कोशिका विभाजन Cell Division

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कोशिका विभाजन (Cell Division)

  • एक मातृकोशिका/पैतृक कोशिका (Parent Cell)  विभाजित होकर दो नई संतति/पुत्री कोशिकाओं(Daughter Cell) का निर्माण करती है, इस क्रिया को कोशिका विभाजन कहते हैं।
  • कोशिका विभाजन को सर्वप्रथम 1865 ई० में विरचाऊ ने देखा।
  • कोशिका विभाजन तीन प्रकार का होता है
    1. असूत्री विभाजन (Amitosis)
    2. समसूत्री विभाजन (Mitosis)
    3. अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis)

 

असूत्री विभाजन (Amitosis Division): 

  • यह विभाजन जीवाणु, नीलहरित शैवाल, प्रोटोजोआ, विषाणु इत्यादि में होता है। 
  • इस क्रिया में केन्द्र में संकुचन होता है, जिसके फलस्वरूप दो पुत्री कोशिका का निर्माण होता है। 
  • इसके साथ-साथ कोशिका द्रव्य में भी विभाजन होता है। 
  • इस प्रकार एक मातृकोशिका से दो पुत्री कोशिका का निर्माण होता है। 

 

समसूत्री विभाजन (Mitosis)

  • समसूत्री विभाजन की खोज वॉल्टर फ्लेमिंग ने 1879 ई० में की। 
  • यह विभाजन कायिक कोशिकाओं(SOMATIC CELLS) में होता है। 
  • एक मातृ कोशिका से दो पुत्रीकोशिका का निर्माण होता है, प्रत्येक पुत्रीकोशिका में गुणसूत्रों (Chromosome) की संख्या मातृकोशिका में उपस्थित गुणसूत्रों की संख्या के बराबर होती है। 

मातृकोशिका में गुणसूत्रों की संख्या = पुत्रीकोशिका में गुणसूत्रों की संख्या

  • समसूत्री विभाजन कोशिकाओं के गुणन, वृद्धि, मरम्मत आदि के लिये होता है। 
  • अनियंत्रित समसूत्री विभाजन (Uncontrolled Mitosis) से कैंसर हो जाता है। 
  • समसूत्री विभाजन को मुख्यतः दो भागों में बाँटा गया है
  1. (a) केंद्रक विभाजन (Karyokinesis) 
  2. (b) कोशिका द्रव्य विभाजन (Cytokinesis) 

(A) केन्द्रक विभाजन (Karyokinesis) 

  • केन्द्रक विभाजन की प्रक्रिया पाँच अवस्थाओं में पूर्ण होती है.
    1. अंतरावस्था या विरामावस्था (Interphase)
    2. प्रोफेज (Pronhase)
    3. मध्यावस्था (Metaphase)
    4. एनाफेज (Anaphase) 
    5. टेलोफेज (Telophase) 

 

(i)अंतरावस्था या विरामावस्था (Interphase) : 

  • यह अवस्था विभाजन के पूर्व की अवस्था है, यह अत्यधिक क्रियाशील अवस्था है। 
  • इस अवस्था को निम्न भागों में बाँटा गया है
    • G1- phase (Post mitotic gap phase): 
      • इस अवस्था में RNA एवं protein का निर्माण होता है। 
    • S-Phase 
      • DNA का संश्लेषण लेता है जिसे फलस्वरूप यह मात्रा में दोगुना हो जाता है। 
    • G2-phase (pre-mitotic gap jihase) :
      • DNA का संश्लेषण रूक जाता है, किन्तु RNA एवं प्रोटीन का संश्लेषण होता है, Interphase में क्रोमैटिन जाल अकुंडलित एवं पतला होता है, सेन्ट्रोसोम विभाजित हो जाता है। 

 

(ii) प्रोफेज (Pronhase) : 

