धनेक धधइनि (Dhanek Dhadhaini)

2 धनेक धधइनि (Dhanek Dhadhaini) – धन का घमंड (संकलनकर्ता – शांति भारत)

  • पुस्तक – खोरठा लोकसाहित्
  • प्रकाशक – झारखण्ड जनजातीय कल्याण शोध सस्थान ,मोरहाबादी ,रांची ,कल्याण विभाग झारखण्ड सरकार 
    • प्रथम संस्करण – 2012   “©www.sarkarilibrary.in”
  • संपादक – 
    • प्रधान संपादकए. के. झा
    • अन्य संपादक
      • गिरिधारी गोस्वामी आकाशखूंटी 
      • दिनेश दिनमणि
      • बी एन ओहदार
      • श्याम सुन्दर महतो श्याम 
      • शिवनाथ प्रमाणिक
      • चितरंजन महतो “चित्रा’
  • रूपांकनगिरिधारी गोस्वामी आकाशखूंटी
  • मुद्रक – सेतु प्रिंटर्स , मोरहाबादी ,रांची 
  • धनेक धधइनि का अर्थ – धन का घमंड 
  • धनेक धधइनि का संकलनकर्ताशांति भारत

शांति भारत

  • शांति भारत का जन्म – 6 अप्रैल 1965, अन्य -(6 अप्रैल 1963)  चोफंद गांव, बोकारो
  • पिता का नाम – कुंजू महतो 
  • माता – रतनी  देवी खोरठा एकांकी  “©www.sarkarilibrary.in”
  • कृति
    • लउतन डहर (कविता)
    • बेलनदरी (लोक गीत संग्रह),तितकी पत्रिका में प्रकाशित 
    • जुगेक मरम (कविता )
    • सोहन लागे रे (कविता )
    • माटिक घरे चाँद तोहर (कविता संग्रह  )
    • बोरवा अड्डाक अखय बोर  (श्रीनिवास पानुरी से सम्बंधित सस्मरण )

 

Key Points – बुढ़ी, बेटा चमटू, रूपाक एगो टाका, बेपार, हाट, बांदर, राजाक महल,

इस कहानी का मूल संदेश है कि धन का अहंकार नहीं करना चाहिए।  गलत तरीके से, गलत स्रोत से आए धन से, आदमी का चरित्र बिगड़ जाता है।  वह उसकी भी कदर नहीं करता जिसके जरिए धन आया है। “©www.sarkarilibrary.in”

 

एगो गाँवे एगो बुढ़ी हली। ओकर एगो साधेक  बेटा हलइ चमटू । भूखें दुखें कोन्हों रकम दुइयो साग-माड़ें दिन काटऽहला। एक दिन बुढ़ी चमटू के रूपाक एगो टाका दइकें कहलइ – “नुनू बाजार जउ आर कोन्हों बेपार कर। नांय तो की कइर घार चलइयें ।”

 

रूपाक टाका लइके चमटू हाट गेल। सारा दिन हाटे दोकान दारी देइख के चमटू थइक गेल, तावो कोन्हों चीज ओकरा पसिंद नाय भेलइ। बेचारा करत तो करत की? छूछे हाथ घार घुरलें मायेक दून्दरनी सुने हतइ। तखन ढेइर बुझ-बाइझ के देखल आर घुरती बेरें पाटाइ-सोटाइ के एगो बांदर किनल आर मुँह अंधरे घर घुरल ।

 

बेटाक काम देइखकें बुढ़ी रागे चमटू के धमकावे लागलइ – “हाँ रे कुलंगार, हाइ भातवा, ई बांदर टा की करबें? एहे लुरीं तऽ बापा ढोकसा आधे दिने टिंगरलोउ। तोहूँ सइये डहर धरलें ?” एतना कही के छमइक भीतर बाटें दुकली।“©www.sarkarilibrary.in”

 

बेचारा चमटू तो सुखाय गेल। एक तो सारा दिन भुखें – पियासँ थइक-मोइर के कते हुवें एगो बांदर आनल, उपर से माएक बोली सुइन के अथिर भइ उठल। चमटू के कांदू-मांदू देइख के बंदर बुढ़ी ठिने गेल आर कहलइ- “माय, चमटू के नाय धमकाहीं हामें खुभे  सोना- रूपा आइन देबोउ

 

