खोरठा लेखक बिस्वनाथ प्रसाद ‘नागर’ की जीवनी (Biswanath Prasad ‘Nagar’ Biography )

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बिस्वनाथ प्रसाद ‘नागर’

  • जन्म – 7  जनवरी 1939 ,मुदा गांव , धनबाद 
  • उपनाम – ‘नागर’
  • अन्य नाम – विश्वनाथ रवानी 
  • पिता – जादू रवानी
  • माता – फुलमनी देवी 
  • शिक्षा – इंटर पास 
  • रचना सैली – छायावादी प्रवृति के कवि 

प्रमुख कृतियां “©www.sarkarilibrary.in”

  • लेखन की शुरुवात मुख्य रूप से 1961 में की। 
  • सुलकसाय (खंड काव्य )
    • सुलकसाय का शाब्दिक अर्थ है अग्निपुत्र/गुदड़ी के लाल या वह ज्योतिपुंज जो किसी परिवार समाज राष्ट्रीय राष्ट्रीयता को प्रकाशित करें
    • यह रचना महाभारत के पात्र कर्ण  पर आधारित है
    • यह काव्य 11 खंड अथवा परब  में विभाजित है 
    • 1.सन्ति परब ,2.आसीस ,3.महेन्द्रगिरि ,4.सिकार ,5.रंगभूमि ,6.सापित करन ,7.दान ,8.वरदान ,9.पांच फूल ,10.सांधार ,11अंत 
    • कुंती ने कर्ण को अश्वरथी नदी में मंजूषा में बंद करके वह आया था
  • रांगालाठी/ रांगा पारे  (खोरठा कविता संग्रह )- 50 कविता 
    • 1961- 69 तक की लिखित कविता शामिल है। 
  • खइयाम तोर मधुर गीत – 2004 में रचित
  • दिंड़ल पाता :   कविता संग्रह
  • झींगा फूल  : गीत संग्रह (अप्रकाशित ) “©www.sarkarilibrary.in”

Questions Related to Biswanath Prasad ‘Nagar’

Q.खंड काइब ‘सुकलसाय’ के रचनाकार के हय? विश्वनाथ नागर

Q.दिंड़ल पाता कविता संग्रह के रचनाकार के हय? विश्वनाथ नागर