम इस्पात (Chrome Steel) : इसमें क्रोमियम 5% रहता है । यह बहुत ही कठोर होता है । इससे तिजोरी (Safe Vaults), बॉल-बियरिंग (Ball – Bearings) तथा पत्थर काटने वाले मशीनों के दांत (Jaws of Stone Crushing Machines) बनाये जाते हैं । 

 

  • लोहा आर्द्र हवा के संपर्क में आने पर इस पर जंग लगता है ।
  • लाल तप्त लोहे पर जलवाष्प प्रवाहित करने पर फेरसोफेरिक ऑक्साइड और हाइड्रोजन गैस बनता है ।
  • यह हैलोजन से प्रतिक्रिया कर हैलाइड तथा सल्फर के साथ गर्म करने पर सल्फाइड बनाता है ।
  • यह क्षारों के साथ कोई प्रतिक्रिया नहीं करता है ।
  • यह तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ प्रतिक्रिया कर फेरस क्लोराइड एवं हाइड्रोजन गैस बनाता है ।
  • यह तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ प्रतिक्रिया कर फेरस सल्फेट एवं हाइड्रोजन गैस बनाता है । 

 

लोहे पर जंग लगना ( Rusting of Iron) :

  • लोहे को आर्द्र वायु में छोड़ देने पर उसके ऊपर लाल रंग की एक ढीली परत बैठ जाती है, जिसे जंग (Rust) कहते हैं ।
  • इस क्रिया को जंग लगना कहते हैं । लोहे पर यह जंग हवा की नमी और ऑक्सीजन के कारण लगता है ।
  • लोहे को निम्नलिखित विधियों द्वारा जंग लगने से बचाया जा सकता है— 
    • लोहे के ऊपर पीच, अलकतरा या ऐलुमिनियम पेण्ट लगा देने पर 
    • लोहे को लाल तप्त कर उसके ऊपर जलवाष्प प्रवाहित करने से Fe3O4 की परत बैठ जाती है, जो लोहे को जंग लगने से बचाता है । 
    • लोहे को जस्तीकृत (Galvanised) करके 
      • लोहे के गैल्वेनाइज्ड (जस्तीकृत) चादर पर जस्ते की परत चढ़ी रहती है ।
  • लोहे में जंग लगना रासायनिक परिवर्तन का उदाहरण है। 
  • लोहे पर जंग लगने से लोहे का भार बढ़ जाता है।
    • लोहे में जंग लगने में बना पदार्थ फेरसोफेरिक ऑक्साइड होता है ।
    • यह भूरी परत के रूप में लोहे पर जम जाती है।  

इस्पात का तप्तीकरण (Tempering of Steel) :

  • इस्पात को लाल तप्त कर जल या तेल में डुबाकर शीघ्र ही ठंडा करने से इस्पात अत्यंत कठोर एवं भंगुर हो जाता है ।
  • इस क्रिया से इस्पात  अत्यंत कठोर एवं भंगुर हो जाता है । यह क्रिया इस्पात का कठोरीकरण कहलाता है एवं ऐसा इस्पात द्रुत शीतलित इस्पात ( Quenched Steel) कहलाता है ।
  • द्रुत शीतलित इस्पात को पुनः गर्म करके धीरे-धीरे ठंडा करने पर वह लचीला एवं कम भंगुर हो जाता है । इस क्रिया को इस्पात का ऐनीलीकरण (Annealing of Steel) कहते हैं ।
  • इस्पात का कठोरीकरण करने के पश्चात् ऐनीलीकरण की क्रियाओं को सम्मिलित रूप से इस्पात का तप्तीकरण कहते हैं। 

लोहे के यौगिक 

फेरस सल्फेट (Ferrous Sulphate) :

  • फेरस सल्फेट (FeSO4. 7H2O) को हरा कसीस या Green Vitriol कहा जाता है । 
  • इसका उपयोग स्याही बनाने एवं मोहर लवण (Mohr’s Salt) बनाने एवं रंग उद्योग में होता है ।  

फेरिक क्लोराइड (Ferric Chloride) :

  • यह जल में घुलनशील होता है।
  • इसका उपयोग कटे स्थान से खून का बहना रोकने के लिए किया जाता है, क्योंकि यह खून को आतंचित (Coagulate) कर थक्का बनाता है।
  • इसका उपयोग दवा के रूप में भी होता है। 

आयरन सल्फाइड (Ferrous Sulphide) : 

  • आयरन सल्फाइड को झूठा सोना या बेवकूफों का सोना कहा जाता है ।
  • इसका उपयोग किष्प के उपकरण (Kipp’s Apparatus) द्वारा प्रयोगशाला में हाइड्रोजन सल्फाइड गैस बनाने में होता है । 

मोहर लवण (Mohr’s Salt) :

