परमाणु संरचना (Atomic Structure)

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रासायनिक संयोजन के नियम (Laws of Chemical Combination) : लेवायसियर (Lavoisier) एवं प्राउस्ट (Proust) ने कई प्रयोगों के पश्चात् रासायनिक संयोजन के निम्नलिखित दो नियम प्रतिपादित किये

  • द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass): According to this law, “Mass can neither be created nor destroyed in a chemical reaction”.
  • स्थिर अनुपात का नियम (Law of Constant Proportions): According to this law “the elements in any compound are always present in a definite proportion of masses”.

 

डाल्टन का परमाणु सिद्धांत (Dalton’s Atomic Theory)

  • डाल्टन का परमाणु सिद्धांत रासायनिक संयोजन के नियमों पर आधारित था। 
  • इस सिद्धांत ने द्रव्यमान संरक्षण के नियम और स्थिर अनुपात के नियम की व्याख्या की। 
  • इस सिद्धांत के अनुसार सभी द्रव्य सूक्ष्म कणों से बने होते हैं, जिन्हें ‘परमाणु’ कहते हैं। 

 

डाल्टन के सिद्धांत की विवेचना निम्न प्रकार से की जा सकती है

  • All matters are made up of atoms.
  • Atoms are the smallest indivisible particles, which are neither created nor destroyed in a chemical reaction.
  • All atoms of a given element have the same mass and chemical properties.
  • Atoms of different elements have different mass and chemical properties.

 

भारतीय दार्शनिकों- महर्षि कणाद, पकुधा काच्चायन एवं ग्रीक दार्शनिकों डेमोक्रिटस तथा लियुसियस ने स्वतंत्र रूप से ये दार्शनिक विचार प्रकट किये थे कि सभी द्रव्य अविभाज्य कणों से बने हैं। भारत में इन कणों को ‘परमाणु’ तथा ग्रीक में ‘एटम’ (Atom) नाम दिया गया था।

 

परमाणु (Atom)

  • the word “atom” has been derived from the Greek word  A-tomio which means uncuttable on undivisible
  • atom, smallest unit into which matter can be divided without the release of electrically charged particles. 
  • सभी द्रव्यों की रचनात्मक इकाई को ‘परमाणु’ कहते हैं। ये अत्यंत सूक्ष्म कण होते हैं। 

 

अणु (Molecule) 

  • अणु किसी तत्त्व अथवा यौगिक का वह सूक्ष्मतम कण है, जो स्वतंत्र रूप में रह सकता है और जो उस तत्त्व या यौगिक के सभी गुणधर्म को प्रदर्शित करता है। 
  • A molecule is an electrically neutral group of two or more atoms held together by chemical bonds.

 

तत्त्वों के अणु (Molecules of Elements)

  • किसी तत्त्व के अणु एक ही प्रकार के परमाणुओं से बने होते हैं। 
  • अनेक तत्त्वों के अणु उसी तत्त्व के केवल एक परमाणु द्वारा निर्मित होते हैं, जैसे-आर्गन (Ar), हीलियम (He) इत्यादि। 
  • अधिकांश तत्त्वों में दो या दो से अधिक परमाणु, अणु बनाते हैं। जैसे: ऑक्सीजन (O2), क्लोरीन (Cl2) इत्यादि। 

यौगिकों के अणु (Molecules of Compound)

  • भिन्न-भिन्न तत्त्वों के परमाणु एक निश्चित अनुपात में परस्पर जुड़कर यौगिक के अणु निर्मित करते हैं। जैसे-अमोनिया (NH3), कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) इत्यादि। 

 

आयन (lon)

  • An ion is a particle, atom or molecule with a net electrical charge. 

