अर्थशास्त्र एवं अर्थव्यवस्था : एक नज़र में Economics and Economy: At a Glance : SARKARI LIBRARY

 अर्थशास्त्र(Economics)

अर्थशास्त्र का वर्गीकरण

  1. व्यष्टि अर्थशास्त्र (Micro Economics)
  2. समष्टि अर्थशास्त्र (Macro Economics)

व्यष्टि अर्थशास्त्र एवं समष्टि अर्थशास्त्र में अंतर

अर्थव्यवस्था(Economy)

अर्थव्यवस्था के क्षेत्र(Sectors of Economy)

  1. प्राथमिक क्षेत्र (Primary Sector)
  2. द्वितीयक क्षेत्र (Secondary Sector)
  3. तृतीयक क्षेत्र (Tertiary Sector)
  4. चतुर्थक क्षेत्र (Quaternary  Sector)
  5. पंचक क्षेत्र (Quinary Sector)

अर्थव्यवस्था का वर्गीकरण/स्वरूप

राज्य की भूमिका के आधार पर

  1. पूंजीवादी अर्थव्यवस्था ( Capitalist Economy)
  2. राज्य/ समाजवादीअर्थव्यवस्था ( state/Socialist Economy)
  3. मिश्रित अर्थव्यवस्था ( Mixed Economy)

विकास की विभिन्न अवस्थाओं के आधार पर

  1. विकसित अर्थव्यवस्था (Developed economy)
  2. विकासशील अर्थव्यवस्था (Developing economy)
  3. अल्पविकसित अर्थव्यवस्था (Underdeveloped economy)

विभिन्न क्षेत्रों की भूमिका के आधार पर

  1. कृषक अर्थव्यवस्था (Agrarian economy)
  2. औद्योगिक अर्थव्यवस्था (Industrial economy)
  3. सेवा अर्थव्यवस्था (Service economy)

शेष विश्व के साथ अंतर्संबंधों के आधार पर 

  1. खुली अर्थव्यवस्था (Open economy)
  2. बंद अर्थव्यवस्था (Closed Economy)

नियोजन (Planning)के आधार पर

  1. योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था (Planned economy)
  2. गैर-योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था(Unplanned economy)

निर्भरता (dependency)के आधार पर 

  1. आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था(self dependent economy)
  2. आश्रित अर्थव्यवस्था(dependent ecomomy)
  3. परस्पर-निर्भर अर्थव्यवस्था(Mutually dependent economy)

“अर्थशास्त्र वह विषय है, जिसके अंतर्गत वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, वितरण एवं उपभोग की प्रक्रिया का अध्ययन किया जाता है । 

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एडम स्मिथं ने 1776 में प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘द वेल्थ ऑफ नेशंस’ (The Wealth of Nations) में अर्थशास्त्र को ‘धन का विज्ञान’ कहा है।


  • Father of economics: एडम स्मिथं
  • Father of Indian economics:
  • Father of Indian Economic Reforms”: P. V. Narasimha Rao


व्यष्टि अर्थशास्त्र (Microeconomics) 

  • व्यष्टि अर्थशास्त्र को सूक्ष्म अर्थशास्त्र भी कहा जाता है
  • व्यष्टि अर्थशास्त्र छोटी आर्थिक इकाइयों के आर्थिक मुद्दों से संबंधित है, जैसे-एक व्यक्ति, एक उपभोक्ता, एक फर्म इत्यादि।
  • व्यष्टि अर्थशास्त्र को प्राय: ‘कीमत सिद्धांत‘ भी कहा जाता है, क्योंकि यह बाज़ार में कीमत के निर्धारण से संबंधित है।
  • व्यष्टि अर्थशास्त्र की यह मान्यता है कि समष्टि चर स्थिर रहते हैं।
  • इसलिये जब हम किसी बाज़ार विशेष में कीमत निर्धारण का अध्ययन करते हैं तब यह मानते हैं कि सामान्य कीमत स्तर स्थिर है।


