(Du Bihak Durati) दू बिहाक दुरति

7. दू बिहाक दुरति

KeyPoints – एगो लोक, दो विवाह , बड़ी पत्नी , छोटी पत्नी (चालाक ), गुंदली तेल

दू बीहाँइ दुरगति
एगो गाँव रह-हलक एगो लोक । ऊ एकदम एकाइ रह-हलक । ना माइ ना आर केउ। मेनेक, ओकर खेत-बारी आर टॉइड़ दमे रह-हलइ। सइले ऊ तनी चाँड़ा-चाँड़िये बीहा कइर लेलक । घरें बहु अइलइ ! तयुँ लोकेक टानाटानिये! काम बेस-से सम्हरे नाँइ ! तखन ऊ आर एगो बीहा कइर लेलकदूइयो बहु गुलइन पारी बॉंइट के घरें आर बाहरे काम पाइट सारे लागला। थोरना दिन बेसे भाभें काम चल-लइ। मेनेक चाँढ़ी दुवे सइनिनेक मेका—मेकी, उल्खा- पँइचा सुरू भइ गेलइन ।
आर फइर, छोटकी बहु टी तनी बेसी चनफन आर चेठगर रह-हलइ। से-ले आपरूपी मरदवाक तनी बेसी टान भइ गेलइ छोटकिक बाटे । छोटकिक बाटें मरदेक बेसी टान टा भांइज के बड़की आरो पसपसी मोइर गेलिक । ऊ मने मन भाभे लागलइ जे कि कइर के ऊ छोटकी के मरदवाक जीहेक बइरी बनाइ देतइ ।
भाभइत-भाभइत ओकराँ एगो चाइल सुझलइ । एकदिन, जखन छोटकी मरद टाक संग बाहर बाटे काम करे ले गेल हलइ, तखने बड़की टी बिन चार छोड़वल गुंदली तेल मेसाइ देलइ । ऊ भाभली जे तेलें सानाइल गुंदली टा हामर सइतिन कुटेहे नाँइ पारतिक । आर चार नाँइ बहरइलें भात रांधइतें देरी भइ जितइ । बस छोटकिक उपर मरदवा राइग जितइ आर बड़की तकर पेटेक भीतर आइ जितिक ।
आगुक दिने छोटकिक पारी रह हलइ घरेक काम करइक । बड़की गेलिक मरद संग काम करेले। तो छोटकी बासी पाइट साइर भात राँधेले गुंदलीक चार छोड़वे बइसइल। मेनेक ई की। कुटते – कुटते ठाढ़ बसियान भइ अइलइ। मेंतुक गुंदली चार बहरइतें बाहराइ नाँइ खोजइ। तखन तर-हथवें उठाइके जइसीं एक चुटकी गुंदली टाके मइस के देखलइ, छोटकी बुझ गेलइ । तेल मखवल गुंदली।
छोटकिक बुझइतें देरी नाँइ लागलइ जे ओकरों साधेले ओकर सइतिने ई कुटचाइल गुलइन करल हिक । बस, चट कइर के ऊ दोसर घर ले पँइचा चार लइ आनलइ । मरदेक घर घुरेक आगवे राधा-बाँटा साइथ । राधा-राँधिक सब काम निंघरल देइख बड़की आरो लहइर उठलइ । तखन दोसर कुटचाइल चलेक बत्तर भांजे लागलइ ।
तनी जिराइ के मरदवा ढोढ़ा बाटे गेलक नाहाइले। छोटकी गेलिक डाड़ी बाटे ले पानी आनेतखने छोटकिक बॉटल मसालाले लुचइक के बड़की एगो झोर देल, तियन खुब मन दइके राँधाइल । तनी पालवा मेसाइ दइके भाभइल जे ओकर राँधल ई तियनवें मरदवा अबरी ओकरे भइ जितइ सुघर-सोवादेक जोरें।
नाहाइकें घुरलें छोटकी खाइक परइस देलइ आर पीर्हा-पानी कइर के खाइले देलइ । बड़की जिराइक निंग्सें तनी बीचें गड़गड़ा टाइन-टाइन के बइस रहलइ, मरदवाक बाठीं भाइल – भाइल के । खइते – खइते मरद टा बजइक उठलइ जे झोर देल तियन टा-ले तो भूंजले टा सवादगर लाग-हइ
एतना सुनबाई आर बड़किक तो एड़ीक लहइर चाँदीं चाइप गेलइ । हुँका टानते-टानथीं ऊ गरइज उठइल, ” हाँ छोटकी तो सब रकमें तोर खातिर बेसी गुड़िया लागतउ ! हामे तो तीता – काँसा ! छोटकी गुड़िया! छोटकिक काम गुड़िया । ओकर सब कुछ गुनगर आर गुड़िया ।
छोटकी बतवा माठेक जिगिस्तें कह-लइ, “दीदी, अइसन छोट बात करे गेलें झागरा होवे। अइसन बादा-बादिक बात नाँइ कइर के सुगुमे रहेक चाही।” बड़कीं गुरगुराइ कें अबरी छोटकिको गुड़रलइ, “तोहुँ ओकरे पीठ उपरी उठवें । थाम तो तोराँ देखहिअउ ।”
एतना कइह के हुँकवा थोसइर देलइ आर छोटकिक कसकसाइ के धइर के घिसरवे लागलइ । कहलइ जे ओकरा आइज खेदा- विदा दइए देतइ । मरदवें खइते – खइथीं माना करलइ, मेनेक ततके दुइयो सइतिन खेपचंडी! के जे आर मइ कहल सुने आर धातांग-पातांग राखे! बांधल चुइल खुइज के पाथाइर गेलइन, लुगा-फाटा फाटे-फेंकाइ लागलइन, ताव धामड़ा-धामड़ी लागले हइ। सेसें बड़की बाप घार पाराइल। हिंदे ई बात सुइन के सभिन भाभला जे एके बिहाक परथा टा तोरल के दाएँ ई नाकें नुन आर नाना-थाना ।