Fluid Mechanics

  • Post author:
  • Post category:Blog
  • Reading time:40 mins read

द्रव्यों के यांत्रिक गुण 

(Mechanical Properties of Matter)

  • ऐसा कुछ भी, जिसमें द्रव्यमान हो तथा जो स्थान घेरता हो, ‘द्रव्य’  (Matter)कहलाता है। 
  • पदार्थ मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं
    • 1. ठोस (Solid)
    • 2. द्रव (Liquid)
    • 3. गैस (Gas)
  • द्रव और गैसें प्रवाहित होती हैं। अतः ‘तरल (Fluid)‘ कहलाते हैं। 
  • ठोस ,द्रव और गैस में कुछ गुण पाए जाते हैं जो इस प्रकार हैं
    • ठोस – प्रत्यास्थता (elasticity)
    • द्रव – दाब (pressure), उत्प्लवन (Upthrust or Buoyancy Force) ,पृष्ठ तनाव (surface tension), केशिकत्व (capillarity), श्यानता (viscosity)
    • गैस – वायुमंडलीय दाब (atmospheric pressure)

प्रत्यास्थता (Elasticity)

  • किसी पदार्थ का वह गुण जिससे वह, उस पर प्रत्यारोपित बल को हटाने पर अपनी प्रारंभिक आकृति एवं आकार को पुनः प्राप्त कर लेता है, ‘प्रत्यास्थता’ ‘Elasticity’ कहलाता है।
  • इसके विपरीत जब किसी पदार्थ में अपनी प्रारंभिक आकृति एवं आकार प्राप्त करने की प्रवृत्ति नहीं होती और स्थायी रूप से विरूपितं हो जाता है तो इस प्रकार के पदार्थ को प्लास्टिक एवं इस गुण को ‘प्लास्टिकता”plasticity’ कहते हैं।

प्रत्यास्थता की सीमा (Limit of Elasticity) 

  • किसी पदार्थ पर लगाए गए deforming force की उस सीमा को, जिसके अंतर्गत पदार्थ में प्रत्यास्थता का गुण विद्यमान रहता है, उस पदार्थ की प्रत्यास्थता सीमा कहते हैं। 
  •  When a deforming force is applied to a body, a restoring force develops in it as a reaction. This restoring force is equal to and opposite in direction to the applied force.

 

प्रतिबल (Stress)

  • When a body is subjected to a deforming force, a restoring force occurs in the body which is equal in magnitude but opposite in direction to the applied force. 
  • This restoring force per unit area is known as stress. 
  • We can also refer to stress as a measure of the internal force experienced by an object per unit of cross-sectional area.
  • प्रतिबल का मात्रक न्यूटन/मीटर2   अर्थात् पास्कल होता है।

Stress

 

विकृति (Strain) 

  • when a a system of forces act on a body it undergoes some defamation this deformation per unit length is known as strain
  • विकृति एक तुलना है। अतः इसका मात्रक नहीं होता।

Strain

  • When a body is stretched by two equal forces applied normal to its cross-sectional area, this restoring force per unit area is called tensile stress.
  • When a body is compressed under the action of applied forces, this restoring force per unit area is known as compressive stress.

(Hooke’s Law)

  • Hooke’s law states that when a material is loaded within elastic limit(प्रत्यास्थता सीमा)  the stress(प्रतिबल) is directly proportional to strain( विकृति)

Hookes law

Where,

σ = Stress

e = Strain

E = Proportionality constant called as Young’s Modulus

 

  • प्रत्यास्थता गुणांक(Young’s Modulus) का मात्रक न्यूटन/मीटर2 (पास्कल) होता है। 

 

यंग प्रत्यास्थता गुणांक (Young Modulus/modulus of Elasticity)