व्यष्टि अर्थशास्त्र के मुख्य घटक हैं-

  • उपभोक्ता व्यवहार का सिद्धांत(consumer behavior theory)
  • उत्पादक व्यवहार का सिद्धांत(theory of productive behavior)
  • कीमत सिद्धांत(price theory)

समष्टि अर्थशास्त्र(Macroeconomics)

  • समष्टि अर्थशास्त्र को बृहद अर्थशास्त्र भी कहा जाता है
  • समष्टि अर्थशास्त्र संपूर्ण अर्थव्यवस्था के वृहद् स्तर के आर्थिक मुद्दों से संबंधित है, जैसे- रोज़गार, मौद्रिक नीति, राजकोषीय नीति, बजट इत्यादि ।
  • समष्टि अर्थशास्त्र को प्राय: ‘आय तथा रोज़गार सिद्धांत‘ भी कहा जाता है, क्योंकि यह संपूर्ण अर्थव्यवस्था में समग्र उत्पाद तथा सामान्य कीमत स्तर के निर्धारण से संबंधित है।
  • समष्टि अर्थशास्त्र की यह मान्यता है कि व्यष्टि चर स्थिर रहते हैं। इसलिये जब हम अर्थव्यवस्था में सकल घरेलू उत्पाद का अध्ययन करते हैं तब यह मानते हैं कि सकल घरेलू उत्पाद का वितरण स्थिर है।

समष्टि अर्थशास्त्र के मुख्य घटक हैं-

  • संतुलित उत्पाद तथा रोज़गार स्तर से संबंधित सिद्धांत
  • राजकोषीय नीति(Treasury/Fiscal policy)
  • मौद्रिक नीति(Monetary policy)
  • मुद्रास्फीति एवं अवस्फीति(inflation and deflation)
  • सरकारी बजट(budget)
  • मुद्रा की आपूर्ति एवं साख सृजन(money supply and credit creation)
  • विनिमय दर(exchange rate)
  • भुगतान संतुलन(balance of payments)

अर्थव्यवस्था के क्षेत्र (Sectors of Economy)

अर्थव्यवस्था की आर्थिक गतिविधियों को निम्नलिखित तीन श्रेणियों अथवा क्षेत्रों में बाँटा गया है-

प्राथमिक क्षेत्र (Primary Sector) 

  • अर्थव्यवस्था का वह क्षेत्र जहाँ प्राकृतिक संसाधनों को उत्पाद के रूप में प्राप्त किया जाता है इसके अंतर्गत अर्थव्यवस्था के प्राकृतिक क्षेत्रों का लेखांकन किया जाता है,
  •  इसे ‘कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र‘ भी कहा जाता है।

 इसमें निम्नलिखित आर्थिक क्रियाओं को सम्मिलित किया जाता है

  • कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र(Agriculture and Allied Sectors)
  • वानिकी(forestry)
  • मत्स्य पालन(Fisheries)
  • खनन एवं उत्खनन(mining and quarrying)


द्वितीयक क्षेत्र (Secondary Sector)

  • अर्थव्यवस्था का वह क्षेत्र जो प्राथमिक क्षेत्र के उत्पादों को अपनी गतिविधियों में कच्चे माल की तरह उपयोग करता है, ‘द्वितीयक क्षेत्र ‘ कहलाता है। 
  • इस क्षेत्र के अंतर्गत अर्थव्यवस्था के प्राथमिक क्षेत्र के उत्पादों के प्रयोग से विनिर्मित वस्तुओं के उत्पाद का लेखांकन किया जाता है। 
  • इसे ‘औद्योगिक क्षेत्र‘ भी कहा जाता है। 

इसमें निम्नलिखित आर्थिक गतिविधियाँ शामिल होती हैं

  • विनिर्माण(manufacturing)
  • निर्माण(Construction)
  • गैस, जल तथा विद्युत आपूर्ति


तृतीयक क्षेत्र (Tertiary Sector) 