आयन दो प्रकार के होते हैं

  • धनायन (Cation) : जब आयन पर धनावेश होता है तो उसे ‘धनायन’ कहते हैं। उदाहरण- K+ (पोटैशियम आयन) 
  • ऋणायन (Anion) : जब आयन पर ऋणावेश होता है तो उसे ‘ऋणायन’ कहते हैं। उदाहरण SO4 2- (सल्फेट आयन)

 

परमाणु द्रव्यमान (Atomic Mass)

  • किसी परमाणु के द्रव्यमान को ‘परमाणु द्रव्यमान’ कहते हैं। 
  • इसे मापने की इकाई ‘Unified Atomic Mass Unit’ या ‘u’ है।
  • कार्बन-12 परमाणु के परमाणु द्रव्यमान के 1/12 को 1u मान लिया गया है। कार्बन-12 के परमाणु का सापेक्ष द्रव्यमान 12 निर्दिष्ट किया जाता है। 
  • अन्य सभी तत्त्वों के परमाणुओं का सापेक्ष द्रव्यमान कार्बन-12 परमाणु के साथ तुलना करके प्राप्त करते हैं।

                            1 amu = 1.66054×10-24

 

कुछ तत्त्वों के परमाणु द्रव्यमान 

Hydrogen

H

1

Helium

He

2

Lithium

Li

3

beryllium

Be

4

boron

B

5

carbon

C

6

nitrogen

N

7

oxygen

O

8

florine

F

9

neon

Ne

10

sodium

Na

11

magnesium

Mg

12

aluminium

Al

13

silicon

Si

14

phosphorus

P

15

sulphur

S

16

chlorine

Cl

17

argon

Ar

18

pottasium

K

19

calcium

Ca

20

 

आणविक द्रव्यमान (Molecular Mass)

  • the mass of a molecule that is equal to the sum of the masses of all the atoms contained in the molecule
  • it is measured in daltons (Da or u).
  • The molecular mass gives the mass of a molecule relative to that of the 12C atom, which is taken to have a mass of 12
  • Molecular mass is a dimensionless quantity, but it is given the unit Dalton or atomic mass unit

 

अवपरमाणविक कण (Sub-Atomic Particles)

  • इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन मूल कण हैं। 
  • 19वीं शताब्दी के अंत तक यह सिद्ध हो गया था कि परमाणु अविभाज्य नहीं है और परमाणु भी अन्य सूक्ष्म कणों से मिलकर बना होता है।

 

इलेक्ट्रॉन (Electron)

  • खोज-  ‘कैथोड किरण नलिका’ (CRT) प्रयोग द्वारा सर जे.जे. थॉमसन ने 
  • ‘इलेक्ट्रॉन’ ऋणावेशित कैथोड से धनावेशित एनोड की ओर चलते हैं 
  • इलेक्ट्रॉन पर आवेश =  –1.6022 x 10-19
  • इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान (me) =  9.1094 x 10-31 kg 
  • CRT – cathode ray tube

प्रोटॉन (Proton)

  • प्रोटॉन की खोज – गोल्डस्टीन 
  • प्रोटॉन की नामकरन – रदरफोर्ड
  • प्रोटॉन पर आवेश =  +1.6022 x 10-19
  • प्रोटॉन का द्रव्यमान = 1.67 x 10-27 kg 

 

न्यूट्रॉन (Neutron) 

  • न्यूट्रॉन की खोज – चैडविक ने ,1932 में ,
    • बेरिलियम धातु पर अल्फा () कणों की बौछार द्वारा 
  • न्यूट्रॉन पर आवेश =  वैद्युत उदासीन (Neutral) 
  • न्यूट्रॉन का द्रव्यमान प्रोटॉन के द्रव्यमान के लगभग बराबर ही होता है। 

इलेक्ट्रॉन (e)

प्रोटॉन (p)

न्यूट्रॉन (n)

द्रव्यमान (Kg)

9.109×10-31

1.672×10-27

1.674×10-27

द्रव्यमान (u)

0

1

Absolute charge

-1.6022 x 10-19

+ 1.6022 x 10-19

0

charge

-1

+1

0

 

(4) पॉजिट्रान (Positron) : 

  • पॉजिट्रान की खोज –  1932 ई० में एण्डरसन (Anderson) ने 
  • यह एक धन आवेशित मूल कण है
  • पॉजिट्रान का द्रव्यमान व आवेश – इलेक्ट्रॉन के बराबर 
  • पॉजिट्रान को इलेक्ट्रॉन का एन्टि कण (Anti-Particle of Electron) भी कहते है।

 