  • FeSO4, (NH4 )2 SO4. 6H2O को मोहर लवण कहा जाता है ।
  • यह  जल में विलेय तथा ऐल्कोहॉल में अविलेय होता है ।
  • इसका उपयोग आयतनी विश्लेषण में, नीली स्याही बनाने में, रंगाई में, रंगचापक के रूप में, चमड़ा रंगने में, कृषि में हानिकारक कीड़ों को मारने में तथा प्रयोगशाला में अवकारक के रूप में होता है ।
  • इसका उपयोग रंगीन क्षार मूलकों के परीक्षण में भी होता है ।  
  • शरीर में लोहे की कमी से एनीमिया तथा अधिकता से लौहमयता (Siderosis) रोग होता है।  
  • बेसेमर प्रक्रम से वृहत् मात्रा में Pig Iron से इस्पात का उत्पादन होता है। इसका आविष्कार 1855 ई० में हेनरी बेसेमर ने किया । 
  • रेजर बनाने में अधिक कार्बन युक्त इस्पात का प्रयोग किया जाता है। 
  • स्थायी चुम्बक बनाने में इस्पात का उपयोग होता है। 

Copper (Cu)

  • ताँबा मुख्यतः सल्फाइड, ऑक्साइड एवं कार्बोनेट अयस्कों के रूप में पाया जाता है।
  • तांबा को उत्कृष्ट धातु कहा जाता है।
  • आदिमानव द्वारा सबसे पहले तांबा का ही उपयोग किया गया था ।
  • तांबे का निष्कर्षण :
    • तांबे का निष्कर्षण मुख्यतः कॉपर पायराइट्स अयस्क से किया जाता है ।
    • कॉपर पायराइट्स अयस्क का सांद्रण फेन प्लवन विधि द्वारा किया जाता है ।
  • यह थोड़े लाल रंग की धातु है ।
  • यह ऊष्मा तथा विद्युत् का सुचालक होता है ।
  • यह साधारण ताप पर शुष्क हवा से कोई प्रतिक्रिया नहीं करता है।
  • यह आर्द्र हवा में धीरे-धीरे भास्मिक कार्बोनेट में परिणत हो जाता है ।
  • यह तनु HCl से कोई प्रतिक्रिया नहीं करता है ।
  • यह सान्द्र HCl से प्रतिक्रिया कर क्यूप्रिक क्लोराइड का निर्माण करता है ।
  • यह ठंडे तथा तनु H2SO4 के साथ कोई प्रतिक्रिया नहीं करता हैं। इसे सान्द्र H2SO4के साथ गर्म करने पर SO2 गैस निकलती है ।
  • तनु HNO3 के साथ नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) गैस निकलती है।
  • तांबा के उपयोग :
    • (i) विद्युत् तार एवं विद्युत् उपकरण के निर्माण में
    • (ii) विद्युत् मुद्रण तथा विद्युत् लेपन में
    • (iii) सिक्का तथा बर्तन के निर्माण में
    • (iv) मिश्रधातुओं के निर्माण में
    • (v) कैलोरीमीटर के निर्माण में

तांबे की मिश्रधातुएँ

पीतल  Cu (70%), Zn (30%)  बर्तन तथा मूर्तियाँ बनाने में 
कांसा  Cu (88%), Sn (12%)  बर्तन तथा मूर्तियाँ बनाने में 
जर्मन सिल्वर Cu (50%), Zn (35%), Ni ( 15%) बर्तन तथा मूर्तियाँ बनाने में 
गन मेटल Cu (88%), Sn (10%) Zn (2%)  बंदूकों तथा मशीनों के पुर्जों के निर्माण में 

 

क्यूप्रिक सल्फेट ( Cupric Sulphate) :

  • क्यूप्रिक सल्फेट को नीला थोथा या नीला कसीस के नाम से भी जाना जाता है।
  • यह ताँबा का सबसे प्रमुख यौगिक है।
  • यह नीले रंग का  ठोस पदार्थ है ।
  • यह जल में  विलेय है ।
  •  इसका उपयोग कीटाणुनाशक के रूप में, विद्युत् लेपन तथा विद्युत् सेलों में होता है ।
  • यह KCN के साथ प्रतिक्रिया कर जटिल यौगिक पोटैशियम क्यूप्रोसायनाइड बनाता है।
  • कॉपर सल्फेट एक विष है । अतः इसे कीटाणुनाशक ( Fungicide) के रूप में प्रयोग किया जाता है ।
  •  निर्जल कॉपर सल्फेट का प्रयोग जल के परीक्षण में किया जाता है । 

श्वेत कांसा (White Bronze ) :

  • टिन की अधिक मात्रा युक्त कांसा को श्वेत कांसा कहते हैं ।

रोल्ड गोल्ड (Rold Gold) :

  • रोल्ड गोल्ड तांबे की एक मिश्रधातु है, जिसका उपयोग सस्ते आभूषणों के निर्माण में होता है । 

क्यूप्रिक क्लोराइड (Cupric Chloride) :

  • यह हरे रंग का रवेदार ठोस पदार्थ है ।
  • यह पानी में  घुलनशील है ।
  • इसका उपयोग डीकेन विधि द्वारा क्लोरीन के निर्माण में उत्प्रेरक के रूप में होता है । 

क्यूप्रस ऑक्साइड (Cuprous Oxide ) :

  • यह लाल रंग का ठोस पदार्थ है जो जल में अघुलनशील है ।
  • इसका उपयोग रूबी काँच, रंग आदि बनाने में होता है । 

नोट : मानव शरीर में कॉपर (तांबा) की मात्रा में वृद्धि हो जाने पर विल्सन रोग हो जाता है।