झारखण्ड के लोकनाट्य (Loknatya of Jharkhand )

जट-जटिन 

  • आयोजन –  श्रावण से कार्तिक माह के बीचकुँवारी लड़कियों द्वारा 
  • वैवाहिक जीवन को दर्शाया जाता है। 

 

भकुली-बंका 

  • आयोजन –  श्रावण (सावन) से कार्तिक माह तक 
  • वैवाहिक जीवन को दर्शाया जाता है। 
    • भकुली का मतलब – पत्नी
    • बंका का मतलब – पति

 

 सामा-चकेवा

  • आयोजन –  कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी से पूर्णमासी तक 
    • सामा –  नाट्य के नायिका को
    • चकेवा – नायक को
    • चूड़क/चुगला- खलनायक को 
    • साम्ब- सामा के भाई को 
  • यह सामूहिक गीत है। 
    • प्रश्नोत्तर माध्यम से विषय-वस्तु को प्रस्तुत किया जाता है।
  • यह भाई-बहन के पवित्र प्रेम से संबंधित लोकनाट्य है।

 

 डोमकच 

  • यह स्त्रियों द्वारा विशेष अवसरों (जैसे – विवाह आदि) पर आयोजित घरेलू लोक नाट्य है। 
  • इसमें हास-परिहास, अश्लील हाव-भाव व संवाद का प्रदर्शन किया जाता है।
  • इस लोकनाट्य का सामूहिक प्रदर्शन नहीं किया जाता है। 
  • पुरुषों को देखने की मनाही होती है।
  • इसका आयोजन विवाह एवं अन्य अवसरों पर रात भर किया जाता है। 

 

किरतनिया

  • इसमें भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन गायन के द्वारा किया जाता है।