(5) न्यूट्रिनो (Neutrino) :

  •  न्यूट्रिनो की खोज – 1930 ई० पाउली (Pauli) ने 
  • यह द्रव्यमान व आवेश रहित मूल कण हैं। 
  • ये दो प्रकार के होते हैं, न्यूट्रिनो एवं एन्टिन्यूट्रिनो। 
    • इनके चक्रण (spin) एक-दूसरे के विपरीत होते हैं। 

(6) पाई-मेसॉन (⊼ -meson) : 

  • पाई-मेसॉन की खोज – 1935 ई० में, एच० युकावा (H.Yukawa) ने 
  • यह दो प्रकार की होती है- धनात्मक पाई मेसॉन एवं ऋणात्मक पाई मेसॉन 
  • यह एक अस्थायी मूल कण है।
  •  इसका जीवनकाल 10-8 से० होता है। 
  • पाई-मेसॉन का द्रव्यमान = इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान का 274 गुना 

 

(7) फोटॉन (Photon) : 

  • ये ऊर्जा के बंडल (packet) होते हैं, जो प्रकाश की चाल से चलते हैं। 
  • सभी विद्युत चुम्बकीय किरणों का निर्माण मूल कण से हुआ है।
  •  इनका विराम द्रव्यमान (Rest Mass) शून्य होता है।

नाभिक (Nucleus) : 

  • परमाणु का केन्द्रीय भाग जिसमें परमाणु का कुल धन आवेश और लगभग सभी द्रव्यमान संकेन्द्रित रहता है परमाणु का नाभिक कहलाता है। 
  • नाभिक की त्रिज्या 10-12 सेमी० होती है, जबकि परमाणु की त्रिज्या 10-8 सेमी० होती है। 
  • नाभिक का घनत्व परमाणु के घनत्व से 1012 गुना अधिक होता है । 
  • चूँकि परमाणु का समस्त द्रव्यमान इसके नाभिक में होता है। इस कारण नाभिक काफी सघन एवं दृढ़ (rigid) होता है।
  • परमाणु नाभिक की रचना प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों से होती है। जिन नाभिकों में 2,8, 14, 20, 28, 50 या 82 न्यूट्रॉन अथवा प्रोट्रॉन या 126 अथवा 152 न्यूट्रॉन होते हैं, वह अन्य नाभिकों की तुलना में अधिक स्थायी  होता है। ये सख्याए स्थायित्व संख्याएँ (Stability Numbers )कहलाती है

 

नाभिकीय बल (Nuclear Forces) : 

  • जो आकर्षण बल परमाणु  नाभिक में न्यूक्लिऑन (प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों) को परस्पर बाँधे रहता है, वे नाभिकीय बल कहलाते हैं। 
  • समान charge के कारण प्रोटॉनों में प्रतिकर्षण होता है, परन्तु इस प्रतिकर्षण के बाबजुद नाभिक स्थायी होता है. क्योकि नाभिकीय बल प्रतिकर्षण बल से अधिक होता है। 
  • नाभिकीय बल केवल 2f-3fकी दूरी तक सक्रिय होते हैं। (1f= 10-15m) 

 

परमाणु की संरचना (Structure of an Atom)

  • परमाणु के भीतर दो मूल कणों इलेक्ट्रॉन तथा प्रोटॉन की खोज ने डाल्टन के परमाणु सिद्धांत को गलत साबित कर दिया। 
  • इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन परमाणु में किस तरह व्यवस्थित है, इसको समझाने के लिये वैज्ञानिकों ने अलग-अलग मॉडल प्रस्तुत किये।

 

थॉमसन का परमाणु मॉडल (Thomson’s Model of an Atom)

  • इसके अनुसार परमाणु में धन आवेश तरबूज के खाने वाले लाल भाग की तरह बिखरा है, जबकि इलेक्ट्रॉन धनावेशित गोले में तरबूज के बीज की भाँति धंसे हैं। थॉमसन ने प्रस्तावित किया
  • परमाणु धन आवेशित गोले का बना होता है और इलेक्ट्रॉन उसमें फँसे होते हैं। 
  •  ऋणात्मक और धनात्मक आवेश परिमाण में समान होते हैं, इसलिये परमाणु वैद्युत-उदासीन होते हैं। 
  • जे.जे. थॉमसन को इलेक्ट्रॉन की खोज के कारण 1906 में भौतिक शास्त्र में नोबेल पुरस्कार मिला।

