मेला सर्ग दामुदेरक कोराञ् Mela Sarg Damuderak Koran JSSC JPSC

  Damuderak Koran Shivnath Pramanik FOR JSSC JPSC

दामुदेरक कोराञ्  शिवनाथ प्रमाणिक

khortha (खोरठा ) For JSSC JPSC 
KHORTHA (खोरठा ) PAPER-2 FOR JSSC

दामुदेरक कोराञ्

दामुदर नदी की गोद में 

अध्याय -1 : मेला सर्ग


  • इस अध्याय में झारखण्डी संसकृति (अनार्य संस्कृति) और गैर झारखण्डी संसकृति, वैदिक धर्म और बौद्ध धर्म का मिलन होता है। 

  • इस अध्याय में झारखण्ड की प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन है। 

  • मगध से आकर राजा उमादित्य द्वारा दामोदर नदी के किनारे अंकसर साम्राज्य स्थापना करता है। 

    • मगध के व्यापारी झारखंड जब आते तो साथ में नून, धनिया, हल्दी, गेहूं, मसाला लेकर आते और बदले में झारखंड से जब वापस जाते तो हीरा, सोना और चंदन, मगध ले जाकर बेचते थे 

    • इसी की सूचना पाकर उमादित्य झारखंड आता है

    • झारखंड के आदिवासियों एवं मगध की सेना के बीच में युद्ध होता है जिसमें आदिवासी हार जाते हैं और अंकसर साम्राज्य की स्थापना होती है.

    • बाद में राजा का आदिवासियों के साथ दोस्ती हो जाता है और शांति स्थापना होती है

  • और इस तरह उमादित्य आदिवासियों का नेता जोगना मांझी के साथ घुल मिल जाता है और साथ में बैठकर मदिरा का सेवन भी करता है इस तरह यहां पर मदिरालय का वर्णन किया गया है जहां सभी जाति पाति ऊंच-नीच अमीर गरीब काला गोरा का भेदभाव मिट जाता है

  • राजा उमादित्य शिव एवं दुर्गा माता का भक्त था दुर्गा पूजा के नवमी के दिन महारानी बरुनी दुर्गा माताका पूजा करती और दसवां दिन मेला का आयोजन किया जाता था

  • एक बार आश्विन मास के दशमी के दिन नागवंशी राजा एवं पालकोट के महाराजा मेला में आते हैं और वहीं पर महुआ बोनकेबघोल राजा को अतिथि के रुप में बुलाया जाता है

  • दशहरा के मेले में बौद्ध साधु का सम्मान, पोंगापंथी विचार(वैदिक धर्म ) का विरोध किया गया, पशु बलि को गलत बताया गया, अहिंसा परमो धर्म,राजा के द्वारा बौद्ध धर्म को स्वीकार किया जाना, बौद्धधर्म के कारण राज्य शासन में शिथिलता का आना,राज कर्मचारियों द्वारा जनता का शोषण, बौद्ध साधुओं में अनाचार का प्रवेश आदि का वर्णन है। 


“मेला”