  • इस क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की सेवाओं का उत्पादन किया जाता है,इसलिये इस क्षेत्र को ‘सेवा क्षेत्र’ भी कहा जाता है । 
  • यह क्षेत्र अर्थव्यवस्था के प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्र को अपनी सेवाएँ प्रदान करता है । 

इसमें निम्नलिखित आर्थिक क्रियाएँ शामिल होती हैं

  • व्यापार, होटल तथा रेस्तराँ
  • परिवहन, संचार तथा भंडारण
  • पर्यटन
  • वित्तीय सेवाएँ – बैंकिंग, बीमा
  • चिकित्सा
  • रियल एस्टेट
  • अन्य सेवाएँ
  • लोक प्रशासन एवं प्रतिरक्षा


चतुर्थक क्षेत्र (Quaternary Sector)

  • चतुर्थक क्षेत्र तृतीयक क्षेत्र का एक उन्नत रूप है, क्योंकि इसमें ज्ञान क्षेत्र से संबंधित सेवाएँ शामिल की जाती हैं। वर्तमान में सूचना आधारित सेवाओं की मांग में बहुत अधिक वृद्धि हो रही है।
  •  चतुर्थक क्षेत्र से संबंधित गतिविधियों में मुख्यतः सूचनाओं का संग्रहण करना, सूचनाओं का अध्ययन एवं विश्लेषण करना, आवश्यकतानुसार सूचनाओं को प्रस्तुत करना इत्यादि शामिल किया जाता है । 
  • चतुर्थक क्षेत्र से संबंधित सेवाओं में विशेषीकृत ज्ञान, तकनीकी कौशल, प्रबंधकीय कौशल तथा विश्लेषणात्मक समझ का प्रयोग किया जाता है। 
  • साथ ही इसमें म्यूचुअल फंड प्रबंधक, पोर्टफोलियो प्रबंधक, कर प्रबंधक, सांख्यिकीविद, सॉफ्टवेयर डेवलपर्स, शोध एवं अनुसंधानकर्ता इत्यादि उन्नत किस्म की विशेषीकृत सेवाओं को शामिल किया जाता है ।


पंचक क्षेत्र (Quinary Sector)

  • पंचक क्षेत्र उच्च किस्म की सेवाओं से संबंधित है । 
  • इस क्षेत्र में गोल्ड कॉलर प्रोफेशनल्स को शामिल किया जाता है, जो अपने-अपने क्षेत्र के उच्च विशेषज्ञ होते हैं। ये अपने से संबंधित क्षेत्रों में नीति निर्माण, निर्णय निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 

पूंजीवादी अर्थव्यवस्था (Capitalist Economy)

  • जिस अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साधनों पर निजी स्वामित्व पाया जाता है तथा वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन निजी लाभ के लिये किया जाता है, उसे ‘पूंजीवादी अर्थव्यवस्था’ कहते हैं।
  • पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन एवं वितरण में सरकार की भूमिका न्यूनतम होती है। 
  • निजी क्षेत्र द्वारा वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन एवं वितरण सुनिश्चित किया जाता है एवं बाज़ार की शक्तियों अर्थात् मांग एवं पूर्ति द्वारा इनका मूल्य निर्धारण किया जाता है। 
  • पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में आर्थिक निर्णय लाभ को अधिकतम करने के उद्देश्य से लिये जाते हैं। 
  • पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के सबसे अच्छे उदाहरण संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, जापान आदि विकसित देश हैं। 
  • पूंजीवादी अर्थव्यवस्था की विचारधारा एडम स्मिथ की पुस्तक ‘द वेल्थ ऑफ नेशंस’ में 1776 में प्रस्तुत की गई। 
  • श्रम विभाजन पर बल देते हुए एडम स्मिथ ने अर्थव्यवस्था में सरकारी अहस्तक्षेप (Non-interference by the Government) की नीति अपनाए जाने का समर्थन किया। 

‘अहस्तक्षेप की नीति’ (Laissez-faire) के अनुसार वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन एवं वितरण की प्रक्रिया में राज्य/सरकार को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिये एवं यह कार्य बाज़ार की शक्तियों अर्थात् मांग एवं पूर्ति द्वारा किया जाना चाहिये ।