 

रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल (Rutherford’s Model of an Atom)

  • इलेक्ट्रॉन परमाणु के भीतर कैसे व्यवस्थित हैं, यह जानने के लिये रदरफोर्ड ने एक प्रयोग किया, जिसे रदरफोर्ड का ‘प्रकीर्णन प्रयोग’ कहा जाता है। प्रकीर्णन प्रयोग में तेज़ गति से चल रहे अल्फा कणों को सोने की पन्नी पर टकराया गया।

 रदरफोर्ड ने अपने प्रयोगों द्वारा निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले

  • अधिकांश कण, सोने की पन्नी से बिना विक्षेपित हुए निकल गए, जिससे यह पता चलता है कि परमाणु में अधिकांश क्षेत्र रिक्त होता है। 
  • केवल कुछ ही कण अपने पथ से विचलित हुए जिनमें से बहुत ही कम पीछे की ओर लौटे अर्थात् एक भारी द्रव्यमान परमाणु के केंद्र में स्थित होता है, जिससे बहुत कम कण टकरा पाए .प्राप्त आँकड़ों के आधार पर उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि नाभिक की त्रिज्या परमाणु की त्रिज्या से 105 गुना छोटी है।

 

अपने उपर्युक्त प्रयोगों के आधार पर रदरफोर्ड ने परमाणु का नाभिकीय मॉडल प्रस्तुत किया। 

रदरफोर्ड के परमाणु का नाभिकीय मॉडल 

(Rutherford’s Nuclear Model of an Atom)

इस मॉडल के अनुसार

  • परमाणु का केंद्र धनावेशित होता है, जिसे ‘नाभिक’ कहा जाता है। एक परमाणु का लगभग संपूर्ण द्रव्यमान नाभिक में होता है। 
  • इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार मार्ग में चक्कर लगाते हैं। 
  • इलेक्ट्रॉन और नाभिक आपस में स्थिर वैद्युत आकर्षण बलों द्वारा बँधे रहते हैं। 

 

रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की कमियाँ 

  • मार्ग में चक्रण करते हुए इलेक्ट्रॉन का स्थायी हो पाना संभव नहीं है, क्योंकि कोई भी आवेशित कण गोलाकार पथ में त्वरित होगा और त्वरण के दौरान आवेशित कणों से ऊर्जा का विकिरण होगा। इस प्रकार स्थायी कक्ष में घूमता हुआ इलेक्ट्रॉन अपनी ऊर्जा विकिरित करेगा और नाभिक से टकरा जाएगा। अगर ऐसा होता तो परमाणु अस्थिर होता, जबकि परमाणु स्थायी होते हैं। 
  • यह मॉडल परमाणुओं की इलेक्टानिक संरचना अर्थात् नाभिक के चारों ओर इलेक्ट्रान किस प्रकार विद्यमान हैं तथा उनकी ऊर्जा क्या है, के बारे में कुछ भी वर्णन नहीं करता।
  • रदरफोर्ड के मॉडल पर उठी आपत्तियों को दूर करने के लिये नील्स बोर ने परमाणु का मॉडल प्रस्तुत किया। 

 

नाभिक (Nuclei) 

  • प्रत्येक परमाणु में इसके सभी प्रोटॉन एंव न्यूट्रॉन अत्यंत घनीभूत एवं सूक्ष्म क्षेत्र में स्थित रहते हैं, जिसे परमाणु का ‘नाभिक’ कहते हैं। 
  • नाभिक की खोज रदरफोर्ड ने अपने प्रकीर्णन प्रयोग में की थी।
  • नाभिक में उपस्थित मूल कणों (प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन) को न्यूक्लिऑन (Nucleon) कहते हैं। 

                                 

परमाणु संख्या (Atomic Number) 

  • नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या को ‘परमाणु संख्या’ या ‘परमाणु क्रमांक’ कहते हैं। 

