(Gudupuchi Rani aar kowa) गुदपुचु रानी आर कउआ

4. गुदपुचु रानी आर कउआ – संकलकर्ता – बंशीलाल बंशी 

  • पुस्तक – खोरठा लोकसाहित्
  • प्रकाशक – झारखण्ड जनजातीय कल्याण शोध सस्थान ,मोरहाबादी ,रांची ,कल्याण विभाग झारखण्ड सरकार 
    • प्रथम संस्करण – 2012   “©www.sarkarilibrary.in”
  • संपादक – 
    • प्रधान संपादकए. के. झा
    • अन्य संपादक
      • गिरिधारी गोस्वामी आकाशखूंटी 
      • दिनेश दिनमणि
      • बी एन ओहदार
      • श्याम सुन्दर महतो श्याम 
      • शिवनाथ प्रमाणिक
      • चितरंजन महतो “चित्रा’
  • रूपांकनगिरिधारी गोस्वामी आकाशखूंटी
  • मुद्रक – सेतु प्रिंटर्स , मोरहाबादी ,रांची 

KeyPointsकौआ (लालची ), गुदुपुचु रानी (लाल पोका),पानी , कुम्हार (चुकरी), कुकुर ( सींग) , गाय ( दूध भात), हरिहर घांस, कामार (हँसुआ ), हँसुआ (गरमा-गरम आर नरमा-नरम),  “©www.sarkarilibrary.in”

यह लोगकथा एक लालची कौवा और उसकी बेवकूफी पर आधारित कहानी है।  उसकी बेवकूफी और लालच के कारण उसका बहुत बुरा दशा हो जाता है।  लालच किसी भी व्यक्ति का विवेक और बुद्धि बिगाड़ देता है।  कौवा जैसा चालाक पक्षी भी लालच के कारण विवेक खो देता है और अपना दुर्गति का कारण  बन जाता है। 

एगो गाछें एगो कौआ रह हल। सई गाछेक हेठें एगो गुदुपुचु रानी (लाल पोका) रह-हली । एक दिन कौआक मनें लोभ भइ गेलइ। गुदुपुचु के खाइ खातिर मने-मन कुरचे लागल। गुदुपुचु रानिक नजीकें जाइ के कहलइ-गुदुपुचु रानी, तोरा हम खइबों ।

कौआक खल मति सुइन के रानिक मनें भाभना भेलइ। कौआक चेंटे खातिर रानी एगो चाइल खेलली- तोंय यदि हामरा खाइ खोजेहे तबे हामर बात सुन। “तोय तो बारह रकमेक जिनिस खइहें। तोर ठोंठ (चोंच ) टा जूठा भइ गेल हो । जो आपन ठोंठ टा धोइ के अइबें, तकर बाद हमरा खाइहें।”

रानिक साल्हा सुइन कौआ राजी भइ गेल। मने-मन भाभल जे बेसे कह ही । काहे नॉइ हाम आपन ठोंठ टा धोइ केही ओकरा खइबइ तो बसे सवाद लागतइ । एहे भाइब-गुइन के कौआ पानिक नजीक पहुँइच गले आर कहलइ- “©www.sarkarilibrary.in”

देहुँ पनियाँ, धोवब ठोरवा, खाइब गुदुपुचु रनियाँ !

कौआक कथा सुइन पानी कहलइ “कइसें देबो ? हामर ठीन तो कोन्हों जोगाड़ नखो। कुम्हार घार ले चुकरी आने पारवें तो पानी पइबें।” रानिक साल्हा सुइन के कौआ सोझे कुम्हार घर बाटें सोझाइल आर पहुँइच के कहलाइ –

कुम्हारा देहु चुकरी, भोरब पनियाँ

धोवब ठोरा, खाइब गुदुपुचु रनियाँ !

कौआक कथा सुइन के कुम्हारें कहलइ “सुन कौआ ! हमार ठीन – माटी नखों जो कुकुरेक सींग ले माटी कोइड़ के लइ आनबे ओकर बाद चुकरी बनाइ देबो। सइ चुकरी पानी लइ जिबें आर आपन ठोरवा धोइकें गुदुपुचु रानि खइभी ।कुम्हारे बातें सुन  कौआ कुकुर ठीन पोहचल आर कहलइ “©www.sarkarilibrary.in”

कुकरा देहु सिंगला, कोडब मटिया, देबइ कुम्हाराक

देतइ चुकरी, भोरब पनियाँ, खाइब गुदुपुचु रनियाँ !