पूंजीवादी अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ:

  • निजी संपत्ति का अधिकार;
  • अधिकतम लाभ का उद्देश्य;
  • आर्थिक स्वतंत्रता;
  • प्रतियोगिता की स्थिति;
  • मांग और पूर्ति का महत्त्व;
  • वस्तुओं एवं सेवाओं की विविधता एवं गुणवत्ता;
  • राज्य एवं सरकार के हस्तक्षेप का अभाव।

राज्य / समाजवादी अर्थव्यवस्था (State/Socialist Economy)

  • राज्य अर्थव्यवस्था का विचार जर्मन दार्शनिक ‘कार्ल मार्क्स’ द्वारा दिया गया। 
  • राज्य अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन एवं वितरण पर राज्य का अथवा सामूहिक स्वामित्व होता है। इसमें सरकार के पास सारी शक्तियाँ मौजूद होती हैं। 
  • इसमें उत्पादन, आपूर्ति और कीमत सबका निर्णय सरकार द्वारा लिया जाता है। 
  • आर्थिक निर्णय सामाजिक कल्याण को ध्यान में रखकर लिये जाते हैं। 
  • ऐसी अर्थव्यवस्थाओं को सामान्यतया ‘केंद्रीकृत नियोजित अर्थव्यवस्था’ भी कहते हैं। 

राज्य अर्थव्यवस्था के 2 रूप होते हैं

  1. समाजवादी अर्थव्यवस्था 
  2. साम्यवादी अर्थव्यवस्था 

समाजवादी अर्थव्यवस्था : 

  • समाजवादी अर्थव्यवस्था के अंतर्गत सभी नागरिकों को वस्तुओं एवं सेवाओं का समान वितरण किया जाता है
  • पूर्व सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था को ‘समाजवादी अर्थव्यवस्था’ कहते हैं

साम्यवादी अर्थव्यवस्था(Communist Economy) :

  • अर्थव्यवस्था में प्रत्येक व्यक्ति से उसकी क्षमतानुसार कार्य एवं प्रत्येक को उसकी आवश्यकतानुसार प्रतिफल अर्थात् वस्तुएँ और सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं। 
  • 1985 से पहले चीन की अर्थव्यवस्था को ‘साम्यवादी अर्थव्यवस्था’ कहते हैं ।

राज्य/समाजवादी अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ:

  • उत्पादन के संसाधनों पर सामूहिक स्वामित्व;
  • केंद्रीकृत नियोजन;
  • आर्थिक विषमताओं में कमी;
  • वर्ग संघर्ष की समाप्ति;
  • राज्य एवं सरकार की व्यापक भूमिका।

मिश्रित अर्थव्यवस्था (Mixed Economy )

  • मिश्रित अर्थव्यवस्था एक विशेष प्रकार की अर्थव्यवस्था है, जिसमें राज्य अर्थव्यवस्था एवं पूंजीवादी अर्थव्यवस्था दोनों की विशेषताएँ विद्यमान होती हैं। 
  • इसमें सरकार / राज्य अथवा सार्वजनिक क्षेत्र तथा निजी क्षेत्र दोनों परस्पर सहयोगी के रूप में कार्य करते हैं। 
  • मिश्रित अर्थव्यवस्था में कुछ आधारभूत और महत्त्वपूर्ण क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों की ज़िम्मेदारी केंद्र एवं राज्य सरकारों की होती है और बाकी आर्थिक गतिविधियों को बाज़ार के निजी समूहों के लिये छोड़ दिया जाता है। 
  • मिश्रित अर्थव्यवस्था में आर्थिक क्रियाओं को बाज़ार शक्तियों अर्थात् मांग और पूर्ति की स्वतंत्र अंतःक्रिया पर छोड़ दिया जाता है, परंतु इसमें सरकार एक विनियामक के रूप में अपना अनुकूलतम नियंत्रण भी बनाए रखती है। 
  • मिश्रित अर्थव्यवस्था में आर्थिक निर्णय सामाजिक कल्याण एवं अधिकतम लाभ दोनों उद्देश्यों को ध्यान में रखकर लिये जाते हैं। 
  • मिश्रित अर्थव्यवस्था का सबसे अच्छा उदाहरण भारतीय अर्थव्यवस्था है ।