दोसर दिन बांदर झलफले उठल आर बहुत धुर एगो राजाक महले गेल। एगो गांइठें मनेक-  मतन सोना-रूपा बांधल आर घार आइन के बुढ़िक दइ देल। बुढ़ी एते सोना-रूपा देइखकें गदगदाइ उठली। चमटू के तो चुमाक मारी तड़े नाय आर बंदरो के “बेटा-बेटा’ कहे लागली । वइसने बांदर कधियों रूपाक टाका आने लागल तो कधियो मूंगा-मोती

 

देखते-देखइते बांदरेक परतापें चमटू राजा बइन गेलपवार धारेक जघें बोड़- बोड़ गढ़-गुड़ा बइन के तइयार । लाखेक कारवार चले लागलइ । घोड़ा हाँथीं घार भोइर गेलइ । दूधेक बान बोहे लागलइ । गाँवेक कते-कते लोक चमटूक घारें मुनीस खटे खातिर हामागोड़ी दिये लागला । परेक खाइकें पइरकल पुरोहित गुलइन तो -पाठेक खातिर चमटू घारें नाकादोड़ी करे लागला । रसे -रंगें  डुबल चमटू उदम साँढ़ रकम घुरे लागल। बुढिक सान तो देखइक नियर। बुढ़ी बांदरेक खातिर एगो रूपाक खाटी बनाइ देलइ आर दुलार-पियार से ओकराँ खिवे -पिवे लागलइ । चमटू घरेक ताम-झाम देख के आस-पासेक लोक मुड़ें हाथ लइ लेला ।“©www.sarkarilibrary.in”

 

कुछ दिन बीतल बादें, एक दिन बांदरें बुढ़ी के आपन थिन ‘ डाइक कें कहलइ, “माय, अबरी दादाक बीहा दियेक चाही। काइल हामें एक ठिन कनियाइ देखे जिबउ | तनि झलफले जलपान कइर दिहें।”

 

दोसर दिन जलपान कइर के बांदर झलफले घार से बाहराइल आर बेरा चाकें बइसइते एगो राजें गेल । बांदर के खूब मान-सम्मान भेलइ । फलेक-फुलेक गादा लाइग गेल। बांदर पोगराइ पोगराइ खाइ लागल आर चमटू राजाक बरतुपातेक कथा बारता करे लागल | बरतु पातेक कथा सुइन राजाक खुसिक ठेकान नाय ।

 

तकर बादें बिहाक दिन ठेकान धराइ के बांदर हाँसल-खेलल घार घुइर आइल। बुढ़ीं सुनली तो गरबें फुइल गेली। अबरी तो बुढ़ी बांदर  के गोड़ें तेलो मखवे लागली। दुलारेक तो कोन्हों सीमा नाय । आर एक दिन हाँसी-खुसी चमटूक बिहा भेलइ। बुढ़ियाक हाँथें सरगेक चाँद आइ गेलइ। दिन-राइत बहु-बेटाँइ डुबल रहे लागली । बांदरेक खेज-पूछाइर भला के करे।  ने चमटू कखनो बांदरेक टावान ले, ने चमटूक बहुहीं। उपर ले जोदि कखनो बांदरें चमटुक बहू के ‘भउजा-भउजी” कहे तो ऊ बांदर के खखुवाइ देइ।  बांदर ने हिंदेक रहल ने हुंदेक। गोठें गनाय ने पाघाँइ बांधाय ।“©www.sarkarilibrary.in”

 

बांदरेक आँखी आर नींद नाय । तखन एक दिन बांदरें बुढ़ी के पुछलइ – “माय, दादाक तो बिहा भइ गेलइ । अवरी हाम जदि मोइर जाये तो तोंय कि करबे ?” तखन बुढ़ी कहलाइ “हाँ बेटा, अइसन आव-खाव काहे बोकेहें, तोय मोरलें हामें खुभे कांदबोउ आर तोराँ चंदन काठे  पोडइबोउ । आर फइर तोंय मोरलें हामें कि आर बाँचब बेटा ?”