Atomic Number(Z) = No of protons in a atom 

                                = No of electrons in a neutral atom

द्रव्यमान संख्या (Mass Number)

  • किसी परमाणु में उपस्थित न्यूक्लिऑन की संख्या को उसकी ‘द्रव्यमान संख्या’ कहते हैं।
  • न्यूक्लिऑन (nucleons) –  नाभिक में मौजूद प्रोटॉन और न्यूट्रॉन को सामूहिक रूप से न्यूक्लियॉन के रूप में जाना जाता है
  • Mass no (A) = no of protons  + no of neutrons (n)

 

         

समस्थानिक (Isotopes)

  • एक ही तत्त्व के वे परमाणु, जिनकी परमाणु संख्याएँ समान, किंतु द्रव्यमान संख्याएँ भिन्न-भिन्न होती हैं, ‘समस्थानिक’ कहलाते हैं। 
  • परमाणुओं के रासायनिक गुण इलेक्ट्रानों की संख्या द्वारा नियंत्रित होते हैं, अतः रासायनिक अभिक्रियाओं में सभी समस्थानिकों के व्यवहार समान होते हैं। 

EX-

  • Protium is the most prevalent hydrogen isotope, with an abundance of 99.98%. It consists of one proton and one electron. It is typically not found in its monoatomic form
  •  Deuterium is a hydrogen isotope consisting of one proton, one neutron and one electron
  • Tritium is a hydrogen isotope consisting of one proton, two neutrons and one electron. It is radioactive, with a half-life of 12.32 years.

समस्थानिकों का अनुप्रयोग 

  • यूरेनियम के एक समस्थानिक का प्रयोग परमाणु भट्टी में ईंधन के रूप में होता है। 
  •  कैंसर के उपचार में कोबाल्ट के समस्थानिक का उपयोग होता है। 
  • घेंघा  रोग के इलाज में आयोडीन के समस्थानिक का उपयोग होता है। 

 

समभारिक (Isobars)

  • भिन्न-भिन्न तत्त्वों के ऐसे परमाणु, जिनकी द्रव्यमान संख्याएँ समान, किंतु परमाणु संख्याएँ अलग-अलग होती हैं, ‘समभारिक’ कहलाते हैं। 
  • उदाहरण- 

  • नाइट्रोजन (N714) तथा कार्बन (C614) समभारिक हैं। 
  • सोडियम (Na1124) तथा मैग्नीशियम (Mg1224) समभारिक हैं। 

 

समन्यूट्रॉनिक (Isotones)

  • भिन्न-भिन्न तत्त्वों के ऐसे परमाणु, जिनकी परमाणु संख्या तथा द्रव्यमान संख्या दोनों अलग-अलग होती हैं, किंतु उनमें उपस्थित न्यूट्रॉनों की संख्या समान होती है, ‘समन्यूट्रॉनिक’ कहलाते हैं। 

उदाहरण- (C614) (इलेक्ट्रॉन- 6, प्रोटॉन-6, न्यूट्रॉन-8)

           (N715) (इलेक्ट्रॉन-7, प्रोटॉन-7, न्यूट्रॉन-8) 

 

समइलेक्ट्रॉनिक (Isoelectronic)

  • ऐसे आयन जिनमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, ‘समइलेक्ट्रॉनिक’ कहलाते हैं। 
  • उदाहरण- Na+, Mg++, F सभी में इलेक्ट्रॉनों की संख्या 10 है।

 

बोर का परमाणु मॉडल (Bohr’s Model of an Atom)

बोर ने निम्नलिखित अवधारणाएँ प्रस्तुत की

(i) इलेक्ट्रॉन केवल कुछ निश्चित कक्षाओं में ही चक्कर लगा सकते हैं, जिन्हें इलेक्ट्रॉन की विविक्त कक्षा (Discrete Orbits) कहते हैं। 

(ii) जब इलेक्ट्रॉन इन विविक्त कक्षा में चक्कर लगाते हैं तो उनकी ऊर्जा का विकिरण नहीं होता। 