  • कोशिका के वास्तविक विभाजन की शरूआत प्रोफेज से होती है, इसमें क्रोमैटिन जाल छोटे एवं मोटे होकर गुणसूत्र बनाते हैं.
  • क्रोमोसोम दो अर्द्ध भागों में बंटे जाता है, दोनों भाग एक बिन्दु से जुड़े होते है, इस बिन्दु को सेन्ट्रोमेयर कहते हैं, पूरी रचना chromatid कहलाती है। 
  • इस अवस्था के अंत में केन्द्रक झिल्ली, केन्द्रिका गायब हो जाती है, तुर्कधागे का निर्माण शुरू हो जाता है। 

 

(iii) मध्यावस्था (Metaphase) 

  • इस अवस्था में तुर्कधागे (spindle fibres) का निर्माण हो जाता है, इस पर क्रोमोसोम अपने सेन्ट्रोमेयर द्वारा धागे के बीच में आकर जुड़ जाता है
  • इस विभाजन में 2-10 minute का समय लगता है।

(iv) एनाफेज (Anaphase) : 

  • यह अवस्था सबसे छोटी अवस्था है, विभाजन 2-3 मिनटों में समाप्त हो जाता है। इस अवस्था में सेन्ट्रोमेयर दो भागों में विभाजित हो जाता है। 
  • प्रत्येक गुणसूत्र में दोनों क्रोमैटिड सेन्ट्रोसोम के विभाजन के कारण अलग हो जाते हैं। 
  • गुणसूत्र अब दोनों ध्रुवों की ओर चला जाता है। 

 

(v) टेलोफेज (Telophase) : 

  • यह अवस्था प्रोफेज की उल्टी है। 
  • उसमें केन्द्रक एवं केन्द्रिका स्पष्ट हो जाते हैं। 
  • क्रोमोसोम (Chromosome) पतले हो जाते हैं। 
  • इस प्रकार एक केन्द्रक से दो केन्द्रक का निर्माण हो जाता है। spindle fibre नष्ट हो जाते हैं।

(B) Cytokinasis

  • केन्द्रक के विभाजन के बाद संकुचन द्वारा कोशिका का विभाजन हो जाता है। 
  • इस प्रकार एक मातृ कोशिका से दो पुत्रीकोशिका का निर्माण होता है। 
  • पौधे में Cytokinasis की क्रिया cell plate द्वारा होती है। 

 

समसूत्री विभाजन का महत्व: 

  • जीवों में वृद्धि एवं विकास होता है। 
  • इस विभाजन के द्वारा शरीर की मरम्मत होती है तथा घाव भरता है।

 

अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis) 

  • यह विभाजन जनन कोशिका (germ cell) में होता है। 
  • अर्द्धसूत्री विभाजन को न्यूनकारी विभाजन (reduction division) भी कहते हैं। 
  • पुत्रीकोशिका में गुणसूत्रों की संख्यामातृकोशिका में उपस्थित गुणसूत्रों की संख्या की आधी होती है। 
  • इसमें विभाजन की क्रिया दो बार होती है। 
  • विभाजनके बाद चार पुत्री कोशिकाओं का निर्माण होता है। 
  • मियोसिस दो चरणों में पूर्ण होता है
    • (a) अर्द्धसत्री विभाजन I(Meiosis I): गुणसूत्रों की संख्या आधी रह जाती है
    • (b) अर्द्धसत्री विभाजन II(Meiosis II): प्रत्येक गुणसूत्र के दो अर्द्धगुणसूत्र (Chromatids) अलग-अलग हो जाते हैं।

 

A. मियोसिस-I (Meiosis I)

  • प्रोफेज-I (Prophase I) 
    • लिप्टोटीन (Leptotene)
    • जायगोटिन (Zygotene)
  • मेटाफेज-I (Metaphase I) 
  • ऐनाफेज-I (Anaphase I)
  • टेलोफेज-I (Telophase I) 