महुवा, डोह, सरइ, करंज 

आम, जामुन सिरिसेक संग 

परास आपन मने मतंग 

बाह रे बाह ! झारखंडेक बोन ।


पेड़ – महुवा, डोह, सरइ, करंज आम, जामुन, सिरिस, परास  

मतंग – मस्त  बोन – वन /जंगल 


लाले लाल सिमइरेक फूल 

गोछेक गोछ टेसुक फूल 

लाताञ-पाताञ भरल बन 

पुटुस कुरचे मने मन ।।


फूल – सिमइर फूल ,टेसु फूल,गोछ -गुच्छा 

लाताञ-पाताञ  –  लता -पत्ता ,पुटुस पौधा ,कुरचे – खुसी मनाना 


नीमेक जुडें भालुक नाचे 

पथल खोहें बाघ बाँचे 

गेरवा-पेरवा गीत गावे 

सियार-हुंडार खुसी मनावे।

नीमेक जुडें – नीम की छाया ,खोह- गुफा ,गेरवा – गौरेया ,

पेरवा – कबूतर,सियार-हुंडार – भेड़िआ  


सादा कोनाइर सरगें फूले 

जइसन बोंक सरगें उड़े 

बरेक जटें बादर झुके 

पिपइर डाइरें कोइल कुके।

सरग – आसमान /आकाश ,कोनाइर फूल ,बोंक – बगुला पक्षी ,

बरेक जटें – बरगद का पेड़ की जट्टा , बादर – बन्दर 

पिपइर डाइरें-पीपल पेड़ की डाली  ,कोइल – कोयल 


खेरहा-तितीर नुकाइ खेले 

रीझें पाँइख मेंजुर खोले 

गोंठेक गोंठ हीरन हुइवें 

मलइक बुले हरिहर दुइवें।

खेरहा -खरगोश ,तितीर पक्षी , नुकाइ – छिप जाना ,पाँइख – पंख,रीझ – ख़ुशी ,मेंजुर – मोर ,गोंठ – झुण्ड /समूह /भीड़ ,  हीरन – हिरण ,मलइक – मटक मटक के चलना 


पहारेक झरना झर-झर बोहे 

बोनेक जोरिया कल-कल बोले 

सीतल हवाञ भदरिया गावे 

बोनेक जिनगी अमरित पावे।


जोरिया – छोटी नदी /नाला ,भदरिया – भादो 


जंगली जीवेक गोटे राइज 

जइसन काइल वइसन आइज 

फूलें-फरें झबराइल डाइर 

रिचिक नाय  गइर-माइर।


गोटे – संपूर्ण ,डाइर – पेड़ की डाली,रिचिक – अंदेशा , नाय – नहीं  


जंगलेक महतम के नाम जाने 

बड़का-बड़का बुइधलग माने 

जंगलहीं तो मंगल होवे। 

जंगलेक खातिर दंगल होवे।

बुइधलग – बुद्धिमान 


जंगलहीं मानुसेक सिरिस्टी 

जंगलही सरगेक बिरिस्टी 

जंगलहीं सइभेक दिरिस्टी 

जंगलही अंधारेक अनिस्टी


सिरिस्टी – सृष्टि/संसार ,बिरिस्टी – वर्षा ,अनिस्टी – अनिष्ट /अनहोनी ,दृष्टि 


माटिक रइखा जंगल सें 

रोटिक रइखा जंगल सें 

भाखाक रइखा जंगल से 

संस्करीतिक रइखा जंगल सें


भाखाक – भाषा 


बोन-झार से बहराइल नदी 

पहार कोचा से डहराइल नदी

अउरी-पाथारी गरगाराइल नदी 

नाभान-उठाने नरनराइल नदी।


नाभान-उठाने – ऊपर नीचे ,अउरी-पाथारी – टेड़ा मेड़ा 


जंगल नदिक जेठिन पाँव 

आदि मानुसेक सेठिन ठाँव 

धने-जने भरल गाँव 

सलसंत लेला गाछेक छाँव।

जेठिन – जहां -जहां ,सेठिन – वंहा वहां , ठाँव – रुकने का स्थान , 

(सलसंत – शांति स्थापना/आराम करना  )


जुग जुग ले बोहल आवे, झारखंडेक भीतर 

सुखें-दुखें आदिवासिक, संगी भेल दामुदर | 


ढीपा-ढहार नदीक कारघा कि कोन्हो कथा कहत ? 

बोने तोपाइल चोपतल माटी की कोन्हों गाथा कहत ?