  • The ratio of longitudinal stress and longitudinal strain is called the ‘Young’s coefficient of elasticity’ of the material of that object.
  • यंग प्रत्यास्थता गुणांक पदार्थ की कठोरता को दर्शाता है अर्थात् कोई पदार्थ कितनी आसानी से मोड़ा या खींचा जा सकता है, यह यंग प्रत्यास्थता गुणांक द्वारा पता चलता है।
  • धातुओं का यंग प्रत्यास्थता गुणांक अधिक होता है। इसलिये इन पदार्थों की लंबाई में थोड़ा अंतर उत्पन्न करने के लिये बहुत अधिक बल की आवश्यकता होती है।
  • एक ही पदार्थ से बने विभिन्न लंबाई के तारों को एक समान भार (बल) से खींचा जाए तो सबसे लंबे तार में हुई वृद्धि सर्वाधिक होगी, जबकि सबसे छोटे तार में न्यूनतम वृद्धि होगी।

 

तरल (Fluid)

  • वे पदार्थ जो प्रवाहित होते हैं, ‘तरल’ कहलाते हैं। 
  • द्रव और गैस तरल हैं। 
  • ठोस के विपरीत, तरलों की अपनी निश्चित आकृति नहीं होती। 
  • द्रव और गैसों में मुख्य अंतर यह है कि द्रव का आयतन निश्चित होता है, जबकि गैस पात्र के कुल आयतन को भर देती है।

 

अंतर-आणविक बल (Intermolecular Forces)

  • प्रत्येक पदार्थ छोटे-छोटे कणों से मिलकर बना होता है, जिन्हें ‘अणु’ कहते हैं। इन अणुओं के बीच कार्य करने वाले बल को अंतराणविक बल’ कहा जाता है। 
  • ये दो प्रकार के होते हैं- ससंजक बल, आसंजक बल। 

ससंजक बल (Cohesive force)

  • एक ही पदार्थ के अणुओं के बीच कार्य करने वाला आकर्षण बल ‘ससंजक बल’ कहलाता है।
  • दैनिक जीवन में ससंजक बल : 
  • ससंजक बलों के कारण ही किसी द्रव की बूंदें संपर्क में आते ही मिल जाती हैं और एक बड़ी बूंद बना लेती हैं। 
  • जल से भीगी हुई दो प्लेटों को अलग-अलग करने के लिये जल के अणुओं के ससंजक बल के विरुद्ध काफी बल लगाना पड़ता है। 
  • ठोस पदार्थ एक निश्चित आकृति के होते हैं, क्योंकि ठोस के अणुओं के बीच ससंजक बल का मान काफी अधिक होता है।
  • शीत वैल्डिंग (Cold welding) : इस प्रकार की वैल्डिंग में धातुओं को मशीनों द्वारा इतना अधिक दबाया जाता है, जिससे वह आणविक परास में आकर परस्पर चिपक जाएँ। ऐसा अणुओं के बीच ससंजक बल के कारण होता है। 

आसंजक बल (Adhesive Force)

  • भिन्न-भिन्न पदार्थ के अणुओं के बीच कार्य करने वाला आकर्षण बल आसंजक बल कहलाता है।’

दैनिक जीवन में आसंजक बल 

  • किसी वस्तु बर्तन आदि का जल से भीग जाना आसंजक बल का उदाहरण है। 
  • ब्लैकबोर्ड व चॉक के कणों के बीच आसंजक बल के कारण ही लिखना संभव हो पाता है। 
  • पौधे के ऊतकों तथा जल के अणुओं के बीच आसंजक बल के के कारण ही मृदा द्वारा अवशोषित जल पौधे के शीर्ष भागों तक पहँच पाता है।

 

पृष्ठ का भीगना (Wetness of Surface) 

  • जब किसी द्रव-ठोस युग्म के लिये adhesive force का मान, द्रवं के अणुओं के cohesive force के मान से अधिक होता है तो वह द्रव उस ठोस को गीला कर देता है। उदाहरण- जल के अणुओं से काँच का पृष्ठ भीग जाता है। 
  • जब किसी द्रव-ठोस युग्म के लिये adhesive force का मान, द्रव के अणुओं के cohesive force के मान से कम होता है तो वह द्रव उस ठोस को गीला नहीं कर पाता उदाहरण- पारे के अणु आपस में तो जुड़कर रहते हैं, किंतु काँच से पारा नहीं चिपकता है। 
  • तेल तथा जल के बीच आसंजक बल, जल के ससंजक बल से कम होता है परंतु तेल के ससंजक बल से अधिक होता है। यही कारण है कि तेल में डाली गई जल की बूंद सिकुड़कर गोली का रूप ले लेती है, जबकि जल पर डाली गई तेल की बूंद छोटी-छोटी बूंदों के रूप में फैल जाती है।