मिश्रित अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ:

  • सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्र का सह-अस्तित्व;
  • आर्थिक नियोजन;
  • सरकार की नियामक के रूप में भूमिका;
  • व्यक्तिगत स्वतंत्रता ।

कृषक अर्थव्यवस्था (Agrarian Economy)

  • यदि किसी अर्थव्यवस्था के सकल घरेलू उत्पादन में प्राथमिक क्षेत्र अर्थात् कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र का योगदान 50 प्रतिशत या इससे अधिक हो एवं लगभग इसी अनुपात में लोग आजीविका के लिये कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों पर निर्भर हों तो उसे ‘कृषक अर्थव्यवस्था’ कहा जाता है।
  • स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत एक कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाला देश था।

औद्योगिक अर्थव्यवस्था (Industrial Economy )

  • यदि किसी अर्थव्यवस्था के सकल घरेलू उत्पाद में द्वितीयक क्षेत्र अर्थात् औद्योगिक क्षेत्र का हिस्सा 50 प्रतिशत या इससे अधिक हो तथा इसी अनुपात में इस क्षेत्र पर लोगों की आजीविका के लिये निर्भरता हो तो उस अर्थव्यवस्था को ‘औद्योगिक अर्थव्यवस्था’ कहा जा सकता है, जैसे- चीन

सेवा अर्थव्यवस्था (Service Economy)

  • यदि किसी अर्थव्यवस्था के सकल घरेलू उत्पादन में तृतीयक क्षेत्र अर्थात् सेवा क्षेत्र का हिस्सा 50 प्रतिशत या इससे अधिक हो तथा इसी अनुपात में इस क्षेत्र पर लोगों की आजीविका के लिये निर्भरता हो तो उस अर्थव्यवस्था को ‘सेवा अर्थव्यवस्था’ कहा जा सकता है, जैसे- अमेरिका, ब्रिटेन, जापान

खुली अर्थव्यवस्था (Open Economy )

  • खुली अर्थव्यवस्थाएँ वे अर्थव्यवस्थाएँ होती हैं, जो विश्व के अन्य देशों के साथ वस्तुओं एवं सेवाओं के व्यापार एवं निवेश के लिये स्वतंत्र होती हैं। वर्तमान में विश्व की लगभग सभी अर्थव्यवस्थाएँ खुली अर्थव्यवस्थाएँ हैं ।

बंद अर्थव्यवस्था (Closed Economy)

  • बंद अर्थव्यवस्थाएँ वे अर्थव्यवस्थाएँ होती हैं, जिनका अन्य अर्थव्यवस्थाओं के साथ कोई आर्थिक संबंध नहीं होता अर्थात् ये अर्थव्यवस्थाएँ विश्व के अन्य देशों के साथ वस्तुओं एवं सेवाओं के व्यापार एवं निवेश के लिये स्वतंत्र नहीं होती हैं।


अभ्यास प्रश्न(based on Previous Year Questions)

  • बंद अर्थव्यवस्था में ना तो निर्यात और ना ही आयात होता है.
  • भारतीय अर्थव्यवस्था एक विकासशील अर्थव्यवस्था है
  • भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएं 
    • कृषि की प्रधानता 
    • न्यून प्रति व्यक्ति आय 
    • बृहद बेरोजगारी
    • श्रम की न्यून कार्यक्षमता 
    • पूंजी निर्माण की न्यूनतम दर
  • बाजार अर्थव्यवस्था में सरकार निर्णय निर्माण प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करती है
  • भारत में बेरोजगारी से संबंधित मुद्दों का अध्ययन macro स्तर पर किया जाता है
  • किसी देश में आर्थिक संवृद्धि अनिवार्य रूप से होगी यदि उस देश में पूंजी निर्माण होता है

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