Updated on 02/04/26 by Er. Mananjay Mahato

सर्वनाम

  • संज्ञा (नाम) के बदले आने वाले शब्द को सर्वनाम कहते हैं। 
  • इसका मुख्य उद्देश्य वाक्य में संज्ञा की बार-बार पुनरावृत्ति (Repetition) को रोकना और भाषा को सुंदर बनाना है।
  • हिन्दी में ग्यारह सर्वनाम होते हैं 
    • मैं, तू, आप, यह, वह, जो, सो, कोई, कुछ, कौन, क्या।
  • सर्वनाम के भेद : छह भेद होते हैं:
    • पुरूषवाचक सर्वनाम (Personal)
    • निश्चयवाचक सर्वनाम (Demonstrative)
    • अनिश्चयवाचक सर्वनाम (Indefinite)
    • सम्बन्धवाचक सर्वनाम (Relative)
    • प्रश्नवाचक सर्वनाम (Interrogative)
    • निजवाचक सर्वनाम (Reflexive)
भेद परिभाषा उदाहरण
पुरुषवाचक बोलने वाले, सुनने वाले या किसी अन्य के लिए प्रयुक्त। मैं, तुम, वह, हम, वे।
निश्चयवाचक किसी निश्चित वस्तु या व्यक्ति का बोध कराने वाले। यह, वह, ये, वे।
अनिश्चयवाचक जिससे किसी निश्चित व्यक्ति या वस्तु का बोध न हो। कोई, कुछ।
संबंधवाचक जो वाक्य में दूसरे सर्वनाम से संबंध स्थापित करें। जो-सो, जैसा-वैसा।
प्रश्नवाचक  प्रश्न पूछने के लिए प्रयुक्त होने वाले शब्द। कौन, क्या, कहाँ।
निजवाचक कर्ता स्वयं के लिए जिन शब्दों का प्रयोग करता है। स्वयं, खुद, अपने आप।

क्रम सर्वनाम का भेद याद रखने वाले शब्द (मूल सर्वनाम) याद रखने की ट्रिक
1 पुरुषवाचक मैं, तू मैं और तू (बात करने वाले)।
2 निश्चयवाचक यह, वह इशारा करना (यह पास, वह दूर)।
3 अनिश्चयवाचक कोई, कुछ जब पक्का न हो (कोई आया है, कुछ दे दो)।
4 संबंधवाचक जो, सो जो करेगा, सो भरेगा (जोड़ी वाले शब्द)।
5 प्रश्नवाचक कौन, क्या सवाल पूछना (कौन है? क्या है?)।
6 निजवाचक आप अपने आप के लिए (मैं अपने ‘आप’ ही कर लूँगा)।
  • पुरूषवाचक सर्वनाम : प्रयोग व्यक्तियों (स्त्री या पुरूष) के लिए किया जाता है। 
    • इसी कारण इसके तीन रूप होते हैं
    • (क) बोलने वाला अर्थात् वक्ता 
    • (ख) सुनने वाला अर्थात् श्रोता 
    • (ग) अन्य व्यक्ति अर्थात् जिसके बारे में बात की जा रही है। 
  • इन तीन आधारों पर पुरूषवाचक सर्वनाम के तीन भेद होते हैं
    • (1) उत्तम पुरूष 
    • (2) मध्यम पुरूष 
    • (3) अन्य पुरूष 
  • (1) उत्तम पुरूष 
    • जिन सर्वनामों का प्रयोग बोलने वाला (वक्ता) और लिखने वाला अपने लिए करता है, उसे उत्तम पुरूष कहते हैं। 
    • जैसे- मैं, मेरा, मैंने, हम, हमारा, हमने, हमें।
  • (2) मध्यम पुरूष 
    • जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग सुनने वाले श्रोता और पढ़ने वाले के लिए किया जाता है, उन्हें मध्यम पुरूष कहते हैं। 

    • जैसे- तू, तुम तुमने, तुम्हें, तेरा, तुम्हारा, तुमकों, तुझसे, आप। 

  • (3) अन्य पुरूष
    • जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग बोलने वाला (वक्ता) और सुननेवाला (श्रोता) किसी अन्य व्यक्ति के लिए करते हैं, उन्हें अन्य पुरूष कहते हैं। 

    • जैसे- वह, वे, उसे, उसके, उन्हें, उन्होंने, उनको, उसमें, यह, ये।

  • 2. निजवाचक सर्वनाम 
    • जिस सर्वनाम से पुरूषवाचक सर्वनाम के अपनेपन का बोध होता है, उसे निजवाचक सर्वनाम कहते हैं। निजवाचक सर्वनाम का रूप ‘आप’ होता है। 

  • 3. निश्चयवाचक सर्वनाम 
    • जिस सर्वनाम से वक्ता के दूर या समीप की वस्तु, प्राणी, व्यक्ति और घटना का निश्चित ज्ञान होता है, उसे निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं।

    • जैसे यह, वह, वे, उसमें, उससे। 

  • 4. अनिश्चयवाचक सर्वनाम 
    • जिस सर्वनाम से किसी निश्चित वस्तु, व्यक्ति या प्राणी का ज्ञान नहीं होता है, उसे अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं। 

    • जैसे- कोई, कुछ, किसी। 

  • 5. सम्बन्धवाचक सर्वनाम 
    • जिस सर्वनाम के द्वारा दो उपवाक्यों का आपस में संबंध स्थापित होता है उसे सम्बन्धवाचक सर्वनाम कहते हैं। 

    • जैसे- जो-सो, जैसा-वैसा, जो-वह, जिसे-उसने। 

  • 6. प्रश्नवाचक सर्वनाम 
    • जिस सर्वनाम के द्वारा किसी प्राणी, वस्तु, व्यक्ति और कार्य के विषय में प्रश्न किया जाता है, उसे प्रश्नवाचक सर्वनाम कहा जाता है। 

    • जैस कौन, क्या किसने, किसे, किससे, किनको।

  • सर्वनाम और कारक (विकारी रूप)
    • सर्वनाम शब्द लिंग के आधार पर नहीं बदलते, लेकिन वचन और कारक के अनुसार इनके रूप बदल जाते हैं।
    • लिंग: ‘वह जा रहा है’ और ‘वह जा रही है’—दोनों में ‘वह’ समान है।
    • कारक का प्रभाव:
      • मैं (कर्ता) → मुझे, मुझसे, मेरा, मेरे लिए।
      • वह (कर्ता) → उसे, उससे, उसका, उनके लिए।
  • विशेष अंतर: ‘यह/वह’ (निश्चयवाचक vs पुरुषवाचक)
    • जब ‘वह’ का प्रयोग किसी व्यक्ति के लिए हो, तो वह अन्य पुरुषवाचक है। (जैसे: वह सो रहा है।)
    • जब ‘वह’ का प्रयोग किसी वस्तु की निश्चितता बताने के लिए हो, तो वह निश्चयवाचक है। (जैसे: वह मेरी किताब है।)
  • सजीव और निर्जीव: ‘कौन’ का प्रयोग अक्सर चेतन (सजीव) के लिए और ‘क्या’ का प्रयोग जड़ (निर्जीव) के लिए होता है।
  • आदर सूचक: ‘आप’ का प्रयोग मध्यम पुरुष में आदर देने के लिए और निजवाचक में स्वयं के लिए होता है।
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