 

पृष्ठ तनाव (Surface Tension)

  • The property of the surface of a liquid that allows it to resist an external force, due to the cohesive nature of its molecules.”

The cohesive forces between liquid molecules are responsible for the phenomenon known as surface tension. 

                           

  • किसी द्रव का पृष्ठ तनाव वह बल है जो द्रव के पृष्ठ पर खींची गई काल्पनिक रेखा के इकाई लंबाई पर रेखा के लंबवत कार्य करता है यदि रेखा की लंबाई l  पर  f बल कार्य करता है तो पृष्ठ तनाव (T) = fl
  • द्रव का ताप बढ़ने पर पृष्ठ तनाव कम हो जाता है और क्रांतिक ताप(critical temperature) पर यह zero  हो जाता है
  • पष्ठ तनाव का SI मात्रक न्यूटन/मीटर या जूल/मीटर होता है। 
  •  हम जानते हैं कि किसी द्रव के अणुओं के मध्य ससंजक बल कार्य करते हैं। 

पृष्ठ तनाव से संबंधित कुछ घटनाएँ 

  • साबुन अथवा डिटर्जेंट जल में मिला देने पर जल का पृष्ठ तनाव कम हो जाता है। अतः साबुन का घोल कपड़ों के उन छोटे-छोटे छिद्रों में भी पहुँचता है, जहाँ शुद्ध जल नहीं जा सकता। इसके बाद साबुन व मैल के कण आपस में आसंजक बल के कारण चिपक जाते हैं और कपड़े को साफ कर देते हैं। 
  • यदि घोल को थोड़ा गर्म कर दिया जाए तो पृष्ठ तनाव और कम हो जाने के कारण यह कपड़ों की और अच्छी सफाई करता है। 
  • पतली सूई पृष्ठ तनाव के कारण ही पानी में तैरती रहती है। 
  • साधारण जल की अपेक्षा साबुन के घोल से अधिक बड़े बुलबुले बनाए जा सकते हैं। 
  • छिड़काव/फुहार से ठंडक उत्पन्न होती है। 
  • गर्म सूप का पृष्ठ तनाव कम होने के कारण यह जीभ के अधिक क्षेत्रफल पर फैलता है। अतः गर्म सूप ठंडे सूप से अधिक स्वादिष्ट लगता है। 
  • शेविंग ब्रश के बाल पानी से बाहर निकालने पर आपस में चिपक जाते हैं। 
  • स्थिर व शांत जल की सतह पर मच्छरों के लार्वा तैरते हैं, जबकि पानी में तेल या कैरोसीन आदि डाल देने पर लार्वा पानी में डूब जाते हैं तथा श्वसन न कर पाने के कारण मर जाते हैं। 
  • पारे की छोटी-छोटी बूंदें पृष्ठ तनाव के कारण गोलाकार रहती हैं, जबकि कुछ बड़े आकार की बूंदें गुरुत्व बल के कारण चपटी होने लगती हैं। 
  • वर्षा की बूंदें पृष्ठ तनाव के कारण ही गोलाकार होती हैं। 
  • तेल का पृष्ठ तनाव पानी की अपेक्षा कम होता है, यही कारण है कि तेल पानी के तल पर फैल जाता है। 
  • किसी बुलबुले का आकार उसमें भरी गैस के दबाव तथा पानी की फिल्म की त्रिज्या तथा मोटाई पर निर्भर करता है। छोटे बुलबुले में गैस का दबाव, बड़े बुलबुले की अपेक्षा अधिक होता है, अतः नली में एक-दूसरे के संपर्क में लाए जाने पर छोटा बुलबुला और छोटा तथा बड़ा बुलबुला और बड़ा हो जाता है। 

