वायुमंडलीय दाब, गतियाँ एवं पवनें Atmospheric pressure, speeds and winds : SARKARI LIBRARY

पछुआ पवनें (Westerlies) 

  • उपोष्ण उच्च वायुदाब कटिबंध (subtropical high pressure zone) से उपध्रुवीय निम्न वायुदाब कटिबंधों (subpolar low pressure zone) की ओर चलने वाली पश्चिमी पवनों को ‘पछुआ पवन’ कहते हैं। 

  • पृथ्वी की घूर्णन गति के कारण उत्तरी गोलार्द्ध में इनकी प्रवाह दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर होती है। 

  • यहाँ के प्रचंड वेग के कारण दक्षिणी गोलार्द्ध में इन पवनों को अक्षांशीय स्थितियों के आधार पर ‘गरजता चालीसा’ (Roaring Forties), ‘प्रचंड पचासा’ (Furious Fifties) व ‘चीखता साठा’ (Screaming Sixties) भी कहा जाता है। 

 ध्रुवीय पवनें (polarwinds)                                                                          

  • ध्रुवीय उच्च वायुदाब वाले क्षेत्रों (polar high pressure areas) से उपध्रुवीय निम्न वायुदाब वाले क्षेत्रों (subpolar low pressure areas) की ओर प्रवाहित होने वाली पवनों को ‘ध्रुवीय पवनें’ कहते हैं। 

  • उत्तरी गोलार्द्ध में ये उत्तर-पूर्व की दिशा से चलती हैं और दक्षिणी गोलार्द्ध में इनकी दिशा दक्षिण-पूर्व होती है।

  •  इस पवन में तापमान कम होने के कारण जलवाष्प धारण करने की क्षमता कम होती है। 

  • ध्रुवीय पवनें, पछुआ पवनों से मिलकर चक्रवातों और प्रतिचक्रवातों को उत्पन्न करती हैं। 

सामयिक पवनें/मौसमी पवनें (Seasonal Winds) 

  • जिन पवनों की दिशा मौसम या समय के अनुसार परिवर्तित हो जाती है, उन्हें ‘सामयिक पवन’ कहते हैं। 

  • इन्हें भूमंडलीय पवनों का रूपांतरित रूप माना जाता है।

ये पवनें तीन प्रकार की होती हैं

  1. मानसूनी पवनें 

  2. स्थल समीर तथा समुद्र समीर

  3. पर्वत समीर व घाटी समीर 

मानसूनी पवनें (Monsoon Winds) 

  • ये पवनें ऋतु परिवर्तन के साथ अपनी दिशा उलट देती हैं, अतः इन्हें ‘मानसूनी पवनें’ कहते हैं। 

  • मानसूनी पवनें ग्रीष्म ऋतु में समुद्र से स्थल की ओर तथा शीत ऋतु में स्थल से समुद्र की ओर चलती हैं। इनकी उत्पत्ति कर्क व मकर रेखाओं के बीच की व्यापारिक पवनों की पेटी में होती है। 

  • मानसूनी पवनें भूमंडलीय पवन व्यवस्था और स्थानीय कारकों की पारस्परिक क्रिया के परिणाम हैं। इसके अंतर्गत धरातल तथा क्षोभमंडल दोनों में ही घटित होने वाली क्रियाएँ शामिल हैं।

  • मानसूनी पवनों के प्रमुख प्रभाव क्षेत्र भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, ..म्यांमार, श्रीलंका, अरब सागर, बंगाल की खाड़ी, दक्षिण-पूर्वी एशिया, उत्तरी ऑस्ट्रेलिया, दक्षिणी चीन और जापान हैं एवं यहाँ इनकी सबसे आदर्श दशाएँ मिलती हैं। 

स्थल समीर (Land Breeze) 

  • रात्रि के समय सागर तटीय क्षेत्रों में स्थल से समुद्र की ओर चलने वाली दैनिक पवनों को ‘स्थल समीर’ कहते हैं। 

  • इन पवनों की उत्पत्ति का संबंध स्थलीय व जलीय सतह के ऊष्मण व शीतलन की प्रक्रिया से है। 

  • सूर्यास्त के पश्चात् स्थलीय सतह से तीव्र विकिरण के कारण सतह के शीतलन के फलस्वरूप उच्च वायुदाब का तथा जलीय सतह पर अपेक्षाकृत निम्न वायुदाब का विकास होता है। फलतः उच्च वायुदाब के केंद्र से निम्नवायु के केंद्र की ओर ‘स्थल समीर’ की उत्पत्ति होती है। 

  • इनकी उत्पत्ति सूर्यास्त के पश्चात् होती है किंतु दोपहर से पहले ये हवाएँ पूर्णतः समाप्त हो जाती हैं। 

  • इनका प्रभाव उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में वर्ष भर तथा शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में केवल ग्रीष्म ऋतु में होता है।

सागर समीर (Sea Breeze) 