ढीपा-ढहार – अवशेष ,कारघा – किनारा ,चोपतल – लपेटा 


Q.  उमादित्य कर आकरमन कर पहिले मगध से झारखंड कोन आव हला, ?बेपारी

Q.  बेपारी कोन चीज बेच हलथ

नुन, धनिया, हरदी लइये, मगध राजेक बेपारी 

डोंगी लइके दामुदरें, छुटला झारखंडेक खोजरी । 

चर, गहुम, मसालाक बदलें, हीरा चन्दन पावथ 

बनिये खनिज-बनज लइकें, राजाक गढ़ें बेचथ ।


कि जानथ हीराक मरम ? हियाँक आदिवासी 

पथल जाइन हीरा-सोना, फेंकथ झारखंड बासी । 

चंदन काठेक आइग जोरथ माघ पुसेक मासे 

काठे-काठे चिन्हित भेला, पाँच सदिक सेंसें।


टावा-ठेकान लेल परें, मगध राजाक हुकुम भेल 

राजाक बेटा सेना लइकें झारखंडेक बोन चहँइट गेल

राजकुँवर बीर उमादित्य सेना लइ अइला 

दामुदरेक धाइरे एक दिन मेला लगाइ देला |


मेलाञ ठेलम-ठेला भेला, दुइयो बाटेक सेना 

अँगले हुलमाइल भेल, भाभे बाघ, भालुक, मइना । 

आदिबासिक सुखेक राइज आइरजें लुइट लेला 

जुग बीतल परे दिकुञ सहिया पाताइ लेला |


सोंढ़-मोंढ़ जंगली मानुस बलें नात्र कम 

मेतुंक, बुइध बलेक मुड़े बइसल जइसन जम | 

जे करीलेक कॉड-धनुक से करीलेक कलम 

कइर काइट गेल कारी-कलम करे आइलें बलम |

बल-बुइध चले लागल, दामुदरेक धारी 

जोगना माँझी पहरा देइ,राजा उमादित्येक बार । 

झार-बोन कटे लागत, पसु-पइखी भागे लागला 

राजाक गढ़ बने लागल, मानुस तनी जागे लागला |


दालानेक उपर दालान, कोठिक उपर कोठी 

माटिक हुइलेक सोना-हिराज चमके लागत कोठी । 

माटिक पेटे, माटिक रतन, माटी से उपजला 

हेरले रहला माटिक मानुस, माटी से कि भेला |


हाँथी साल, घोड़ा साल, नदिक कारघात्र बनल 

पानी पियेक खतिर पसुक, पथलेक भाँड़ बनल | 

सरइ बोनेक सरइ, काठ नाज आर रहल 

रोंदल-कुंदल सइ काठे, सइज गेल महल |

सोनार, कामार, मुरतिकार गरहे लागला मुरत 

छेनी हँथुरी छेइछ-छांइछ, कुंदाइं पथलेक सुरत । 

लताञ-पाताञ भरल, कमल फुइट गेल 

नाना रंगेक नाना ढंगेक, मुरती बइन गेल |


रंग बिरंगेक माछ नाचे, अंकसरेक पानी 

नाना बरेनेक पँइखी उड़े, सरोवरेक धारी | 

लाल, सादा, लील कमल, खेले राजबालिका 

चीरहरण करे सरोवर, रीझे सालुक बनबालिका |


युवा मंडली चाँद-सुरुज बाँधेक आरी-आरी 

मधुलोभी भँवरा मँडरे, अंकसरेक धारी-धारी । 

डोह, डुमइर, कोचरा, महुवा, सब सिराइ गेला 

धान, गहुम, जोंडरा, बुटें, खेत सइज गेला ।


मेंतुक राजाक मालागुजारी, मोरायें बाँइध दे हला 

ढाँकी-डेमनीञ, धान, गहुम, गढ़ पहुँइच जा हला।

मगध राजसें कते बनिया, राजाञ मंगाइ लेल 

नाना रकमेक बेपार तबे, सुरू भइ गेल |


कुछ-कुछु कुँबाक बदल घर बइन गेल 

गाजारें तोपाइल दामुदरेक कारघात्र सहर बइस गेल |

 केंद, पियार, मंदालेक जघञ, सेव-अनारें लइ लेल 

परास फुलेक सिंहासने, गुलाब राजा बइस गेल |