 

केशिकत्व (Capillarity) 

  • केशनली में द्रव के ऊपर चढ़ने अथवा नीचे उतरने की घटना को ‘केशिकत्व’ कहा जाता है। ऐसी नली जिसका छिद्र बहुत बारीक होता है, ‘केशनली’ कहलाती है। 
  • जो द्रव काँच को भिगोते हैं ‘वे काँच की केशनली में ऊपर की ओर चढ़ते हैं, जैसे-जल। 
  • केशनली में ऊपर चढ़ने वाले दो द्रवों में जिसका पृष्ठ तनाव अधिक होगा, वह केशनली में अधिक ऊपर चढ़ेगा। 
  • जो द्रव काँच को नहीं भिगोते हैं, वे काँच की केशनली में नीचे की ओर गिरते हैं, जैसे- पारा। 

 

केशिकत्व का कारण (Cause of Capillarity)

  • किसी द्रव का केशनली में ऊपर चढ़ने अथवा नीचे गिरने का कारण द्रव का पृष्ठ तनाव होता है।
  • केशिकत्व के कुछ व्यावहारिक उदाहरण :
  • लालटेन में मिट्टी का तेल, मोमबत्ती में पिघला हुआ मोम इनकी बत्ती में बनी केशनलियों के द्वारा ही ऊपर चढ़ता है और बत्तियाँ जलती रहती हैं। 
  • यदि जल से भरी बाल्टी में तौलिये का एक सिरा डाल दें तो जल तौलिये की असंख्य केशनलियों में चढ़ने लगता है और पूरा तौलिया धीरे-धीरे भीग जाता है। 
  • वर्षा होने के बाद या सिंचाई करने के बाद किसान खेतों की जुताई कर देते हैं, जिससे मिट्टी में बनी केशनलियाँ टूट जाएँ और पानी के कारण मिट्टी नम बनी रहे। 
  • निब वाले पेन की नोंक बीच से चीर दी जाती है, जिससे एक केशनली बन जाती है। इसी केशनली में स्याही लगातार चढ़ती रहती है और पेन लिखता रहता है। 
  • पौधों की जड़ों द्वारा मृदा से जल अवशोषित करना केशिकत्व की सहायता से होता है। जड़ों से पत्तियों तक जल का संवहन जाइलम ऊतकों द्वारा एक विशेष प्रक्रिया द्वारा होता है। अतः पौधों द्वारा जल अवशोषण और पत्तियों तक पहुँचाने में केशिकत्व के अतिरिक्त अन्य क्रियाएँ भी उत्तरदायी हैं।

 

उत्प्लवन (Upthrust or Buoyancy Force) 