प्रोफेज (Prophase) को निम्न उप-अवस्थाओं में बाँटा गया है 

  1. लिप्टोटीन (Leptotene)
  2. जायगोटिन (Zygotene)
  3. पैकीटीन (Pachutenes)
  4. डिप्लोटिन (Deplotene)
  5. दायकाईनेसिस (daikinesis)

 

लिप्टोटीन (Leptotene) : 

  • इस अवस्था में क्रोमैटिन जाल  कुण्डलित एवं लम्बे होते हैं। 

जायगोटिन (Zygotene) : 

  • इस अवस्था में समजात गुणसूत्र (homologous chromosome) जोड़े में व्यवस्थित होते हैं। जिन्हें bivalent कहते हैं।

पैकीटीन (Pachytene)

  • इसमें गुणसूत्र छोटे और मोटे हो जाते हैं। 
  • प्रत्येक समजात गुणसूत्र के क्रोमैटिड अलग-अलग दिखायी देते हैं, उन्हें चतुष्टक कहते हैं। 

डिप्लोटिन (Deplotene)

  • समजात गुणसूत्रों के बीच प्रतिकर्षण उत्पन्न होता है, जिसके फलस्वरूप ये अलग अलग होने लगते हैं, किन्तु कुछ बिन्दुओं पर आपस में जुड़े होते हैं, इस बिंदु को काइज्मा कहते हैं। 
  • इस बिंदु पर क्रोमैटिड के खण्डों के बीच अदला-बदली होती है, इस प्रक्रिया को क्रॉसिंग ओवर कहते हैं। 
  • क्रॉसिंग ओवर के कारण ही संतान माता-पिता से कुछ भिन्न होते हैं। 

 

दायकाईनेसिस (daikinesis)

  • इस अस्वथा मे समजात गुणसूत्र अलग-अलग हो जाते हैं, केन्द्रक तथा केन्द्रिका गायब हो जाते हैं। 
  • तुर्क धागे (spindle fibres) का निर्माण शुरू हो जाता है। 

मेटाफेज-I (Metaphase-I) 

  • तुर्कधागे का निर्माण पूर्ण हो जाता है। 
  • तुर्कधागे (Bivalent spindle fibres) मध्य में सेन्ट्रोमेयर द्वारा जुड़ जाता है।

 

ऐनाफेज-I (Anaphase I)

  • प्रत्येक Bivalent में एक गुणसूत्र एक ध्रुव की ओर तथा दूसरा गुणसूत्र दूसरे ध्रुव की ओर खिंच जाता है। 
  • इसमें सेन्ट्रोमेयर का विभाजन नहीं हो पाता है। इस प्रकार कुल गुणसूत्र में आधा गुणसूत्र एक ध्रुव की ओर तथा आधा गुणसूत्र दूसरे ध्रुव की ओर चला जाता है। 

 

टेलोफेज-I (Telophase-I)

  • दोनों ध्रुवों की ओर केन्द्रक झिल्ली का निर्माण हो जाता है। 
  • इस प्रकार एक मातृकेन्द्रक से दो पुत्रीकेन्द्रक का निर्माण हो जाता है।

मियोसिस II (Meiosis II)

  • केंद्रक के विभाजन के साथ-साथ कोशिका द्रव्य का भी विभाजन हो जाता है इस प्रकार दो पुत्रीकोशिकाओं का निर्माण हो जाता है। इसके बाद इन दोनों कोशिकाओं में पुनः विभाजन शुरू हो जाता है। इस विभाजन को मियोसिस II कहते हैं। 
  • यह विभाजन मिटोसिस जैसा ही होता है। 
  • इसमें निम्न अवस्थाएँ होती हैं (P-MAT)
    1. प्रोफेज-II (Prophase II) 
    2. मेटाफेज-II (Metaphase II)
    3. ऐनाफेज-II (Anaphase II) 
    4. टेलोफेज-II (Telophase II) 

                      

प्रोफेज-II (Prophase II) 