  • इन कक्षाओं को ऊर्जा स्तर (Energy Levels) कहते हैं। 
  • ये कक्षाएँ अंग्रेजी के अक्षरों K, L, M, N……. या संख्याओं 1, 2, 3, 4, ……. के द्वारा दिखाई जाती हैं।

 

  • बोर ने परमाणु मॉडल के परमाणविक वर्णपट (Atomic Spectra) की असंतता की भी सफल व्याख्या की। इसके अनुसार किसी ऊर्जा स्तर में चक्कर लगाता इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का अवशोषण कर उच्च ऊर्जा स्तर वाली कक्षा में जा सकता है, जिसे ‘ऊर्जावान अवस्था’ (Excited State) कहा जाता है। जब इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर से निम्न ऊर्जा स्तर में आता है तो दोनों कक्षाओं की ऊर्जाओं के अंतर के बराबर ऊर्जा का उत्सर्जन करता है।

 

बोर-बरी नियम (Bohr-Bury Rule) 

  • किसी कक्षा में उपस्थित अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या को सूत्र 2n2 से दर्शाया जाता है, जहाँ ‘n’ कक्षा की संख्या या ‘ऊर्जा स्तर’ है। 
  • सबसे बाहरी कक्षा में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या 8 हो सकती है। 
  • किसी परमाणु की दी गई कक्षा में इलेक्ट्रॉन तब तक स्थान नहीं लेते हैं, जब तक कि उससे पहले वाले भीतरी कक्ष पूर्णतः भर नहीं जाते। इससे स्पष्ट होता है कि कक्षाएँ क्रमानुसार भरती हैं।

 

कक्षा एवं उपकक्षा (Shell& Subshell) 

  • इलेक्ट्रॉन जिन वृत्ताकार पथ में चक्कर लगाते हैं, उन्हें ‘कक्षा’ (Shell) कहते हैं। 
  • बोर के अनुसार प्रत्येक कक्षा की ऊर्जा निश्चित होती है। अतः इन्हें स्पेक्ट्रोस्कोपी में प्रयुक्त अक्षर K, L, M, N द्वारा निरूपित करते हैं। 
  • नाभिक के समीपस्थ कक्षा को K नाम दिया गया है, इसकी ऊर्जा न्यूनतम होती है। आधुनिक अध्ययनों द्वारा स्पष्ट है कि प्रत्येक कक्षा में कई उपकक्षाएँ भी होती हैं। इन उपकक्षाओं में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या निश्चित होती है।

 

कक्षा 

shell

उपकक्षाएँ

sub-shell

उपकक्षा

इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या

K

केवल s

s

2

L

s तथा p

p

6

M

s, p तथा d

d

10

N

s, p, d तथा f

f

14

 

कक्षक (Orbital) 

  • नाभिक के चारों ओर पाया जाने वाला वह त्रिविमीय(3D) क्षेत्र, जिसमें इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की प्रायिकता सर्वाधिक होती है, ‘कक्षक’ कहलाता है। 
  • किसी परमाणु में विभिन्न कक्षक हो सकते हैं, जिन्हें उनके आकार (Size), आकृति (Shape) तथा अभिविन्यास (Orientation) के आधार पर अलग-अलग किया जा सकता है। 
  • s-ऑर्बिटल गोलाकार, p-ऑर्बिटल डमरू जैसा, d-ऑर्बिटल द्विडमरू जैसा तथा f-ऑर्बिटल जटिल आकृति का होता है। 
  • किसी ऑर्बिटल में इलेक्ट्रॉनों की स्थिति समझने के लिये चार क्वांटम संख्याओं की आवश्यकता होती है।

Ex- 1s,2s,2p,3s,etc

Energy of orbitals :

क्वांटम संख्या (Quantum Number) 

  • चार प्रकार की क्वांटम संख्याएँ हैं

1. मुख्य  क्वांटम संख्या (Principal Quantum Number)(n)

  • यह उस कक्षा को बताती है, जिसमें इलेक्ट्रॉन होते हैं। यह नाभिक से इलेक्ट्रॉन की औसत दूरी तथा उससे संबद्ध ऊर्जा को निरूपित करती  है। इसे ‘n’ से दर्शाते हैं।
  • It determines the size of the orbital and the energy of the orbital

n

1

2

3

4

shell

K

L

M

N

 