  • जब हम लकड़ी के एक टुकड़े को पानी से भरी एक बाल्टी में डुबोते हैं तो हमें ऐसा महसूस होता है जैसे पानी के भीतर से लकड़ी पर कोई ऐसा बल ऊपर की ओर लग रहा है, जो उसके डूबने का प्रतिरोध करता है। इसी प्रकार जब हम लकड़ी को जल की सतह से नीचे ले जाकर छोड़ देते हैं तो हम पाते हैं कि वह तुरंत ही ऊपर सतह पर आ जाती है अर्थात् जल या किसी द्रव में किसी वस्तु को डुबोने पर उस पर ऊपर की ओर एक बल कार्य करता है। इस बल को ‘उत्प्लावन बल’ कहते हैं। उल्लेखनीय है कि गैसें भी द्रव की तरह उत्प्लावन बल लगाती हैं।
  • जब किसी वस्तु पर लगने वाला उत्प्लावन बल उसके भार से कम होता है तो वह वस्तु तरल में डूब जाती है, जबकि उत्प्लावन बल के भार से अधिक रहने पर वस्तु तरल की सतह पर ही तैरती रहती है।
  • किसी वस्तु पर लगने वाले उत्प्लावन बल का मान हमें आर्किमिडीज सिद्धांत से ज्ञात होता है।
  •  इस सिद्धांत के अनुसार, किसी द्रव में पूर्णतः या आंशिक रूप से डूबी किसी वस्तु पर लगने वाला उत्प्लावन बल उस वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होता है।” 
  • अतः जिस वस्तु का घनत्व द्रव से ज़्यादा होगा, उस पर लगने वाला उत्प्लावन बल उसके भार से कम होगा और वह डूब जाएगी, जैसे लोहे का टुकड़ा पानी में झूब जाता है। इसी प्रकार जिस वस्तु का घनत्व कम होगा, उसका आयतन ज्यादा होने के कारण उस पर उत्प्लावन बल उसके भार से ज्यादा होगा और वह डूबेगी नहीं बल्कि तैरती रहेगी। जैसेः लकड़ी का घनत्व पानी स कम होता है, अतः वह पानी की सतह पर तैरती रहती है।
  • लोहे का एक टुकड़ा पानी में डूब जाता है, जबकि पारे पर तैरता रहता है, क्योंकि लोहे का घनत्व पारे से कम मगर जल से ज़्यादा होता है। 
  • हाइड्रोजन गैस से भरा गुब्बारा वायुमंडल में ऊपर उठता चला जाता है, क्योंकि गैस भरे गुब्बारे का औसत घनत्व वायु से कम होता है। 
  • बर्फ का घनत्व जल की अपेक्षा कम (जल का 9/10 गुना) होता है। अतः घनत्व के अनुसार बर्फ का दसवाँ भाग (1/10) जल के बाहर निकला रहता है और बर्फ जल पर तैरती रहती है। 
  • जब एक पिंड को किसी द्रव में डुबाया जाता है तो उस पर दो बल कार्य करते हैं- 
    • (i) पिंड का भार, जो ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर कार्य करता है, 
    • (ii) द्रव का उत्क्षेप, जो ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर कार्य करता है। 
  • इसी प्रकार एक सूई पानी में डूब जाती है जबकि लोहे से बना जहाज़ पानी पर तैरता है क्योंकि जहाज़ के डूबे हुए भाग द्वारा हटाए गए पानी का भार संपूर्ण जहाज़ के भार के बराबर होता है। 

दाब (Pressure)

  • Pressure is defined as the physical force exerted on an object. The force applied is perpendicular to the surface of objects per unit area. 
  • The basic formula for pressure is F/A (Force per unit area). 
  • दाब का मात्रक न्यूटर/मीटर होता है, जिसे Pascals (Pa) भी कहते हैं। 
  • दाब एक अदिश(scalar) राशि है।
  • परिभाषा से स्पष्ट है कि एक नियत बल के लिये क्षेत्रफल जितना कम होगा, दाब उतना ही अधिक होगा। इसी कारण से नुकीली कील दीवार में आसानी से ठोकी जा सकती है।
  • गैस भरे गुब्बारे को नाखून की तुलना में सूई से फोड़ना आसान होता है क्योंकि सूई की नोक का क्षेत्रफल नाखून से बहुत कम होता है। 

 

वायुमंडलीय दाब (Atmospheric Pressure) 

  • It is the force exerted on a surface by the air above it as gravity pulls it to Earth. 
  • Atmospheric pressure is commonly measured with a barometer.
  • समुद्र तल पर यह 1.013 x 105 पास्कल (Pa) है। इसे 1 वायुमंडलीय दाब भी कहते हैं। 
  • बैरोमीटर की सहायता से मौसम संबंधी पूर्वानुमान भी लगाते हैं। 
  • बैरोमीटर का पाठ्यांक अचानक नीचे गिरने से आँधी आने की संभावना होती है। 
  •  बैरोमीटर का पाठ्यांक जब धीरे-धीरे नीचे गिरता है तो वर्षा होने की संभावना होती है। 
  • बैरोमीटर का पाठ्यांक जब धीरे-धीरे ऊपर चढ़ता है तो दिन साफ रहने की संभावना होती है। 
  • जब किसी झील की तली से उठकर वायु बुलबुला ऊपरी सतह तक आएगा तो उस पर तली की अपेक्षा दाब घटने लगता है जिसके कारण वायु के बुलबुले का आयतन बढ़ जाता है। 
  • समुद्रतल से ऊँचाई पर जाने पर वायुमंडलीय दाब कम होता जाता है, जिसके कारण- वायुयान में बैठे यात्री के फाउंटेन पेन की स्याही बाहर आ जाती है।