  • केन्द्रक झिल्ली एवं केन्द्रिका गायब हो जाते हैं। 
  • क्रोमैटिड सिकुड़कर छोटे और मोटे होने लगते हैं। 
  • तुर्क धागे का निर्माण शुरू हो जाता है एक-एक centriole दोनों ध्रुवों पर चला जाता है। 

 

मेटाफेज-II 

  • तर्कधागे (spindle fibres) का निर्माण पूर्ण हो जाता है। 
  • क्रोमोसोम सेन्ट्रोमेयर द्वारा spindle fibres के बीच में जुड़ जाता है। 

 

ऐनाफेज-II (Anaphase II)  

  • सेन्टोमेयर का विभाजन हो जाता है, जिसके फलस्वरूप क्रोमोसोम के दोनों क्रोमेटिड एक दूसरे से अलग हो जाते हैं तथा दोनों ध्रुवों की ओर एक-एक चले जाते हैं। 
  • कोशिका में संकुचन शुरू हो जाता है। 

 

टेलोफेज-II (Telophase II) 

  • दोनो  ध्रुवों की ओर केन्द्रक झिल्ली (Nuclear mernbrane) का निर्माण हो जाता है। 
  • केन्द्रिका का निर्माण भी हो जाता है।
  • केन्द्रक के विभाजन के बाद कोशिका द्रव्य भी विभाजित हो जाता है। 
    • एक मातृकोशिका से चार पुत्रीकोशिकाओं का निर्माण हो जाता है। 
    • गुणसूत्रों की संख्या मातृकोशिका में उपस्थित क्रोमोसोम की संख्या की आधी होती है।

 

समसूत्री विभाजन

अर्द्धसूत्री विभाजन

कोशिका

  • यह कायिक कोशिकाओं (Somatic Cells) में होता है
  • द्विगुणित (Diploid) संतति कोशिकाओं का निर्माण 
  • यह जनन कोशिकाओं (Reproductive Cells) में होता है 
  • अगुणित (Haploid) युग्मक बनते हैं जो निषेचन में भाग लेते हैं। 

चरण

  • यह विभाजन केवल एक चरण में पूर्ण होता है।
  • यह विभाजन दो चरणों में पूर्ण होता है।

विभाजन

  • केंद्रक में एक ही विभाजन होता है
  • गुणसूत्रों की संख्या संतति कोशिका में समान रहती है।
  • केंद्रक में दो बार विभाजन होता है
  • चार संतति कोशिकाएँ बनती हैं। फलतः गुणसूत्रों की संख्या पैतृक कोशिका से आधी रह जाती है। 

पूर्वावस्था

  • इस विभाजन में पूर्वावस्था (Prophase) अपेक्षाकृत सरलकम अवधि की होती है।
  • पूर्वावस्था पाँच उप-अवस्थाओं में बँटी रहती हैं
  • लेप्टोटीन, जाइगोटीन, पैकिटीन, डिप्लोटीन डाइकाइनेसिस

क्रॉसिंग ओवर

  • इस विभाजन में क्रॉसिंग ओवर नहीं होता 
  • काइज्मैटा नहीं बनते।
  • काइज्मैटा बननेक्रॉसिंग ऑवर होने के कारण ही संतति कोशिकाओं में विभिन्नताएँ पाई जाती हैं।

संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या

पैतृक कोशिका के समान 

पैतृक कोशिका का  आधा  

संतति कोशिकाओं की संख्या 

  • इस विभाजन से दो संतति कोशिकाओं का निर्माण होता है। 
  • इस विभाजन से चार संतति कोशिकाओं का निर्माण होता है।

महत्त्वः

  • वृद्धि, मरम्मत आदि के लिये आवश्यक 
  • लैंगिक जनन करने वाले जीवों में गुणसूत्रों की संख्या समान रखने के लिये आवश्यक
  • जीवों में विभिन्नताओं (Variations) के लिये उत्तरदायी

 

कुछ महत्त्वपूर्ण तथ्य (Some Important Facts) 

प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में श्वसन (Respiration) का कार्य