एतना सुइन के कुकरें कहलइ “हाम बहुत दिन से भूखें हो। हामरा जदि दूध भात खिवे पाबें तवें हम आपन सींग देबो। जो गाय ठीन ले लूध लइ आनबे।” कुकुरेक कथा सुइन कौआ गायेक खोजाइरें चलल। कुछ धुरेक बाद एगो बुढ़ी गाय देखे पाइल। लखन ओहे गइया ठीन जाइ के कहलइ –

गइया देहुँ दुधा,देबइ कुकराक, देतइ सिंगला

कोड़ब मटिया, देबइ कुम्हराक, देतइ चुकरी

भोर पनियाँ, धोवब ठोरा ,खाइब गुदुपुचु रनियाँ !

कौआक कथा सुइन के गायें कहली- बहुत दिन से भूखे हों। जदि तोय हमरों हरिहर घांस खिवे पारवें तबें भेले हाम दूध दिये पारबो। गायक कथा सुइन कौआ जहाँ खूभे हरिहर घांस रह-हलइ तहीं पोहइच गेल आर कहलइ- “©www.sarkarilibrary.in”

 

देहु घांसा, देबइ गइयाक, देतिक दुधा

देबइ कुकराक 

कोड़ब मटिया

देबइ कुम्हराक, देतइ चुकरी, भोरब पनियाँ

धोवब ठोरा, खइबइ गुदुपुचु रनियाँ !

कौआक बात सुइन घांसे कहलइ कइसें देबो? हामर ठीन काटइक – जोगाड़ नखो। जो कामार घार ले हँसुआ लइ आन तब घांस दिए पारबो । कौआक मने त गुदुपुचु रानिक खाइक हुचुक चढ़ल हलइ, जे बुइधें हतइ से हे करब ताओ गुदुपुचु रानिक खाइ के रहब । तखन घांसेक कथा सइन के सइ कौआ कामार धार पोंहँइच गेल आर कामार से कहलइ “©www.sarkarilibrary.in”

कामरा देहुँ हँसुआ, काटब घासा, 

देबइ गइयाक

घर घरना देतइ सिंगला, कोड़ब मटिया

देबइ कुम्हराक,देतइ चुकरी, भोरब पनियाँ

धोवब ठोरा, खइबइ गुदुपुचु रनियाँ

कौआ एके गो बातेक रट लागाइ देलइ । तखन कामार सइ लालचाहा कौआक मनेक बात जाइन ओकराँ लालचेक फल दिएइ । बुइध रॉचल आर कहलाइ- सुन कौआ ! हँसुआ दू रकमेक हवइ गरमा-गरम आर नरमा-नरम । कोन टा तोरा बनाइ देवो। लाल-लाल पारस फूल नियर गुदुपुचु रानिक खाइ खातिर कौआक त छावाइद भइ गेल हलइ से ले कहलइ- “गरमा-गरम बनाइ दे।”

कौआक बात सुइन के कामार मने मन हॉसल आर कहलइ- “ठीक हइ बइस एखनी बनाइदेबो । एखन कामार चाँड़ा चाडी एगो हँसला तातल-तातल बनाइ के कौआक आगुँइ राइख देलइ आर कहलइ-हँसुआ बइन गेलो।” “©www.sarkarilibrary.in”

एतना सुनबाइ आर कौआ दौड़ा-दौड़ी जाइके जइसी हसुआ ठोर मारल हइ तइसी ओकर ठोठ हदइक उठल हइ ओकर ठोठ त पोइड गेलइ, आब गुदुपुचु रानिक कि खइतइ ?