2. दिगंशी क्वांटम संख्या (Arimuthal Quantun Number) (l)

  • यह इलेक्ट्रॉन के कोणीय संवेग को दर्शाती है। इसे ‘l’ से दर्शाते हैं।  
  • यह कक्षक के त्रिविमीय आकार को परिभाषित करती है। 
  • Identify subshell and determines shape of orbital.
  • in one subshell  there are (2l+1) orbitals

 

l

0

1

2

3

sub-shell

s

p

d

f

                              

3. चुंबकीय क्वांटम संख्या (Magnetic Quantun Number)

  • यह संख्या कक्षकों के त्रिविम अभिविन्यास के बारे में जानकारी देती है। 
  • इसे ‘m’ से प्रदर्शित करते हैं। 

4. चक्रण क्वांटम संख्या (Spin Quantum Number)

  • यह संख्या इलेक्ट्रॉनों के चक्रण की दिशा बताती है। इसे ‘g’ से दर्शाते हैं।

 

परमाणु में कक्षकों का भरा जाना

  • विभिन्न परमाणुओं के कक्षकों में इलेक्ट्रॉन ऑफबाऊ नियम के अनुसार भरे जाते हैं। 
  • ‘ऑफबाऊ नियम’, पाऊली अपवर्जन सिद्धांत, हुंड के अधिकतम बहुलता का नियम और कक्षकों की आपेक्षिक ऊर्जा पर आधारित है। 

 

ऑफबाऊ नियम (Aufbau Principle) 

  • इलेक्ट्रॉन पहले सबसे कम ऊर्जा वाले उपलब्ध कक्षक में भरे जाते हैं और उनको भरने के बाद उच्च ऊर्जा वाले कक्षकों को भरते हैं।

     

पाऊली अपवर्जन नियम (Pauli’s Exclusion Principle)

  • किसी परमाणु में उपस्थित दो इलेक्ट्रॉनों की चारों क्वांटम संख्याएँ एक समान नहीं हो सकती अर्थात् केवल दो इलेक्ट्रॉन एक कक्षक में रह सकते हैं और इन इलेक्ट्रॉनों के प्रचक्रण (Opposit spin) विपरीत होने चाहिये। 

 

हुंड का अधिकतम बहुलता का नियम (Hund’s Rule of Maximum Multiplicity) 

  • एक ही उपकक्षा (Subshell) के कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन(pairing) तब तक नहीं हो सकता, जब तक उस उपकक्षा के सभी कक्षकों में एक-एक इलेक्ट्रॉन न आ जाए। 

 

संयोजकता (Valency)

  • परमाणु के बाह्यतम कक्ष में इलेक्ट्रॉनों के अष्टक बनाने के लिये जितनी संख्या में इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी या स्थानांतरण होता है, वही उस तत्त्व की संयोजकता शक्ति अर्थात् संयोजकता होती है। 
  • The combining capacity of an atom is known as its valency. 
  • The number of bonds that an atom can form as part of a compound is expressed by the valency of the element.
  • बोर-बरी के नियम से हम जानते हैं कि परमाणु का बाह्यतम् कक्ष अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉन रख सकता है। आठ इलेक्ट्रॉनों वाले सबसे बाहरी कक्ष को ‘अष्टक’ माना जाता है। वास्तव में परमाणु अपने अंतिम कक्ष में अष्टक प्राप्त करने के लिये क्रिया करते हैं। ये आपस में इलेक्ट्रॉना की साझेदारी, उनको ग्रहण करने या उनका त्याग करने से होता है।
  • For example, nitrogen forms a number of compounds with hydrogen such as NH3, N2H4, N3H in which nitrogen atoms have valencies of 3, 2 and 1/3 respectively. 

संयोजकता इलेक्ट्रॉन (Valency Electron)

  • Valence electrons are those electrons which are present in the outermost orbit of the atom.

 

octet rule 

  • according to this atoms can combine either by transfer of Valence Electrons from one atom to another or  by sharing of valence electrons in order to have an octet in their valence shell. this is known as octet rule