हुइबगर, चेठगर, बुइधलग लोकेक भइ गेल राज 

चनफन, लुइरगर, बिदमान लोक करे लागला काज | 

पोंगापंथी निपटकाना, राजाक घरें आना-गोना 

एक बाटें खाला-दोना, दोसर बाटे थारी-सोना

सोमरसे माइत गेला, रसिकेक कुल 

अलि कुलेक पाँइत देखा, ई फुल-ऊ-फुल | 

दिन भेलें करिया-गोरा, अंधारें से एके 

उमादित्य, जोगना माँझिक पियाला देखों एके।


हिन्दु आर मुस्लिम के, भिनु-भिनु डहर 

ताड़िक कुंबे बइसे गेले, एके दोनाक लहर। 

नात्र जिबो मन्दिर-मस्जिद, जाइत पाँइतेक घर 

परेमेक नहर जहाँ बहे, जिबो ताड़िक घर

सिब-दुर्गाक भगत हला, उमादित्य राजा 

बरूनी रानीपूजा करे, लइके बाजा-गाजा | 

आसिन मासेक नौ दिने, शक्ति मायेक पूजा 

गहगहाइ लागल अंकसर, सइज गेल दरजा ।


दसमेक दिने फइर, लाइग गेल मेला 

माँझी सोंतार, घटवाहा मेला देखे अइला । 

पहुना रूपे नागवंशी, मेलाञ देखा देला 

पंचकोटेक महाराज, हाँथीं चइढ़ अइला |


अन्न दान, धन दान, गरू दान, कउड़ी दान 

दान करथ राजा-रानी,घटवाहाक करथ मान | 


गाड़हा-नाला झार बन से, पारसनाथ-लुगु पहार धाइर से 

महुवाक बन से बघेल राजा,नर-नारी कंसावतिक धाइर से ।

घटवाहा करे घाटेक रइखा, काँड़-धनुक से राजाक रइखा 

महलेक रइखा मांझी से, मेलाक रइखा सेना से ।


नाना जाति, नाना पाँतिक, मेलाञ गोंठ भेला 

साधु-मुनि नाना भेसे, मेलाञ देखा देला।। 

खनिज-बनज के लेन-देन, भारी मात्राञ भेला 

मगधेक लोक जते अइला, धोकरी भोइर लेले गेला |


गेरुवा रांगल पइरधनी, कान कुंडल धारी 

एगो साधु भाखा कुंदे, अंकसरेक धारी | 

साधुक मोहड़े अड़गुड़ रंफ्, चमके लागल अइसन 

तारा मंडलेक माँझे-माँझ, चाँद चमके जइसन |


रसे-रसे लोक जन, नजीके चँहटे लागला 

केउ कहइ बोंगा लागथ, केउ कहइ पागला

जुवान मुँहा साधुक देइखके, नले लागलथ ओकर भेउ 

एते जबर पेठिया में पटतइन आर नात्र केउ |

मोह-माया घेरल तोहनी, पोंगा पंथें भरल तोहनी 

पूजा-पाठ, जइग-जाजन, बलिपूजा ढोंगिक डेमनी । 

काम, क्रोध, लोभ, मोह, इरसा द्वेस छोड़ा 

दलित-पीड़ित, दुखिक बाटे करा आपन मोहड़ा ।

सुखें हाँसइक दरकार नाञ, दुखें काँदइक दरकार नाञ 

सुख-दुख संग-भाइ लागथ, नाञ करिहा फटक फूलाञ | 

मानुस बइनके मानुस सें, यार करा आपन मन सें 

जाइत-पाँइत छोइड़के, पियार करा सभे जन सें।


आबतार नाय करमी लोक, मानुसेक करम कइर गेला 

करम भाइ रे ! तोहनीयो करा, जिनगी आपन सफल करा | 

तनेक हिंसा नाय, मनेक हिंसा, हिंसा नाय  करिहा 

अहिंसा परम धरम लाइ, संदेस बुद्धक जानिहा।


मानुस ले ऊँचा आर, कोनो कुछ नखे 

आतमाउ आर सभे कुछ, मोरइत-बनइत रहे । 

‘सबं अनिध’ आर ‘यत् सत तत क्षणिक 

परकीरति छाड़ा आर, स्थाई कुछो नखे ।


भगवानेक नामें भरत के मानिहा नाय  

जगतेक हितें मुकति जानिहा भाइ । 

