सरहुल यह जनजातियो का सबसे बड़ा पर्व है। अन्य नाम: खद्दी (उराँव जनजाति) बा परब(संथाल जनजाति) जकोर (खड़िया जनजाति) यह प्रकृति से संबंधित त्योहार है। पर्व का आयोजन – यह चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को ,बसंत के मौसम में इस पर्व में साल के वृक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह फूलों का त्योहार है। यह पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है पहला दिन – मछली के अभिषेक किए हुए जल को घर में छिड़का जाता है। दूसरा दिन – उपवास रखा जाता है तथा गांव का पुजारी गांव के हर घर की छत पर साल के फूल रखता है। तीसरा दिन पाहन (पुरोहित) द्वारा सरना (पूजा स्थल) पर सरई के फूलों की पूजा की जाती है मुर्गी की बलि दी जाती है चावल और बलि की मुर्गी का मांस मिलाकर सुड़ी नामक खिचड़ी बनायी जाती है । चौथा दिन सरहुल फूल का विसर्जन स्थान – […]