द्रव में दाब (Pressure in Liquid) 

  • द्रवों के अणुओं द्वारा बर्तन की दीवार अथवा तली के प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले बल को द्रव का दाब कहते हैं।
  • द्रव के अंदर किसी बिंदु पर द्रव के कारण दाब द्रव की सतह से उस बिंदु की गहराई (h), द्रव के घनत्व (d) तथा गुरुत्वीय त्वरण (g) के गुणनफल के बराबर होता है।

दाब = h*d*g

 

द्रव-दाब संबंधी पास्कल का नियम 

  • according to Pascal’s law, the intensity of pressure at any point in a fluid at rest is same in all direction
  • पास्कल के नियम के आधार पर विभिन्न यंत्र काम करते हैं हाइड्रोलिक ब्रेक, हाइड्रोलिक लिफ्ट, हाइड्रोलिक प्रेस इत्यादि। 

 

गलनांक तथा क्वथनांक पर दाब का प्रभाव 

  • ‘गलनांक पर प्रभाव 
    • गर्म करने पर जिन पदार्थों का आयतन बढ़ता है, दाब बढ़ने पर उनका गलनांक भी बढ़ता है। उदाहरण-मोम, घी इत्यादि 
    • गर्म करने पर जिनका आयतन घटता है, दाब बढ़ने पर उनका गलनांक भी कम हो जाता है। उदाहरण-बर्फ। 
  • क्वथनांक पर प्रभाव
    • सभी द्रवों का क्वथनांक दाब बढ़ने पर बढ़ जाता है।

श्यानता (Viscosity) 

  • Viscosity is a measure of a fluid’s resistance to flow.
  • absolute or dynamic viscosity is the property of a liquid which offers resistance to the movement of one layer of liquid over another adjacent layer of liquid
  •  si unit =N-s/mCGS unit  =  poise ,1 poise = 0.1 N-s/m2
  • The viscosity of an ideal liquid is ‘zero’.
  • श्यानता तरलों (द्रवों एवं गैसों) का गुण है। यह अणु ओं के मध्य लगने वाले संजक बलों के कारण होती है। गैसों में द्रवों की तुलना में श्यानता बहुत कम होती है। 
  •  ताप बढ़ने पर द्रवों की श्यानता घटती है, परंतु गैसों की श्यानता बढ़ती है। 
  • किसी तरल की श्यानता को श्यानता गुणांक (Coefficient of Viscosity) द्वारा मापा जाता है।      

                 Viscosity

kinematics viscosity 

  • the ratio of dynamic viscosity to the density of the liquid is called kinematics viscosity 
  • in SI unit the unit of kinematic viscosity is m2/sec and in CGS unit it is expressed in stoke such that 1 stoke – 1 cm2/s
  • Ideal fluid – fluid  which has no viscosity is known as ideal fluid

सीमांत वेग (Terminal Velocity) 

  • जब कोई वस्तु किसी तरल में गिरती है तो प्रारंभ में उसका वेग गुरुत्व त्वरण के कारण बढ़ता जाता है, किंतु कुछ समय पश्चात् वह नियत वेग से गिरने लगती है। इस वेग को ही वस्तु का ‘सीमांत वेग’ कहते हैं। 
  • सीमांत वेग के बाद मुक्त रूप से गिरती किसी वस्तु के वेग का न बढ़ना वास्तव में तरल की श्यानता के कारण होता है। यही कारण है कि वर्षा की बूँदें वायुमंडल में एक नियत वेग (सीमांत वेग) धारण करने के बाद उसी वेग से नीचे आती हैं।

 

धारा रेखीय प्रवाह (Streamline Flow) 