तार बेसी अँइठ देलें, तुंबा बाजा टुइट जाइ 

बेसी लोल माझे माझ, जिनगिक बीना तभी बाजइ । 

राजदुतें जब सुनाइ देल जोगिक उपदेस, 

राजा-रानिक मनेक भीतर 

मेइट गेल सब कलेस।


बुद्ध पुरूसेक खातिर, राजाक पालकी आइ गेल 

अति समादरें साधु, महल भीतर चइल गेल | 

रसें-रसें बेराक चाक, बइसे लागल धरती 

मेला से डिहइर गेला, नर-नारी पाँती-पाँती ।

गियान रस लइ लइकें डहर धरला गियानी 

मेंतुक राजपुरोहितेक, धइर गेलइ पेट कुहनी | 

गेलइ रे बाप भाँड़ेक भरम, चेंदेक आयू 

बुद्धकेर उपदेसें भगवा जेमोठी नाँइ ।


भगवान, भाइग, जाइत-पाँइत, नाँइ रहले कि ई धरम चले ! 

रमेक सासन, दान-दइछना, चलतइ कथिं सब एके भेले ? 

हतभागा केउ नाँइ रखले, सरगेग लोभ के करे! 

मोरले सुख पावेक नामें, गोटे जिनगी के मोरे!


काड़ा-गरुक गाड़ी सब, डिहइर गेला डहरें 

काप-छंदेक बाँसी, बाजइ लहर-लहरें। 

बन-बालिकाक कोकिल बोल, बोले मधुर सुरें। 

बाल-पापीहाक इंगित बोली, बाँसिक


गौतमे बुद्धक पंथ, दामुदरें मंथन भेला 

सुदरो आर गियानियो, माथाय  पाइत लेला |


लउतन खान, लउतन पान, पइरधन लउतन भेल 

लउतन गान, लउतन मान, भाखा लउतन भेल । 

लउतन धरम, लउतन करम, मानुसो लउतन भेला


बेदेक धरम नुकाइ गेल, करमे अगुवाइ गेला । 

सीधा-छाँदा, बइसले कामाइ, सब सिरइला हाइ ! हाइ ! 

ऊँच-नीच केउ नाञ, सब बहिन-बहिन , भाइ-भाइ !


गुप्त बंसेक गोड़ी दइके, उमादित्य फुराइ गेल 

सरगताइ लागल राजाक पीढ़ी, मेंतुक बन कटाइ गेल | 

जनबलि, पसु बलि, आन बलि बंद भेल 

जइग-जाजन, पूजा-पाठ, फोरी-फंदी मंद भेल |


सिब-बुद्ध मिल-मेसाइके, बोड़ो’ संगिया देलथिन 

आगु चइलकें महामानव गउतम के, भगवान कहलथिन | 

राजाक कान भोरे लागला, बाभन पोंगा-पंथें 

मुदा कान तऽ भरल हल, संदेस बउध पंथे ।


तब धरमेक नेता सब, चलला अजगुत फंदी 

बुइधेक से धरम फलेक, टुंगेले फुनगी। 

अर्थ के अनर्थ भेल, हिंसा बंद भेल 

टाँगी, काँड़, बलम, तरवाइरें चिती लाइग गेल ।


बीरान भेल राजाक घाट, घटवाहा छोइड़ देल 

दामुदरेक घाटें घटवाहा, डेरा माइड़ लेल | 

राज के चलावे खातिर, तरवाइर छुइट गेल 

फानसी चलावे खातिर, बाँस धइर लेल ।


ढेंगराजु साइज देल, राजगढ़ेक सेना 

मोदें-ताड़ी माइत गेल, जइसन काड़ा रेना । 

खखसे लागल राजाक कोठी, साधु-जोगिक भेसें,


हाइचक भेल आदिबासी, कि भेल हामर देखें ! 

राजाक धने बने लागल, चनफनिया बिहार 

बिहारें बिहार करथ भाँड, जोगी-जोगीनिक इयार


बुद्धे बुझ्ध दइ देला 

मेंतुक एखनिक अनाचार, 

बुधेक धरम भाँड़े 

पंडित-पुरोहितेक फंदिक माइर।


मकिन, आदिबासिक सिकार खेला 

आइजो तक रहल, 

आपन डहर आपने खोजला 

परकीरति करल पहल।


हेंजामोरा नियर चले

लागल राजाक सासन, 

राजाक करमचारी बतर सिरें 

करे लागला सोसन