कौआ छटपटइले हुआँ से भागल आर दरदेक मारी हिन्दे हुन्दे घुरहते – रहल। साइझ भेलइ तखन सइ गाछेक डारी आइ के डरडरान भाभ बइसल । कौआक दुरदासा देइख के गुदुपुचु रानी कहलइ – कि भेलो कौआ ? आपन ठोर धोइ के अइलें?” कौआ रानिक बात सुइन के मनें-मन लजाइ गेल आर दोसर बाट मुँह कइर के काँव-काँव करे लागल। हिन्दु गुदुपुचु रानी ओकर करनी टाक देइख के बइजइक उठली रे लालचाहा! देखल्ही आपन लोभेक फल।”

 

  • Q.गुदपुचु रानी आर कउआ लोककथा के संकलकर्ता के हे ? बंशीलाल बंशी 
  • Q.गुदपुचु रानी आर कउआ लोककथा कौन किताबे संकलित है ? खोरठा लोक साहित
  • Q.गुदपुचु रानी आर कउआ लोककथा के सार की लगे ? लालच नाय करे 
  • Q.गुदपुचु रानी आर कउआ लोककथा में गुदुपुचु रानी क्या है  ? लाल पोका
  • Q.गुदपुचु रानी आर कउआ लोककथा में गुदुपुचु रानी का रंग क्या है  ? लाल 
  • Q. गुदपुचु रानी आर कउआ लोककथा में लालची कौन है  ?  कउआ
  • Q. गुदपुचु रानी आर कउआ लोककथा में गुदपुचु रानी को कौन खाना चाहता है ?  कउआ
  • Q गुदपुचु रानी आर कउआ लोककथा में कौवा को उसका चोंच  धोने का सलाह कौन देता है ? गुदपुचु रानी
  • Q. देहुँ पनियाँ, धोवब ठोरवा, खाइब गुदुपुचु रनियाँ ! यह कथन कउआ द्वारा किसके लिए प्रयोग किया गया है ?  पानि
  • Q.गुदुपुचु रानी, के कहे है – तोरा हम खइबों ? कौआ “©www.sarkarilibrary.in”
  • Q.कौआक के चेंटे खातिर सोचे है ? गुदुपुचु रानी
  • Q. कौआक के के काहलय – “तोय तो बारह रकमेक जिनिस खइहें ? गुदुपुचु रानी
  • Q. कौआक के के काहलय – तोर ठोंठ (चोंच ) टा जूठा भइ गेल हो ? गुदुपुचु रानी
  • Q.कौआक के के काहलय –ठोंठ टा धोइ के अइबें, तकर बाद हमरा खाइहें ? गुदुपुचु रानी
  • Q.गुदपुचु रानी कँहा रहती है ? कौआ रह हल सई गाछेक हेठें
  • Q.कौआ पानी थिन की ले जाहय ? पानी मांगे ले 
    • ताकि जूठा ठोंठ (चोंच ) टा धोइ खातिर 
  • Q.कौआ कुम्हार थिन की ले जाहय ? चुकरी आने ले
    • ताकि चुकरी में पानी लिए परे तबे  जूठा ठोंठ (चोंच ) धोइ  “©www.sarkarilibrary.in”
  • Q.कौआ कुकुरे थिन की ले जाहय ? कुकुरेक सींग ले
    • ताकि कुकुरेक सींग से कुम्हार माटी कोइड़ चुकरी बनाते 
  • Q.कौआ बुढ़ी गाय थिन की ले जाहय ? लूध लइ
    • ताकि कुकुरे दूध भात खेताय 
  • Q.कौआ हरिहर घांस थिन की ले जाहय ? घांस लइ
    • ताकि गाय हरिहर घांस खेताय
  • Q.कौआ कामार थिन की ले जाहय ? हँसुआ लइ
    • ताकि हँसुआ से घांस काटते गाय खातिर 
  • Q.कामार थिन हसुवा के तरह के है ? दो तरह के 
    • गरमा-गरम 
    • नरमा-नरम
  • Q.कौआक ठोंठ कैसे पोइड गेलइ ? गरमा-गरम हसुवा से “©www.sarkarilibrary.in”
  • Q.कौआक सबक के सीखा है ? कामार
  • Q.गुदपुचु रानी आर कउआ लोककथा में  कौआक मदद के करले ? कोय नाय 
  • Q.गुदपुचु रानी आर कउआ लोककथा में “ रे लालचाहा! देखल्ही आपन लोभेक फल।” कौआ से कौन कहता है ? गुदपुचु रानी