  • दोपहर के समय समुद्र से स्थल की ओर अपवाहित होने वाली दैनिक पवनों को ‘सागर समीर’ कहते हैं। 

  • इनकी भी उत्पत्ति का संबंध सागरीय व जलीय भाग के ऊष्मण व शीतलन की प्रक्रिया से है। 

  • दोपहर के समय अधिक तापमान के कारण स्थलीय सतह पर निम्न वायुदाब तथा जलीय सतह पर अपेक्षाकृत उच्च वायुदाब का विकास होता है जिससे सागर समीर. की उत्पत्ति होती है। 

  •  इनका प्रभाव दोपहर से सूर्यास्त तक होता है।

पर्वत समीर व घाटी समीर 

  • रात्रि के समय पर्वत चोटियों से घाटियों की तरफ प्रवाहित होने वाली पवनों को ‘पर्वत समीर’ की संज्ञा दी जाती है।

  • रात्रि में पर्वत चोटियों से तीव्र विकिरण के कारण हवाएँ ठंडी व भारी होने से पर्वतीय ढाल के सहारे घाटियों की तरफ गति करती हैं। 

  • वहीं घाटियों से पर्वत चोटियों की ओर पर्वतीय ढाल के सहारे अपवाहित होने वाली हवाओं को घाटी समीर कहते हैं; ये प्रायः गर्म होती हैं। 

स्थानीय पवनें (Local Winds) 

  • ये पवनें तापमान तथा वायुदाब के स्थानीय अंतर से चला करती हैं और इनका प्रभाव क्षेत्र सीमित होता है। 

  • इनकी उत्पत्ति हेतु स्थानीय तापांतर एवं दाब प्रवणता प्रमुख कारक हैं। ये स्थानीय पवनें क्षोभमंडल की निचली परत तक ही सीमित रहती हैं।

प्रमुख स्थानीय पवनें गर्म पवनें (Warm Winds) 

लू (Loo) 

  • लू अति गर्म तथा शुष्क पवन है। यह मई तथा जून के महीनों में भारत के उत्तरी मैदानों तथा पाकिस्तान में चलती है। 

  • इन पवनों की दिशा पश्चिम से पूर्व रहती है। इनका तापमान लगभग 40°C से 50°C के बीच रहता है।

फॉन (Foehn)

  • अल्प्स पर्वतमाला के पवनाविमुख ढालों पर नीचे की ओर उतरने वाली तीव्र, झोंकेदार, शुष्क और गर्म स्थानीय पवन को ‘फॉन’ कहते हैं। 

  • इनका तापमान 15°C से 20°C तक होता है। ये पर्वतों के हिम को पिघला देती हैं, जिनसे चारागाह पशुओं के चरने योग्य बन जाते हैं और अंगूरों को शीघ्र पकने में सहायता मिलती है।

चिनूक (Chinook)

  • संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा में रॉकी पर्वतमाला के पूर्वी ढालों पर नीचे उतरती गर्म पवन को ‘चिनूक’ कहते हैं। 

  • चिनूक को स्थानीय भाषा में “हिम भक्षक’ (Snow Eater) भी कहते हैं क्योंकि यह समय से पूर्व बर्फ को पिघला देती है। 

  • चिनूक पवनें पशुपालन के लिये लाभदायक होती हैं, इसके आगमन से चारागाह बर्फमुक्त हो जाते हैं। 

सिरॉको (Sirocco) 

  • यह गर्म, रेत से भरी हुई शुष्क पवन है जो सहारा के रेगिस्तानी भाग से उत्तर की ओर भूमध्यसागर से होकर इटली और स्पेन में प्रवेश करती हैं। 

  • इटली में इसका नाम सिरॉको है तथा मिस्र में ‘खमसिन’, लीबिया में ‘गिबल‘ तथा ट्यूनीशिया में चिली आदि नामों से पुकारते हैं। 

  • इससे होने वाली वर्षा को ‘रक्त वर्षा’ (लाल रेत की उपस्थिति के कारण) कहते हैं। इसका वनस्पतियों, कृषि व फलों के बागों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ता है, क्योंकि इनके फूल झड़ जाते हैं। 

ब्लैक रोलर (Black Roler)

  • ये उत्तर अमेरिका के विशाल मैदानों में चलने वाली गर्म व शुष्क पवनें हैं। 

हरमट्टन (Harmattan) 

  • यह सहारा रेगिस्तान में उत्तर-पूर्व तथा पूर्वी दिशा से पश्चिमी दिशा में चलने वाली गर्म तथा शुष्क पवनें हैं।  यह अफ्रीका के पश्चिमी तट की उष्ण व आर्द्र स्थितियों में शुष्कता लाती है, जिससे मौसम सुहावना व स्वास्थ्यप्रद हो जाता है। 

  • गिनी तट पर इसे ‘डॉक्टर पवन’ के नाम से जाना जाता है। 

  • इसी तरह की उष्ण एवं शुष्क हवा ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया प्रांत में ‘ब्रिकफिल्डर’ कही जाती है।

