Acid base salt

अम्ल (Acids) :

  • अम्ल का pH मान 7 से कम होता है । 
  • अम्ल स्वाद में खट्टा होता है । 
  • अम्ल विद्युत् के सुचालक होते हैं । 
  • अम्ल धातु से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करते हैं ।
  • भस्म एवं क्षार से प्रतिक्रिया करके लवण और जल बनाता है ।
  • नीले लिटमस पत्र को लाल कर देता है ।
  • मिथाइल औरेंज को लाल कर देता है । 
  • आरहेनियस का आयनिक सिद्धांत (Arrhenius’s Ionic Theory) : अम्ल जल में घुलकर हाइड्रोजन आयन (H+) देता है ।
  • ब्रान्सटेड और लॉरी का सिद्धान्त (Bronsted and Lowry Theory) : अम्ल  किसी दूसरे पदार्थ को प्रोटोन प्रदान करने की क्षमता रखते हैं ।
  • लिविस का इलेक्ट्रॉनिक सिद्धांत (Lewis ‘s Electronic Theory):  अम्ल में इलेक्ट्रॉन का एक निर्जन (Lone Pair ) स्वीकार करने की प्रवृत्ति होती है।

अम्लों का वर्गीकरण (Classification of Acids) : 

ऑक्सी अम्ल ( Oxy Acids) :

  • जिन अम्लों में हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन दोनों उपस्थित रहते हैं ।
  • जैसे – सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4),  नाइट्रिक अम्ल (HNO3), नाइट्रस अम्ल (HNO2 ) आदि । 

हाइड्रा अम्ल (Hydra Acids) :

  • जिन अम्लों में केवल हाइड्रोजन उपस्थित रहता है, हाइड्रा अम्ल कहलाता है।
  • हाइड्रा अम्ल में ऑक्सीज़न अनुपस्थित होता है ।
  • जैसे— हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl), हाइड्रोब्रोमिक अम्ल (HBr),  

अम्लों के उपयोग : 

(a) सल्फ्यूरिक अम्ल का उपयोग :

  • पेट्रोलियम के शोधन में
  • कई प्रकार के विस्फोटक बनाने में
  • रंग व औषधियाँ बनाने में
  • संचायक बैटरियों में आदि । 

(b) नाइट्रिक अम्ल का उपयोग :

  • औषधियों के निर्माण में
  • उर्वरक बनाने में
  • फोटोग्राफी में
  • विस्फोटक पदार्थों के निर्माण में
  • अम्लराज बनाने में
  • प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप में आदि 

(c) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का उपयोग :

  • प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप में
  • अम्लराज बनाने में,
  • रंग एवं औषधि निर्माण में आदि । 

(d) एसीटिक अम्ल का उपयोग :

  • विलायक के रूप में
  • सिरका निर्माण में
  • एसीटोन बनाने में, 
  • खट्टे खाद्य पदार्थ बनाने में आदि । 

(e) फार्मिक अम्ल का उपयोग :

  • जीवाणुनाशक के रूप में
  • फलों को संरक्षित करने में,
  • रबड़ के स्कदन में
  • चमड़ा उद्योग में आदि । 

(f) ऑक्जेलिक अम्ल का उपयोग :

  • फोटोग्राफी में, कपड़ों की छपाई व रंगाई में,
  • चमड़े के विरंजक के रूप में, कपड़े पर स्याही के धब्बे को हटाने में आदि । 

(g) बेंजोइक अम्ल का उपयोग :

  • दवा व खाद्य पदार्थों के संरक्षण में आदि । 

(h) साइट्रिक अम्ल का उपयोग :

  • धातुओं को साफ करने में, खाद्य पदार्थों व दवाओं के निर्माण 
  • में, कपड़ा उद्योग में आदि । 

भस्म (Bases) :