 

दोसर दिन बांदर मोरेक टाटक करल। देखे खातिर कि ई सब कि करता। बिहानहीं जखन बुढ़ी देखली कि बांदर मोइर गेल तो तनि इधाइर –उधाइर उलटाय –पलटाय देखली। मेंतुक धनेक गरबें एको तनि कांदली नाँय। बांदर एकदम सुगुम। बुढ़ी नाकवा आरो दाइब के चमटू के डाकली आर कहली- “एहे देखीं बेटा, बांदरा मोरलोउ रे । जोउ एगो पोंआर डोरांइ बाइधकें खेत बाटें फेइक देभीं ने तो गमकतोउ ।”“©www.sarkarilibrary.in”

 

ई सब बात सुइन के बांदरेक गोड़ेक लहइर मगजें फुटल | मने करल “बाह गे बुढ़ी, ऊ गिला खाली छइब कर – हली! अच्छा अबरी बुझइबोउ ।” दौड़ा-दौड़ी चमटू बांदरेक गोंड़ें डोरा बांधल आर टानल-घिसरवल खेत बाटें फेंइक आइल बांदर कोन्हों रकम ‘माइगो- बापगो’ करी उठल । ताव तक मूँह आंधरा भइ गेल हलइ । बांदर एगो तितकी लइकें चमटुक गढ़ें आइग लागाइ देलइ । सभीन पोइड़कें मोइर गेला। बांदर आपन आँइख टेहना लइकें उ देस से पाराइ गेल।

Q.धनेक धधइनि लोककथा कौन किताब में संकलित है ? खोरठा लोक साहित, संयुक्त संपादन प्रकाशक – कल्याण विभाग, झारखण्ड सरकार

Q.धनेक धधइनि लोककथा के संकलनकर्ता के लागे ? शांति भारत 

Q.चमटू कौन लोककथा के पात्र हकय ? धनेक धधइनि

Q.धनेक धधइनि लोककथा कर बुढ़ी कर कय गो बेटा है ? एगो “©www.sarkarilibrary.in”

Q.धनेक धधइनि लोककथा में बुढ़ी चमटू के किकर एगो टाका देहय  ? रूपाक

Q.चमटू के माय ,चमटू के कय टाका देहय  ? रूपाक एक टाका

Q.चमटू के माय ,चमटू के रूपाक एक टाका काहे  देहय  ? बेपार करे 

Q.रूपाक एक टाका लेके चमटू कँहा गेल ? हाट

Q.रूपाक एक टाका से चमटू की किनल ? एगो बांदर

Q. “हाँ रे कुलंगार, हाइ भातवा, ई बांदर टा की करबें? “ चमटू को यह किसने कहा ? चमटू के माय

Q.”माय, चमटू के नाय धमकाहीं हामें खुभे  सोना- रूपा आइन देबोउ ” चमटू के माय के के कहलाय ? किनल बांदरे 

Q.किनल दोसर दिन बादे बांदरे गांइठें बांधल सोना-रूपा कहा से आनल ? राजाक महले

Q.चमटू के माय बंदरो के की नाम कहे लागली ? “बेटा-बेटा’ “©www.sarkarilibrary.in”

Q.बांदरेक परतापें चमटू की बनले ? राजा

Q.बुढ़ी बांदरेक खातिर की कर खाटी बनाइ देलइ ? रूपाक

Q.चमटू के माय के के कहलाय – दादाक बीहा दियेक चाही ? बांदरे

Q.चमटू राजाक बरतुपात के करल ? बांदरे

Q.बांदर  के गोड़ें तेलो मखवे के लागली ? चमटू के माय

Q. बांदर जखन चमटुक बहू के ‘भउजा-भउजी” कहे तो बांदर के खखुवाइ देइ ? चमटू के बहू

Q.बांदर जदि मोइर जाये तो तोंय ओकरा बुढ़ी की से पोडइबोउ ?” चंदन काठे  

Q.धनेक धधइनि लोककथा में के मोरेक टाटक करल ? बांदर 

Q.धनेक धधइनि लोककथा में जखन बांदर मोरेक नाटक करले बूढ़ी की ले एको तनि कांदली नाँय।? धनेक गरबें 

Q.बांदरा मोरलोउ की नाय देखे ले चमटू के के डाकलाय ? चमटू के माय “©www.sarkarilibrary.in”

  • नाकवा दाइब के चमटू के डाकली

Q.मोरल बन्दर के पोंआर डोरांइ बाइधकें खेत बाटें फेइके ले के ले गेले ? चमटू

Q.चमटुक गढ़ें आइग लागाइ देलइ ? बन्दर

  • सभीन पोइड़कें मोइर गेला (चमटु, चमटू के माय, चमटू बहु )

Q.की से बन्दरे चमटुक गढ़ें आइग लागाइ देलइ ?  तितकी लइकें

Q. धनेक सबदे कारक कौन सा है ? सम्बन्ध 

Q. धधइनि (घमंड )  सबद लगे ? भाव वाचक संज्ञा 

Q.साग माड़ कइसन समास लगे ? जोड़ा समास

Q.ढोकसा का मतलब  – पेटू