 नॉर्वेस्टर (Norwester) 

  • यह न्यूज़ीलैंड में चलने वाली गर्म व शुष्क पवन है। 

ठंडी पवनें (Cold Winds)

मिस्ट्रल (Mistral) 

  • मिस्ट्रल पवनें अल्प्स पर्वत पर उत्पन्न होती हैं। ये फ्रांस में रोन नदी की घाटी में से होकर भूमध्य सागर की ओर चलती है। मुख्यतः रोन डेल्टा तथा लायंस की खाड़ी में चलती हैं। 

  • यह बहुत ठंडी, शुष्क एवं तेज़ गति से चलने वाली स्थानीय पवन है। इसके आने से तापमान हिमांक के नीचे गिर जाता है। 

बोरा (Bora) 

  • यह मध्य यूरोप में उत्तर-पूर्वी पर्वतों से एड्रियाटिक सागर के पूर्वी किनारों पर चलती है।

  • इससे इटली व यूगोस्लाविया अधिक प्रभावित होते हैं। बोरा लैटिन भाषा का शब्द है, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘उत्तरी’ होता है। 

जोरन (Joran) 

  • ये जूरा पर्वत (स्विट्ज़रलैंड) से जेनेवा झील (इटली) तक रात्रि के समय चलने वाली शीतल व शुष्क हवा है।

ब्लिज़र्ड या हिम झंझावात (Bliccard) 

  • यह बर्फ के कणों से युक्त ध्रुवीय पवनें हैं। 

  • यह रूस के साइबेरिया क्षेत्र, कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका आदि के क्षेत्रों में चलती हैं। 

  • साइबेरिया क्षेत्र में ब्लिज़र्ड का स्थानीय नाम ‘बुरान’ है।

विश्व की प्रमुख स्थानीय पवनें(गर्म पवनें (Warm Winds) 

स्थानीय पवनें

स्थानीय क्षेत्र/देश

चिनूक (Chinook)

रॉकी पर्वत के पूर्वी ढाल 

सांता आना 

(Santa Ana)

कैलिफ़ोर्निया (सं.रा.अमेरिका) 

ब्लैक रोलर (Black Roler)

उत्तरी अमेरिका 

टेम्पोरल (temporal)

मध्य अमेरिका 

ज़ोंडा (Zonda)

एंडीज़ के मैदानी भाग 

(अर्जेंटीना एवं उरुग्वे सर्वाधिक प्रभावित)। 

इसे ‘शीत फॉन’ (Winter Foehn) भी कहते हैं।

फॉन (Foehn)

अल्प्स पर्वत 

(स्विट्ज़रलैंड)

हबूब 

(Haboob) 

उत्तरी सूडान 

सिरॉको (Sirocco)

सहारा रेगिस्तान से भूमध्यसागर

(मिस्र, लीबिया, ट्यूनीशिया, इटली और स्पेन)

हरमट्टन (Harmattan) 

सहारा रेगिस्तान 

अफ्रीका का पश्चिमी तट 

यामो (Yamo)

जापान 

खमसिन (Khamsin)

मिस्र 

लू (Loo) 

उत्तरी भारत व पाकिस्तान 

सिमूम (Simoom) 

अरब रेगिस्तान 

सामुन (Samoon) 

ईरान 

शामल (Shamal)

मेसोपोटामिया एवं फारस की खाड़ी 

काराबुरान (Karaburan)

मध्य एशिया के तारिम बेसिन 

ब्रिकफिल्डर (Brickfielder)

विक्टोरिया प्रांत (ऑस्ट्रेलिया

नार्वेस्टर (Norwester)

उत्तरी न्यूज़ीलैंड 

हवा ठंडी पवनें (Cold Winds)

मिस्ट्रल (Mistral) 

रोन नदी से भूमध्यसागर

(स्पेन एवं फ्राँस)

बोरा (Bora)

एड्रियाटिक सागर के पूर्वी तट 

(इटली व यूगोस्लाविया)

ब्लिज़र्ड 

(Blizzard)

साइबेरिया क्षेत्र, संयुक्त राज्य अमेरिका एवं कनाडा 

नोर्टे 

 (Norte)

संयुक्त राज्य अमेरिकामेक्सिको 

पैम्परों 

(Pampero)

अर्जेंटीनाउरुग्वे 

ग्रेगाले 

(Gregale) 

द. यूरोप के भूमध्यसागरीय क्षेत्र 

जोरन 

(Joran)

जूरा पर्वत (स्विट्ज़रलैंड) 

पापागायो (Papagayo)

मेक्सिको तट 

दक्षिणी बर्स्टर 

(Southerly Burster ) 

न्यू साउथ वेल्स (ऑस्ट्रेलिया

बाईज 

(Bise)

फ्राँस 

लेवांटर (Levanter)

दक्षिणी स्पेन व फ्राँस में 

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