  • अम्ल का pH मान 7 से अधिक  होता है । 
  • भस्म  अम्लों से अभिक्रिया करके लवण एवं जल बनाते हैं ।
  • क्षार स्वाद में तीखा या कड़वा होता है ।
  • क्षार छूने में साबुन जैसा चिकना लगता है ।
  • प्रबल क्षार विद्युत् का सुचालक होता है । 
  • क्षार लाल लिटमस को नीला कर देता है।
  • मिथाइल ऑरेंज को पीला कर देता है।
  • क्षार फिनॉल्पथैलीन को गुलाबी कर देता है । 
  • क्षार में तेल और गंधक को घुला लेने की क्षमता होती है।
  • क्षार कार्बनिक पदार्थों को नष्ट कर देते हैं ।
  • लवण के घोल में डाले जाने पर क्षार प्रायः धातु के हाइड्रॉक्साइड को अवक्षेपित कर देते हैं ।
  • आरहेनियस का आयनिक सिद्धांत ( Arrhenius’s lonic Theory):  भस्म  जलीय घोल में हाइड्रॉक्साइड आयन (OH) देता है। जैसे
  • ब्रान्सटेड-लॉरी का सिद्धांत (Bronsted Lowry Theory ) : भस्म  प्रोटोन ग्रहण करने की क्षमता रखता है।
  • लिविस का इलेक्ट्रॉनिक सिद्धांत (Lewis’s Electronic Theory) :भस्म में इलेक्ट्रॉनों के एक निर्जन जोड़ी (lone Pair) प्रदान करने की क्षमता होती है।
  • भस्म के प्रकार : भस्म या क्षारक दो प्रकार के होते हैं-
    • (i) जल में विलेय भस्म (क्षार (Alkali))
    • (ii) जल में अविलेय भस्म

क्षार (Alkali):

  • वैसे भस्म जो जल में विलेय होते हैं, क्षार (Alkali) कहलाते हैं ।
  • जैसे- सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH), पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (KOH), कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड [Ca(OH)2 ], अमोनियम हाइड्रॉक्साइड (NH4 OH) आदि । 
  • सभी क्षार भस्म (क्षारक) होते हैं, लेकिन सभी भस्म क्षार नहीं होते। इसका कारण यह है कि सभी भस्म जल में विलेय नहीं होते हैं। 

जल में अविलेय क्षारक (Water Insoluble Bases) :

  • जल में अविलेय क्षारक अम्ल के साथ अभिक्रिया करके लवण और जल तो बनाते हैं, परन्तु क्षार के अन्य गुण प्रदर्शित नहीं करते हैं।
  • जैसे—जिंक ऑक्साइड (ZnO), फेरस ऑक्साइड (FeO), फेरिक ऑक्साइड (Fe2O3),  आदि । 

भस्मों व क्षारों के उपयोग 

कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड [Ca(OH)2]:

  • घरों में चूना पोतने में, गारा एवं प्लास्तर बनाने में, ब्लीचिंग पाऊडर (विरंजक चूर्ण) बनाने में,
  • जल को मृदु बनाने में, अम्ल के जलन पर मरहम पट्टी करने में,
  • चमड़ा के ऊपर का बाल साफ करने में, मिट्टी की अम्लीयता दूर करने में आदि ।

कास्टिक सोडा (NaOH) :

  • साबुन बनाने में, पेट्रोलियम के शुद्धीकरण में, 
  • कागज बनाने में, दवा निर्माण में, घरों एवं कारखानों को साफ करने में आदि ।

पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड (KOH) :

  • प्रयोगशाला में प्रतिकर्मक के रूप में, मुलायम साबुन के निर्माण में, CO, तथा SO, जैसे गैसों के अवशोषक के रूप में आदि ।

कैल्सियम ऑक्साइड (CaO) :

  • मकान बनाने में गारे के रूप में, कास्टिक सोडा के निर्माण में, सोडियम कार्बोनेट के निर्माण में, ब्लीचिंग पाउडर के निर्माण में आदि । 

मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड [Mg (OH)2] :

  • पेट की अम्लीयता को दूर करने में,
  • विषाक्तीकरण (Poisoning) के एण्टीडोट (Antidote) के रूप में, चीनी उद्योग मोलासिस से चीनी तैयार करने में आदि । 

 मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO) :

  • औषधि निर्माण में, रबड़ पूरक के रूप में, बायलरों: प्रयोग में आदि । 

 