  • द्रव का ऐसा प्रवाह जिसमें किसी fixed poin पर प्रवाह की speed and direction निश्चित बनी रहती है, धारा रेखीय प्रवाह कहलाता ह।
  • धारा रेखीय प्रवाह के अधिकतम वेग को ‘क्रांतिक वेग’/’Critical Velocity’ कहते हैं अर्थात् धारा रेखीय प्रवाह के वेग की वह उच्च सीमा, जिसके बाद द्रव का प्रवाह धारा रेखीय न होकर विक्षुब्ध हो जाए, ‘क्रांतिक वेग’ कहलाती है। 
  • यदि द्रव प्रवाह का वेग क्रांतिक वेग से कम होता है तो प्रवाह उसकी श्यानता पर निर्भर करती है, जबकि क्रांतिक वेग से अधिक होने पर घनत्व पर। उदाहरण-ज्वालामुखी से निकलने वाला लावा अत्यधिक गाढ़ा (ज्यादा श्यानता) होने के बाद भी तेजी से बहता है, क्योंकि घनत्व अपेक्षाकृत कम होता है और घनत्व ही वेग को निर्धारित करता है। 

 

बरनौली का सिद्धांत (Bernaulli’s Theorem)

  • According to Bernoulli’s theorem, the sum of pressure energy, kinetic energy, and potential energy per unit mass of an incompressible, non-viscous fluid in a streamlined flow remains constant.
  • In other words, when an ideal fluid flows in a a streamline  through a tube, the sum of the total energy (pressure energy, kinetic energy and potential energy) of its unit volume at each point in its path is fixed.

 

बरनौली के सिद्धांत के अनुप्रयोग(Applications of Bernoulli’s Principle) 

  • तेज़ी से चलती हुई गाड़ी के समीप प्लेटफॉर्म पर खड़े व्यक्ति तथा अन्य वस्तुओं (कागज़, पत्ते आदि) का गाड़ी की तरफ खींचा जाना। 
  • हवाई जहाज़ को ऊपर उठाने में। 
  • आंधी में टिन की छत का उड़ जाना।

घनत्व (Density)

  • The density of a substance is its mass per unit volume. 
  • The symbol most often used for density is ρ although the Latin letter d can also be used. 
  • घनत्व (Density) = mass द्रव्यमान (M)volume आयतन (V)
  • घनत्व किसी पदार्थ के घनेपन की माप है। 
  • धनत्व की इकाई किग्रा. प्रति घन मीटर होती है। इसका विमीय सूत्र ML-3 होता है। 

आपेक्षिक घनत्व (Relative Density) 

  • the ratio of the density of a substance to the density of a standard substance(Reference Material) under specified conditions. For liquids and solids the standard is usually water at 4°C or some other specified temperature.
  • बादल, वायुमंडल में तैरते हैं क्योंकि गर्मी के दिनों में वायुमंडल में उपस्थित जलवाष्प गर्मी पाकर गर्म होती है जिससे जलवाष्प का घनत्व घटता है। घनत्व घटने के कारण जलवाष्प हल्की होकर ऊपर उठती है। वायुमंडल के ऊपरी भाग में दाब एवं ताप कम होने के कारण ये जलवाष्प पानी की छोटी-छोटी बूंदों में परिवर्तित होकर बादल के रूप में तैरती रहती है। 
  • बर्फ का घनत्व जल के घनत्व का 9/10वाँ होता है। अतः शुद्ध जल में बर्फ का 90% भाग पानी के अंदर और 10% भाग पानी के बाहर होना चाहिये। आर्कटिक एवं अंटार्कटिक महासागरों मेंfloating ice दिखाई पड़ती है। floating ice का 8/9वाँ भाग जल की सतह के अंदर बना रहता है क्योंकि समुद्री जल लवणीय होने के कारण अधिक घनत्व का होता है लेकिन इससे निर्मित बर्फ लवणीय नहीं होती, वह शुद्ध होती है। अतः आइसबर्ग का 1/9वाँ भाग समुद्र की सतह के ऊपर होता है।