यूकैरियोटिक कोशिका में श्वसन का कार्य 

  • मीसोसोम (Mesosome) करते हैं
  • माइटोकॉण्ड्रिया करते हैं। 

 

  • कोशिका झिल्ली (Cell Membrane) 
    • एक अर्द्धपारगम्य झिल्ली (Semi Permeable Membrane) होती है। 
    • यह कुछ विशिष्ट अणुओं को ही अपने आर-पार आने या जाने देती है। 

गॉल्जी काय (Golgi Body) का मुख्य कार्य 

  • कोशिका (Cell) द्वारा संश्लेषित प्रोटीन, वसा आदि की पैकेजिंग करना है। 
  • उपनाम – कोशिका के अणुओं का Traffic Controller 

हरित लवक (Chloroplast) 

  • उपनाम – कोशिका का रसोईघर (Kitchen of the Cell) 
    • इसमें प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा भोजन का निर्माण होता है। 
  • बुढ़ापे के लियेAgeing Gene ज़िम्मेदार होता है।

नाइट्रोजन का स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation)

  • कुछ जीवाणुओं जैसे राइजोबियम के अंदर Nif Gene होता है जिसकी सहायता से ये जीवाणु नाइट्रोजन का स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) करने में सक्षम होते हैं। 

 

पेट्री डिश (Petri dish)

  • पादप और जंतु कोशिकाओं में प्रयोगशाला की पेट्री डिश में कोशिका विभाजन कराया जा सकता है।
  • एक उथला, गोलाकार, कांच या प्लास्टिक का बर्तन, जिसके ऊपर और किनारों पर ढीले-ढाले आवरण होते हैं, जिसका उपयोग बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीवों के संवर्धन के लिए किया जाता है।
  • Inventor: Julius Richard Petri

 

MCQ QUESTIONS BASED ON Cell Division

कोशिका विभाजन पर आधारित प्रश्न 

 

1. शुक्राणु एवं अण्डाणु का निर्माण होता है

(a) माइटोसिस द्वारा 

(b) मियोसिस द्वारा

(c) एमाइटोसिस द्वारा 

(d) सभी 

 

2. पादप कोशिका में कोशिका द्रव का विभाजन होता है

(a) संकुचन द्वारा 

(b) कोशिका प्लेट द्वारा 

(c) दोनों

(d) कोई नहीं 

 

3. किस अवस्था में DNA का संश्लेषण होता है

(a) G, Phase 

(b) G2  phase 

(c) S phase

(d) कोई नहीं 

 

4. कौन-सी अवस्था सबसे छोटी है ? 

(a) प्रोफेज

(b) मेटाफेज

(c) एनाफेज

(d) टेलोफेज 

 

5. किस अवस्था में सेन्ट्रोसोम विभाजित होता है? 

(a) प्रोफेज

(b) मेटाफेज 

(c) एनाफेज

(d) टेलोफेज 

 

6. समसूत्री विभाजन के फलस्वरूप मातृकोशिका सेना पुत्रीकोशिका का निर्माण होता है? (a) 2

(b) 4 

(c) 8

(d) 16

 

7. अर्द्धसूत्री विभाजन होता है

(a) कायिक कोशिकाओं में 

(b) जनन कोशिकाओं में 

(c) दोनों में

(d) कोई नहीं 

 

8. क्रोसिंग ओवर होता है

(a) माइटोसिस में 

(b) मियोसिस में

(c) एमाइटोसिस में 

(d) कोई नहीं 

 

9. विभाजन की किस अवस्था में केन्द्रक झिल्ली गायब हो जाती है? 

(a) मेटाफेज

(b) एनाफेज 

(c) एनाफेज

(d) टेलोफेज 

 

10. समसूत्री विभाजन में पुत्रीकोशिका में गुणसूत्रों की संख्या मातृकोशिका में उपस्थित गुणसूत्रों की संख्या की

(a) बराबर होती है 

(b) आधी होती है 

(c) दुगुनी होती है 

(d) सभी