लवण (Salt) :

  • लवण वैसे यौगिक हैं, जो अम्ल में विद्यमान विस्थापनशील हाइड्रोजन परमाणु के धातु अथवा धातु सदृश आचरण करने वाले मूलक द्वारा पूर्ण या आंशिक रूप से विस्थापि होने पर बनते हैं ।
  • अम्ल और क्षारक ( भस्म ) की अभिक्रिया के फलस्वरूप जल के साथ बना दूसरा यौगिक ‘लवण’ कहलाता है ।
  • सोडियम क्लोराइड (NaCl): मानव आहार का आवश्यक अंग, आचार के परिरक्षण में, मांस एवं मछली के संक्षारण में, अनेक रासायनिक यौगिकों के निर्माण में आदि ।
  • सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO3): रसोईघरों में, पेट की अम्लीयता को कम करने की औषधि के रूप  में, बेकिंग पाउडर के रूप में, अग्निशामक यंत्रों में आदि । 
  • सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3.10H2O): कपड़ों की धुलाई में, काँच निर्माण में, कास्टिक सोडा के निर्माण में, अपमार्जक (डिटर्जेण्ट) चूर्ण के निर्माण में, अनेक रासायनिक यौगिकों के निर्माण में आदि । 
  • पोटैशियम नाइट्रेट (KNO3): गन पाउडर बनाने में, आतिशबाजी का सामान बनाने में, काँच उद्योग में, उर्वरक के रूप में आदि । 
  • कॉपर सल्फेट (CuSO4 · 5H2O): कीटाणुनाशक के रूप में, विद्युत् लेपन में, रंगाई एवं छपाई में, कॉपर के शुद्धीकरण में आदि । 
  • पोटाश एलम [K2SO4.Al2(SO4)3.24H2O] : जल के शुद्धीकरण में, औषधि निर्माण में, रंगाई में रंग बंधक के रूप में, शरीर के किसी अंग के थोड़ा कट जाने पर खून का बहना रोकने में, चमड़ा उद्योग में आदि । 

 

pH मूल्य (pH Value) :

  • pH  पदार्थों की अम्लीयता व क्षारीयता को प्रदर्शित करती है ।
  • इसका मान हाइड्रोजन आयन (H+ ) के सांद्रण के व्युत्क्रम के लघुगुणक (Logarithm) के बराबर होता है ।
  • pH = log [1/H+या, pH = – log [H+
  • pH का मान 0 से 14 के बीच होता है ।
  • जिन विलयनों PH का मान 7 से कम होता है, वे अम्लीय होते हैं ।
  • जिन विलयनों का pH मान 7 से अधिक होता है, वे क्षारीय होते हैं।
  • उदासीन (Neutral) विलयनों के pH का मान 7 होता है |
  • pH मूल्य का उपयोग ऐल्कोहॉल, चीनी, कागज आदि उद्योगों में होता है । 
  • बफर विलियन (Buffer Solution): वह विलियन जो कि अम्ल या क्षार की साधारण मात्राओं को अपनी प्रभावी अम्लता या क्षारता में पर्याप्त परिवर्तन किए बिना अवशोषित कर लेता है, बफर विलयन कहलाता है ।
    • जैसे- सोडियम ऐसीटेट तथा ऐसीटिक एसिड का मिश्रण एक प्रभावी बफर विलयन है, जब उसे पानी में विलीन किया जाता है । जिस विलयन में बफर विलयन अंतर्विष्ट होता है, वह अत्यधिक मंद अम्ल के रूप में कार्य करता है । 

कुछ सामान्य पदार्थों का pH मान 

पदार्थ pH मान 
 नींबू   2.2-2.4 
सिरका 2.4-3.4
शराब  2.8-3.8 
टमाटर जूस  4.0-4.4 
बीयर 4.0-5.0 
कॉफी  4.5-5.5
मानव मूत्र  5.5-7.5 
मानव लार 6.5-7.5 
मानव रक्त  7.3- 7.5
दूध  6.4
वर्षा जल (शुद्ध जल ) 7

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

7.3 7.5 

 

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6.4